जबलपुर क्रूज हादसा: मजहबी नफरत के दौर में रमजान ने पेश की इंसानियत की मिसाल
मुस्लिम नाउ ब्यूरो, नई दिल्ली, जबलपुर
मध्य प्रदेश के जबलपुर में नर्मदा नदी की लहरों पर सैर-सपाटे का सपना पल भर में चीख-पुकार में बदल गया। बरगी डैम के गहरे पानी में जब पर्यटकों से भरा क्रूज समाने लगा तो वहां सिर्फ मौत का सन्नाटा और दहशत थी। लेकिन इसी बीच एक ऐसा नाम उभरा जिसने न केवल डूबते हुए चार परिवारों के चिराग बुझने से बचाए बल्कि नफरत की राजनीति करने वालों को भी करारा जवाब दिया। पश्चिम बंगाल के 22 साल के नौजवान रमजान ने अपनी जान की परवाह किए बिना 25 फुट ऊंचे पुल से छलांग लगा दी। आज पूरा देश इस जांबाज मजदूर को सलाम कर रहा है।
हादसे की शुरुआत गुरुवार की शाम को हुई। मौसम सुहाना था और लोग बरगी डैम के शांत पानी में क्रूज की सवारी का लुत्फ उठा रहे थे। अचानक आए तेज आंधी और तूफान ने लहरों को बेकाबू कर दिया। पर्यटकों से भरा यह सरकारी क्रूज अपना संतुलन खो बैठा। खमरिया द्वीप के पास देखते ही देखते क्रूज पानी में समाने लगा। लोग अपनी जान बचाने के लिए चिल्ला रहे थे। कुछ के पास लाइफ जैकेट थे लेकिन वे उन्हें पहन नहीं पाए थे। मंजर इतना खौफनाक था कि किनारे पर खड़े लोगों के हाथ-पांव फूल गए थे।
4 Dead, Many Missing As Cruise Boat With 31 On Board Sinks In Madhya Pradesh https://t.co/1Ta29g4W7d pic.twitter.com/OOMBbyRQlz
— NDTV (@ndtv) April 30, 2026
इसी डैम के पास एक निर्माणाधीन पुल पर पश्चिम बंगाल का रहने वाला रमजान मजदूरी कर रहा था। जैसे ही उसकी नजर डूबते क्रूज पर पड़ी उसने एक पल की भी देरी नहीं की। रमजान ने एक लंबी रस्सी उठाई और पुल की ऊंचाई से सीधे उफनती नर्मदा में छलांग लगा दी। यह कोई फिल्मी स्टंट नहीं था बल्कि एक इंसान का दूसरे इंसान को बचाने का जज्बा था। पानी का बहाव तेज था और गहराई जानलेवा थी। रमजान ने बिना किसी लाइफ जैकेट या सरकारी मदद के लहरों से मुकाबला शुरू किया। उसने एक-एक करके छह लोगों को पानी से बाहर निकाला।
देश का असली हीरो ‘ रमजान ‘
— Pushpraj Yadav (@pushprajyadav97) May 2, 2026
मध्यप्रदेश के जबलपुर में हुए क्रूज हादसे ने जहां पूरे देश को झकझोकर रख दिया वहीं इसी हादसे में एक शख्स ऐसा भी सामने आया है जो किसी हीरो से कम नहीं है।
दरअसल पश्चिम बंगाल के रहने वाले 22 वर्षीय रमजान की नजर जैसे ही डूब रहे क्रूज पर पड़ी वो 25 फुट… pic.twitter.com/PlH9s2WThT
बेहद दुखद रहा कि उन छह लोगों में से दो की जान नहीं बच सकी। लेकिन रमजान के हौसले ने चार लोगों को नई जिंदगी दे दी। यह सब तब हुआ जब प्रशासनिक रेस्क्यू टीमें मौके पर पहुंची भी नहीं थीं। रमजान के साथ बिहार के रहने वाले बिंद्र कुमार यादव और राज कुमार जैसे साथियों ने भी मदद का हाथ बढ़ाया। इन मजदूरों ने साबित कर दिया कि जब जान बचाने की बात आती है तो इंसान की जात या उसका मजहब नहीं देखा जाता।
Ramzan… We Salute You
— Kavish aziz (@azizkavish) May 2, 2026
In the Bargi Dam tragedy in Jabalpur, "Ramzan" saved the lives of four people.
