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मध्य प्रदेशः मदरसों के पाठ्यक्रम की जांच के आदेश के विरूद्ध एकजुट हुए मुस्लिम अदारे

मुस्लिम नाउ ब्यूरो, नई दिल्ली

केंद्र के एक विभाग के इशारे पर देशभर के मदरसों के खिलाफ प्रदेश सरकारें अचानक सक्रिय हो उठी हैं. हालांकि अब भी केंद्र का उक्त महकमा खुलकर सामने नहीं आया है, पर उसके सुझावांें पर कम से कम भाजपा शासित सूबे में मदरसों को लेकर अचानक अभियान सा चलाया जा रहा है. इसे उनकी ओर से मदरसों में सुधार की कोशिश का नाम दिया गया है, पर केंद्र विरोधी पार्टी की सरकारें मदरसों को लेकर ऐसे विवादास्पद फैसले क्यों नहीं ले रही हैं ? इस महत्वपूर्ण सवाल का जवाब अब तक किसी ने नहीं दिया है. और न ही अब तक उन प्रदेशों से ऐसी कोई जानकारी सामने आई जिससे पता चले कि वहां की सरकारों ने मदरसों के कल्याण के लिए अब तक क्या कदम उठाए हैं ? इसके उलट, ऐसे प्रदेशों के मदरसों के शिक्षक महीनों से बगैर वेतन के कठिनाई भरी जिंदगी जीने को मजबूर हैं.

बहरहाल, इस कड़ी में मध्य प्रदेश सरकार द्वारा सूबे के मदरसों के पाठ्यक्रम की जांच करने के ऐलान कि साथ इस्लामी अदारे एकजुट हो गए हैं.

इससे मध्य प्रदेश में मदरसों के पाठ्यक्रम को लेकर सरकार और मुस्लिम सामाजिक संगठनों के बीच टकराव बढ़ने की संभावना मुखर हो गई है. सरकार ने अपने स्टैंड पर कायम रहते हुए मदरसों के सिलेबस में आपत्तिजनक चीजों की जांच के आदेश जारी कर दिए हैं. वहीं, मुस्लिम संगठन इसे अल्पसंख्यकों के शिक्षा प्राप्त करने के संवैधानिक अधिकारों पर सरकार का हमला मान रहे हैं. मुस्लिम सामाजिक संगठनों का कहना है कि एक तरफ सरकार अल्पसंख्यकों को मुख्यधारा में शामिल करने की बात करती है, वहीं जब अल्पसंख्यक समुदाय खुद को शिक्षा से लैस करने की दिशा में कदम उठाता है तो सरकार हर कदम पर दखल देती है ताकि अल्पसंख्यक वर्ग इससे दूर हो जाए.

इसके बा उलेमा बोर्ड और अल्पसंख्यक संयुक्त संगठन सरकार के खिलाफ एक साथ आ गए हैं.मदरसा कल्याण संघ के सचिव साहिब कुरैशी ने कहा कि मदरसों के पाठ्यक्रम की जांच करने की सरकार की घोषणा का हम स्वागत करते हैं.आयोजकों को यह भी देखना चाहिए कि मदरसों के लिए पाठ्यक्रम कौन तैयार करता है. मदरसा पाठ्यक्रम किसी मुस्लिम संगठन द्वारा नहीं बल्कि एक सरकारी समिति द्वारा तैयार किया जाता है और सरकार द्वारा तैयार पाठ्यक्रम को मदरसों के छात्र पढ़ते हैं. सरकार को इस बात की भी जांच करनी चाहिए कि जब 5वीं और 8वीं बोर्ड की परीक्षा हो चुकी है तो सरकार द्वारा अब तक मदरसों के 5वीं और 8वीं बोर्ड के छात्रों की किताबें क्यों जारी नहीं की गई हैं. सरकार को इस बात की भी जांच करनी चाहिए कि मदरसा शिक्षकों का वेतन विगत कई वर्षों से जारी क्यों नहीं किया गया. हमें दोष देने से सरकार की असावधानी और उपेक्षा के दाग नहीं धुलेंगे.

मध्य प्रदेश उलमा बोर्ड के अध्यक्ष मौलाना सैयद अनस अली नदवी का कहना है कि यह दरअसल हमारी शिक्षा व्यवस्था में सीधा हस्तक्षेप है. एक तरफ सरकार सबको पढ़ाओ, सब बढ़ाओ का नारा देती है लेकिन उसे उन्हें पढ़े लिखे मुसलमान पसंद नहीं है. इसलिए हम बहानों से परेशान हैं. मदरसों ने हमेशा देशभक्त पैदा किए हैं. चाहे वो आजादी का आंदोलन हो या सरहदों पर कुर्बानी.सरकार हमारी उपेक्षा करके भारत का नाम रोशन नहीं कर सकती. भारत विश्वगुरु तभी बनेगा जब सभी लोगों को शिक्षा प्राप्त करनेंगे और आगे बढ़ने के समान अवसर प्राप्त होंगे.हम सभी मदरसों की शिक्षा व्यवस्था के बारे में सरकार से एकजुट होकर बात करेंगे और अपने संवैधानिक अधिकारों के लिए खड़े होंगे.