Religion

हज 2026 सीजन में खुला King Fahd Glorious Quran Printing Complex, जानिए पूरी बात

मुस्लिम नाउ ब्यूरो, नई दिल्ली

सऊदी अरब के मदीना शहर में स्थित किंग फहद ग्लोरियस कुरान प्रिंटिंग कॉम्प्लेक्स ने हज 2026 सीजन के लिए अपने दरवाजे तीर्थयात्रियों के लिए खोल दिए हैं। दुनिया भर से हज पर पहुंचने वाले लाखों मुसलमान अब इस ऐतिहासिक संस्थान को करीब से देख सकेंगे। यहां वे यह जान पाएंगे कि पवित्र कुरान कैसे छपता है, उसकी विभिन्न भाषाओं में तर्जुमा कैसे तैयार होती है और किस तरह दुनिया के कोने कोने तक इसकी प्रतियां पहुंचाई जाती हैं।

मदीना में स्थित यह कॉम्प्लेक्स सिर्फ एक प्रिंटिंग प्रेस नहीं है। यह इस्लामी दुनिया की उन सबसे महत्वपूर्ण संस्थाओं में गिना जाता है, जिसने पिछले चार दशकों में करोड़ों मुसलमानों तक कुरान पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाई है।

हज सीजन को देखते हुए कॉम्प्लेक्स प्रशासन ने विजिटिंग आवर्स भी घोषित कर दिए हैं। रविवार से गुरुवार तक सुबह 7 बजे से दोपहर 12 बजे तक और फिर दोपहर 2 बजे से शाम 7 बजे तक लोग यहां जा सकेंगे। शुक्रवार को केवल शाम के समय विजिट की अनुमति होगी। शनिवार को दोनों समय परिसर खुला रहेगा।

हर साल हज और उमरा के दौरान लाखों लोग मदीना पहुंचते हैं। इनमें से बड़ी संख्या उन लोगों की होती है जो मस्जिद ए नबवी की जियारत के साथ इस प्रतिष्ठित संस्थान को भी देखना चाहते हैं। वजह साफ है। यहां कुरान के प्रकाशन की पूरी प्रक्रिया आंखों के सामने होती है।

जब कोई आगंतुक परिसर में प्रवेश करता है, तो उसे सिर्फ मशीनें नहीं दिखतीं। यहां एक लंबी और बेहद बारीक प्रक्रिया चलती है। पहले कुरान की लिखावट की जांच होती है। फिर प्रूफ रीडिंग। उसके बाद आधुनिक मशीनों से छपाई। आखिर में बाइंडिंग और पैकेजिंग।

कई आगंतुकों के लिए यह अनुभव भावनात्मक भी होता है। क्योंकि वे पहली बार उस जगह को देखते हैं जहां से दुनिया भर की मस्जिदों, मदरसों और घरों तक कुरान की प्रतियां भेजी जाती हैं।

किंग फहद कॉम्प्लेक्स की शुरुआत 1985 में हुई थी। तब से लेकर अब तक यह दुनिया में कुरान छापने वाली सबसे बड़ी संस्थाओं में शुमार हो चुका है। यहां हर साल करीब एक करोड़ प्रतियां प्रकाशित की जाती हैं। इस विशाल काम को संभालने के लिए करीब 1700 कर्मचारी दिन रात काम करते हैं।

कॉम्प्लेक्स ने अब तक कुरान के 55 अनुवाद तैयार किए हैं, जो 39 भाषाओं में उपलब्ध हैं। इसका मकसद साफ है। दुनिया के अलग अलग हिस्सों में रहने वाले लोग अपनी भाषा में कुरान का संदेश समझ सकें।

भारत, इंडोनेशिया, तुर्की, अफ्रीका, यूरोप और अमेरिका तक इस संस्थान की छपी हुई प्रतियां पहुंचती हैं। कई देशों में मस्जिदों और इस्लामी संस्थानों को मुफ्त प्रतियां भी भेजी जाती हैं।

इस केंद्र की एक और खासियत इसकी डिजिटल सेवाएं हैं। इसकी वेबसाइट पर कुरान का अरबी पाठ, तिलावत, अनुवाद, खोज सुविधा और शुरुआती दौर की कुरानी पांडुलिपियों की तस्वीरें भी उपलब्ध हैं। इस वजह से यह सिर्फ एक प्रिंटिंग संस्था नहीं, बल्कि इस्लामी अध्ययन का बड़ा केंद्र भी बन चुका है।