Construction work was underway just a short distance from the spot at the Bargi Dam where the cruise accident occurred. Laborers engaged in the bridge construction project… pic.twitter.com/GQ1ywtbRjG
सोशल मीडिया पर अब रमजान को लेकर एक अलग ही लहर चल रही है। लोग कह रहे हैं कि असली हीरो पर्दे पर नहीं बल्कि जमीन पर काम करने वाले ये मजदूर हैं। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री ने रमजान की बहादुरी के लिए 51 हजार रुपये के इनाम का ऐलान किया है। हालांकि जनता इस राशि से खुश नहीं है। सोशल मीडिया पर यूजर्स का कहना है कि जब मामूली मैच जीतने वाले क्रिकेटरों पर करोड़ों की बारिश होती है तो चार जिंदगियां बचाने वाले इस गरीब मजदूर को इतना कम इनाम क्यों। लोग अब अभियान चला रहे हैं कि रमजान को कम से कम एक करोड़ रुपये का इनाम मिलना चाहिए ताकि देश में बहादुरी और इंसानियत की कद्र हो सके।
यह घटना ऐसे समय में हुई है जब देश के कुछ हिस्सों में सांप्रदायिक तनाव की खबरें आती रहती हैं। हाल ही में बरेली में एक मौलाना की हत्या के बाद माहौल बिगाड़ने की कोशिश की गई थी। लेकिन जबलपुर के इस हादसे ने गंगा-जमुनी तहजीब की उस डोर को फिर से मजबूत कर दिया है जो भारत की असली पहचान है। रमजान रोजे से था और इबादत के इस महीने में उसने जो कुर्बानी पेश की उसने हर मजहब के इंसान का दिल जीत लिया।
प्रशासनिक स्तर पर अब इस हादसे की जांच शुरू हो गई है। शुरुआती जांच में लापरवाही की बात सामने आ रही है। क्रूज के पायलट महेश पटेल को सुरक्षित बचा लिया गया है। चश्मदीदों का कहना है कि पायलट को पहले ही रुकने की चेतावनी दी गई थी लेकिन उसने इसे अनसुना कर दिया। फिलहाल इस हादसे में मरने वालों की संख्या 9 तक पहुंच गई है। एसडीआरएफ की टीमें अभी भी सर्च ऑपरेशन चला रही हैं क्योंकि कुछ लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं।
जबलपुर के कलेक्टर राघवेंद्र सिंह और पुलिस अधीक्षक संपत उपाध्याय खुद मौके पर रहकर राहत कार्यों की निगरानी कर रहे हैं। घायलों का इलाज जबलपुर मेडिकल कॉलेज में चल रहा है। पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह ने स्पष्ट किया है कि अगर क्रूज कंपनी या सरकारी अधिकारियों की लापरवाही पाई गई तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।
आज पूरा देश रमजान की उस बहादुरी की चर्चा कर रहा है जिसने अंधेरे पानी में उम्मीद की रोशनी दिखाई। यह कहानी केवल एक हादसे की नहीं है। यह कहानी उस भरोसे की है जो बताता है कि जब तक रमजान जैसे लोग इस देश में मौजूद हैं हमारी एकता और भाईचारा सुरक्षित है। वह बंगाल से जबलपुर पेट पालने आया था लेकिन आज वह करोड़ों भारतीयों के दिल में अपनी जगह बना चुका है।
रमजान का कहना है कि उसने जो किया वह केवल अपना फर्ज समझकर किया। उसे इस बात का मलाल है कि वह बाकी लोगों को नहीं बचा सका। लेकिन उन चार परिवारों के लिए रमजान किसी फरिश्ते से कम नहीं है जिनके सदस्य आज उसकी वजह से सही-सलामत अपने घर पर हैं। जबलपुर की नर्मदा घाटी आज एक मजदूर की जांबाजी की गवाह बनी है जो सालों तक याद रखी जाएगी।

