केरल के धावक सादिक अहमद ने लंदन मैराथन में अमीराती कंदूरा पहनकर बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड
लंदन/अबू धाबी:
खेल की दुनिया में रिकॉर्ड तो रोज बनते हैं, लेकिन कुछ रिकॉर्ड दिल जीत लेते हैं। लंदन मैराथन के विशाल मंच पर एक ऐसा ही नजारा देखने को मिला, जिसने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और भारत दोनों का सिर फख्र से ऊंचा कर दिया। अबू धाबी में रहने वाले और मूल रूप से केरल के कन्नूर निवासी सादिक अहमद ने पारंपरिक अमीराती पोशाक ‘कंदूरा’ पहनकर दौड़ लगाई। उन्होंने न सिर्फ दौड़ पूरी की, बल्कि सबसे तेज दौड़ने का ‘गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड’ भी अपने नाम कर लिया।
34 वर्षीय सादिक ने 42.2 किलोमीटर की यह मैराथन महज 3 घंटे 19 मिनट और 20 सेकंड में पूरी की। लंदन की सड़कों पर जब वह सफेद लंबी कंदूरा और नियॉन ग्रीन स्नीकर्स पहनकर हाथ में यूएई का झंडा लिए दौड़ रहे थे, तो नजारा देखने लायक था। सादिक ने यह रिकॉर्ड उस मैराथन में बनाया जिसमें दुनिया भर के 60,000 से अधिक धावक हिस्सा ले रहे थे।

यूएई को दिया अनोखा सम्मान
लंदन से अबू धाबी की उड़ान भरने से पहले सादिक ने भावुक होकर बताया कि यह दौड़ यूएई के प्रति उनका आभार व्यक्त करने का एक तरीका था। सादिक एक तेल और गैस कंपनी में काम करते हैं और 2012 से यूएई में रह रहे हैं। उनके पिता पिछले 42 सालों से यूएई में हैं। सादिक कहते हैं कि यूएई ने उनके परिवार को आजीविका और पहचान दी है। मुश्किल समय में भी इस देश ने उन्हें नागरिकों जैसा सुरक्षित महसूस कराया। यह रिकॉर्ड उसी सुरक्षा और प्यार के लिए एक छोटा सा ‘थैंक यू’ है।
कंदूरा में दौड़ना नहीं था आसान
आमतौर पर धावक हल्के शॉर्ट्स और टी-शर्ट में दौड़ते हैं। लंबी कंदूरा में दौड़ना शारीरिक रूप से काफी चुनौतीपूर्ण था। सादिक बताते हैं कि कपड़ों की लंबाई की वजह से पैरों की मूवमेंट में काफी दिक्कत आती है। इसके लिए उन्होंने तीन महीने तक कंदूरा पहनकर ही कड़ी ट्रेनिंग की। उन्होंने हर हफ्ते करीब 90 से 100 किलोमीटर दौड़ने का अभ्यास किया। सादिक का कहना है कि पसीने की हर बूंद इस रिकॉर्ड के लिए सार्थक रही।
मैदान पर गूंजा ‘हबीबी’ का शोर
जैसे ही सादिक यूएई का झंडा लहराते हुए फिनिश लाइन के करीब पहुंचे, वहां मौजूद भीड़ का उत्साह देखने लायक था। सादिक ने बताया कि लोग उन्हें देखकर ‘ओ अमीराती, हबीबी’ चिल्ला रहे थे। सोशल मीडिया पर भी उनके वीडियो और तस्वीरें वायरल हो गई हैं। स्थानीय अमीराती नागरिक और प्रवासी भारतीय दोनों ही सादिक की इस उपलब्धि पर गर्व महसूस कर रहे हैं। उनके लिए यह पल केवल व्यक्तिगत जीत का नहीं, बल्कि सांस्कृतिक एकता का प्रतीक बन गया।

अनुशासन और सादगी की मिसाल
सादिक केवल एक धावक ही नहीं, बल्कि फिटनेस के प्रति बेहद जागरूक इंसान भी हैं। वह अपनी सफलता का श्रेय कड़े अनुशासन और सात्विक आहार को देते हैं। वह चीनी और तैलीय भोजन से पूरी तरह परहेज करते हैं। उनके आहार में प्रोटीन, शकरकंद और मध्यम मात्रा में कार्बोहाइड्रेट शामिल होते हैं। 68 किलो वजन वाले सादिक ने बताया कि उनकी पत्नी इस पूरी यात्रा में उनकी सबसे बड़ी ताकत रही हैं।
यह सादिक की पहली ऐसी अनोखी दौड़ नहीं थी। इससे पहले वह फायर ऑफिसर की वर्दी और फॉर्मल सूट पहनकर भी मैराथन पूरी कर चुके हैं। सूट पहनकर दौड़ने के पीछे उनका मकसद यह बताना था कि वर्कआउट के लिए वक्त की नहीं, बल्कि प्राथमिकता की जरूरत होती है।
सादिक की यह कहानी दिखाती है कि एक प्रवासी अपनी कर्मभूमि के प्रति कितनी गहरी श्रद्धा रख सकता है। केरल की सादगी और अबू धाबी के सम्मान को जोड़कर उन्होंने जो इतिहास रचा है, वह लंबे समय तक याद रखा जाएगा। सादिक का कहना है कि यह तो बस शुरुआत है, वह भविष्य में भी यूएई के गौरव को वैश्विक मंच पर इसी तरह चमकाते रहेंगे।