कुरान की मूल लिखावट, जिसे दुनिया भर में सबसे ज्यादा पढ़ा जाता है, मशहूर सुलेखकार उस्मान ताहा ने तैयार की थी। आज भी उसी शैली को मानक माना जाता है। लाखों लोग रोजाना जिस मुसहफ को पढ़ते हैं, उसकी छपाई का बड़ा हिस्सा इसी कॉम्प्लेक्स से जुड़ा है।

आंकड़े बताते हैं कि शुरुआत के दो दशकों में ही इस संस्थान ने करोड़ों प्रतियां प्रकाशित कर दी थीं। 1985 से 2007 के बीच यहां 12 करोड़ 74 लाख से ज्यादा कुरान की प्रतियां तैयार हुईं। इसके अलावा लाखों ऑडियो रिकॉर्डिंग, तर्जुमे, कुरान के हिस्से और इस्लामी किताबें भी प्रकाशित की गईं। कुल मिलाकर 20 करोड़ से अधिक सामग्री दुनिया भर में वितरित की गई।

कॉम्प्लेक्स केवल किताबें छापने तक सीमित नहीं है। यहां कुरान की रिकॉर्डिंग, अनुवाद, भाषाई जांच और धार्मिक प्रमाणिकता पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है। विशेषज्ञों की टीम हर शब्द की सावधानी से समीक्षा करती है ताकि किसी प्रकार की त्रुटि न रह जाए।

हज सीजन में यहां आने वाले लोगों के लिए यह यात्रा ज्ञान और आध्यात्मिक अनुभव दोनों बन जाती है। कई लोग अपने साथ यहां से कुरान की प्रतियां लेकर जाते हैं। कुछ लोग इसे अपने परिवार और दोस्तों के लिए तोहफे के रूप में खरीदते हैं। कई श्रद्धालु यहां पहुंचकर तस्वीरें लेते हैं और इस जगह को अपनी हज यात्रा की खास याद बताते हैं।

सऊदी अरब लंबे समय से इस्लामिक विरासत और धार्मिक सेवाओं को लेकर अपनी भूमिका को मजबूत करने पर जोर देता रहा है। किंग फहद कुरान प्रिंटिंग कॉम्प्लेक्स इसी प्रयास का अहम हिस्सा माना जाता है। यह संस्था न सिर्फ कुरान को सुरक्षित और प्रमाणिक रूप में दुनिया तक पहुंचाती है, बल्कि इस्लामी ज्ञान के प्रसार का भी एक मजबूत माध्यम बनी हुई है।

हज 2026 के दौरान लाखों जायरीन के लिए यह केंद्र एक खास आकर्षण रहेगा। खासकर उन लोगों के लिए जो यह समझना चाहते हैं कि दुनिया की सबसे ज्यादा पढ़ी जाने वाली किताबों में शामिल पवित्र कुरान किस सफर से गुजरकर उनके हाथों तक पहुंचती है।

एक महान दृष्टि का साकार रूप: मदीना का ‘किंग फहद कुरान कॉम्प्लेक्स’

साल 1985 में सऊदी अरब के बादशाह King Fahd bin Abdulaziz ने एक ऐसे ऐतिहासिक संस्थान की नींव रखी, जिसका उद्देश्य केवल किताबें छापना नहीं, बल्कि पूरी दुनिया तक पवित्र कुरान के संदेश को सम्मान और उत्कृष्टता के साथ पहुँचाना था। इसी सोच से जन्म हुआ ‘किंग फहद ग्लोरियस कुरान प्रिंटिंग कॉम्प्लेक्स’ का—जो आज दुनिया का सबसे बड़ा कुरान छपाई केंद्र बन चुका है।

मदीना की पवित्र सरज़मीं पर स्थापित एक अद्भुत केंद्र

Medina के बाहरी क्षेत्र में लगभग 2.5 लाख वर्ग मीटर में फैला यह विशाल परिसर केवल एक औद्योगिक इकाई नहीं, बल्कि आध्यात्मिक समर्पण का प्रतीक है। इसका स्थान बेहद सोच-समझकर चुना गया, ताकि हज और उमराह के लिए आने वाले लाखों जायरीन इस पवित्र सेवा को अपनी आँखों से देख सकें। शांत वातावरण और धार्मिक अनुभूति से भरपूर यह क्षेत्र हर आगंतुक को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर देता है।

