जामिया मिल्लिया इस्लामिया: छात्राओं के लिए आयोजित हुआ खास ‘शी शक्ति’ ट्रेनिंग कैंप
नई दिल्ली
: राजधानी दिल्ली स्थित जामिया मिल्लिया इस्लामिया का जेके गर्ल्स हॉस्टल इन दिनों एक नई ऊर्जा से भरा नजर आया। यहां रहने वाली छात्राओं के लिए पांच दिनों का एक विशेष प्रशिक्षण सत्र आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को शारीरिक और मानसिक रूप से सशक्त बनाना था। 18 अप्रैल से 22 अप्रैल 2026 तक चले इस कैंप में छात्राओं को आत्मरक्षा के गुर सिखाए गए। साथ ही उन्हें जुंबा, योग और ध्यान (मेडिटेशन) के जरिए सेहतमंद रहने के तरीके भी बताए गए।

यह पूरा कार्यक्रम ‘प्रोजेक्ट शी शक्ति’ के तहत आयोजित हुआ। इसे दिल्ली पुलिस पब्लिक लाइब्रेरी और शिखर फाउंडेशन के सहयोग से पूरा किया गया। आज के दौर में महिलाओं की सुरक्षा और उनकी सेहत एक बड़ी चुनौती है। इसी को ध्यान में रखते हुए इस पहल की शुरुआत की गई। हॉस्टल की छात्राओं ने इसमें बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। पांच दिनों तक चले इस सत्र में सुबह से लेकर शाम तक अलग-अलग गतिविधियां आयोजित की गईं।
आत्मरक्षा यानी सेल्फ डिफेंस के सत्र में छात्राओं को सिखाया गया कि किसी भी अप्रिय स्थिति में वे अपनी सुरक्षा कैसे कर सकती हैं। उन्हें कुछ ऐसे आसान लेकिन असरदार तरीके बताए गए जिनसे वे हमलावर को चकमा देकर खुद को बचा सकें। इसके अलावा जुंबा सेशन ने छात्राओं में जोश भर दिया। संगीत की धुनों पर फिटनेस रूटीन ने उन्हें शारीरिक रूप से सक्रिय रहने की प्रेरणा दी। केवल शरीर ही नहीं, बल्कि मानसिक शांति के लिए योग और ध्यान के सत्र भी रखे गए। भागदौड़ भरी इस जिंदगी में मानसिक तनाव को कम करने के लिए योग एक बेहतरीन जरिया साबित हुआ।

इस सफल आयोजन के पीछे जेके गर्ल्स हॉस्टल की प्रोवोस्ट प्रोफेसर निखत मंजूर का बड़ा हाथ रहा। उनके मार्गदर्शन और नेतृत्व की वजह से ही यह प्रोग्राम सुचारू रूप से चल सका। उन्होंने छात्राओं को लगातार प्रोत्साहित किया कि वे केवल पढ़ाई ही नहीं बल्कि अपने व्यक्तित्व के विकास पर भी ध्यान दें। डिप्टी प्रोवोस्ट डॉ. अर्शी सलामत ने भी पूरे सत्र के दौरान अपना सक्रिय सहयोग दिया। उन्होंने छात्राओं के साथ वक्त बिताया और उन्हें हर कदम पर मोटिवेट किया।
कार्यक्रम को जमीन पर उतारने की जिम्मेदारी वार्डन शबनम खान ने बखूबी निभाई। उनके साथ रेजिडेंट वार्डन डॉ. इकरा निसार और डॉ. शीनम अय्यूब ने मिलकर पूरी व्यवस्था को संभाला। इन सभी की मेहनत का ही नतीजा था कि हर सत्र समय पर हुआ और छात्राओं की भागीदारी शत-प्रतिशत रही। आयोजकों ने इस मौके पर कहा कि महिलाओं को आत्मरक्षा के गुर सिखाना और उन्हें संतुलित जीवनशैली के लिए प्रेरित करना समय की मांग है। इस तरह की पहल से महिलाओं के भीतर आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता की भावना पैदा होती है।

कार्यक्रम के आखिरी दिन छात्राओं के चेहरे पर एक अलग ही चमक थी। उन्होंने इस ट्रेनिंग को लेकर अपने अनुभव साझा किए। छात्राओं का कहना था कि इन पांच दिनों में उन्होंने बहुत कुछ नया सीखा है। अब वे पहले से ज्यादा सुरक्षित और आत्मविश्वास से लबरेज महसूस कर रही हैं। योग और मेडिटेशन से उन्हें अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करने में मदद मिलेगी। इस तरह के आयोजनों से न केवल शारीरिक फिटनेस बढ़ती है बल्कि छात्राओं को एक-दूसरे के करीब आने और टीम वर्क सीखने का मौका भी मिलता है।

अंत में यह आयोजन एक सकारात्मक संदेश के साथ संपन्न हुआ। जामिया के इस हॉस्टल ने यह साबित कर दिया कि अगर सही अवसर और मार्गदर्शन मिले तो महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी सुरक्षा और सेहत का ख्याल खुद रख सकती हैं। प्रोजेक्ट ‘शी शक्ति’ की यह मुहिम आने वाले समय में और भी छात्राओं को प्रेरित करेगी। प्रशासन ने उम्मीद जताई है कि भविष्य में भी इस तरह के उपयोगी सत्र आयोजित किए जाते रहेंगे। ताकि छात्राएं शिक्षा के साथ-साथ जीवन के हर संघर्ष के लिए खुद को तैयार कर सकें।