आधुनिक तकनीक और आध्यात्मिकता का अद्भुत संगम

इस कॉम्प्लेक्स में कुरान की छपाई अत्याधुनिक डिजिटल तकनीकों के माध्यम से की जाती है। प्री-प्रेस डिजिटल प्रोसेसिंग, स्वचालित बाइंडिंग और मल्टी-लेवल गुणवत्ता परीक्षण जैसी प्रक्रियाएँ यह सुनिश्चित करती हैं कि कुरान की हर प्रति त्रुटिरहित और सर्वोच्च गुणवत्ता वाली हो। आधुनिक मशीनों की गति के साथ पारंपरिक अरबी सुलेख की सुंदरता को जिस बारीकी से सुरक्षित रखा जाता है, वह इस केंद्र को दुनिया में विशिष्ट बनाती है।

हर प्रति पर विद्वानों और सुलेखकों की पैनी नज़र

यहाँ केवल मशीनें ही काम नहीं करतीं, बल्कि इस्लामी विद्वानों, सुलेखकों और तकनीकी विशेषज्ञों की एक समर्पित टीम हर शब्द की शुद्धता की निगरानी करती है। कुरान की प्रत्येक प्रति कई स्तरों की जाँच से गुजरती है ताकि उसमें वर्तनी या अर्थ संबंधी कोई त्रुटि न रह जाए। यह केवल प्रिंटिंग नहीं, बल्कि एक पवित्र अमानत की जिम्मेदारी निभाने जैसा कार्य है।

हर साल करोड़ों प्रतियाँ, पूरी दुनिया तक मुफ्त वितरण

‘किंग फहद कुरान कॉम्प्लेक्स’ हर वर्ष लगभग एक करोड़ कुरान की प्रतियाँ प्रकाशित करता है। इन प्रतियों को दुनिया भर की मस्जिदों, इस्लामी संस्थाओं और जरूरतमंद लोगों तक मुफ्त पहुँचाया जाता है। स्थापना के बाद से अब तक 30 करोड़ से अधिक प्रतियाँ वितरित की जा चुकी हैं। यह आँकड़ा केवल उत्पादन क्षमता नहीं दर्शाता, बल्कि कुरान को हर इंसान तक पहुँचाने की वैश्विक प्रतिबद्धता को भी उजागर करता है।

केवल अरबी नहीं, 70 से अधिक भाषाओं में कुरान

इस परिसर की एक और बड़ी उपलब्धि है—कुरान के बहुभाषी अनुवाद। यहाँ 70 से अधिक भाषाओं में अनुवाद तैयार किए जा चुके हैं, जिससे विभिन्न संस्कृतियों और देशों के लोग अपनी भाषा में कुरान को समझ सकें। इसके अलावा ब्रेल कुरान, ऑडियो संस्करण और चुनिंदा सूरतों की पुस्तिकाएँ भी प्रकाशित की जाती हैं।

शिक्षा, अनुसंधान और विरासत संरक्षण का केंद्र

यह संस्थान केवल प्रिंटिंग प्रेस नहीं, बल्कि इस्लामी शोध और प्रशिक्षण का भी महत्वपूर्ण केंद्र है। यहाँ कुरानिक विज्ञान, प्राचीन पांडुलिपियों के संरक्षण और इस्लामी सुलेख कला के इतिहास पर गहन अध्ययन किया जाता है। दुनिया भर से विद्यार्थी और शोधकर्ता यहाँ आकर कार्यशालाओं में हिस्सा लेते हैं और ज्ञान की इस विरासत को आगे बढ़ाते हैं।

पर्यटकों और जायरीन के लिए प्रेरणादायक अनुभव

हर वर्ष हजारों पर्यटक और तीर्थयात्री इस कॉम्प्लेक्स का भ्रमण करते हैं। निर्देशित टूर के दौरान आगंतुक कुरान की पूरी उत्पादन प्रक्रिया को करीब से देखते हैं—डिजिटल टाइपसेटिंग से लेकर अंतिम पैकेजिंग तक। यहाँ का अनुशासन, स्वच्छता और आध्यात्मिक माहौल लोगों को गहराई से प्रभावित करता है।

पूरी दुनिया में इस्लामी ज्ञान के प्रसार का केंद्र

आज ‘किंग फहद ग्लोरियस कुरान प्रिंटिंग कॉम्प्लेक्स’ केवल सऊदी अरब की उपलब्धि नहीं, बल्कि पूरी मुस्लिम उम्मत की साझा धरोहर बन चुका है। दुनिया के लगभग हर महाद्वीप में यहाँ से छपी कुरान की प्रतियाँ पहुँच चुकी हैं। यह संस्थान इस बात का जीवंत उदाहरण है कि जब आधुनिक तकनीक, धार्मिक समर्पण और मानवीय सेवा एक साथ मिलते हैं, तो उनका प्रभाव सीमाओं से कहीं आगे तक फैलता है।

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