कायमखानी समाज के लियाकत अली का राष्ट्रीय सम्मान,सेना प्रमुख के हाथों नवाजे गए
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अशफाक कायमखयानी/ जयपुर

राजस्थान के झुंझुनूं जिले के धनूरी गांव के सेवानिवृत्त ऑनरेरी कैप्टन लियाकत अली को भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने प्रतिष्ठित वेटरन अचीवर्स अवार्ड से सम्मानित किया है। यह सम्मान उन्हें सेना से सेवानिवृत्ति के बाद भी पूर्व सैनिकों, वीर नारियों और समाज के लिए लगातार किए गए निस्वार्थ कार्यों के लिए प्रदान किया गया। नई दिल्ली के माणिक शॉ सेंटर में आयोजित समारोह में देशभर के केवल सात पूर्व सैनिकों को इस सम्मान के लिए चुना गया, जिनमें कैप्टन लियाकत अली भी शामिल रहे।
यह सम्मान केवल एक व्यक्ति की उपलब्धि नहीं है, बल्कि राजस्थान के सैनिक परंपरा वाले झुंझुनूं जिले, धनूरी गांव और कायमखानी समाज के लिए भी गर्व का अवसर माना जा रहा है। सोशल मीडिया से लेकर पूर्व सैनिक संगठनों तक हर ओर उन्हें बधाइयां दी जा रही हैं।

सेना प्रमुख ने किया सम्मानित
नई दिल्ली स्थित माणिक शॉ सेंटर में आयोजित विशेष कार्यक्रम में सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने देश के सात पूर्व सैनिकों को वेटरन अचीवर्स अवार्ड प्रदान किया। यह सम्मान उन पूर्व सैनिकों को दिया जाता है, जिन्होंने भारतीय सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद भी समाज और राष्ट्र निर्माण में उल्लेखनीय योगदान दिया हो।
भारतीय सेना का मानना है कि सैनिक की जिम्मेदारी केवल सेवा काल तक सीमित नहीं होती। सेवा समाप्त होने के बाद भी यदि कोई पूर्व सैनिक समाज के लिए सक्रिय रहता है और लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाता है, तो उसके योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया जाना चाहिए। इसी सोच के तहत यह प्रतिष्ठित पुरस्कार दिया जाता है।
32 वर्षों तक निभाई सैन्य सेवा
कैप्टन लियाकत अली ने भारतीय सेना की 73 आर्मर्ड रेजिमेंट सहित विभिन्न सैन्य इकाइयों में 32 वर्ष से अधिक समय तक सेवा दी। अपने सैन्य जीवन के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं और अनुशासन, समर्पण तथा राष्ट्र सेवा का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया।
वर्ष 2003 में सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने निजी जीवन तक खुद को सीमित नहीं रखा। उन्होंने समाज सेवा को अपने जीवन का नया मिशन बना लिया। पिछले 23 वर्षों से वह लगातार ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों की समस्याओं के समाधान में जुटे हुए हैं।
पूर्व सैनिकों और वीर नारियों के लिए समर्पित जीवन
कैप्टन लियाकत अली का सबसे बड़ा योगदान पूर्व सैनिकों और वीर नारियों के कल्याण के क्षेत्र में माना जाता है। उन्होंने अपनी टीम के साथ गांव गांव जाकर उन परिवारों तक पहुंच बनाई, जिन्हें सरकारी योजनाओं और पेंशन संबंधी प्रक्रियाओं की जानकारी नहीं मिल पाती थी।
कई पूर्व सैनिक और शहीद परिवार वर्षों तक पेंशन, दस्तावेजों और अन्य प्रशासनिक समस्याओं से जूझते रहते हैं। कैप्टन लियाकत अली ऐसे मामलों में स्वयं मार्गदर्शन करते हैं। संबंधित विभागों से संपर्क स्थापित कर समस्याओं के समाधान में मदद करते हैं। इसके साथ ही पात्र लोगों को विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने में भी सहयोग करते हैं।
उनकी इस सेवा का लाभ बड़ी संख्या में पूर्व सैनिकों और वीर नारियों को मिला है। यही निरंतर कार्य उनके राष्ट्रीय सम्मान का प्रमुख आधार बना।

युवाओं को सेना में जाने के लिए करते हैं प्रेरित
समाज सेवा के साथ साथ कैप्टन लियाकत अली युवाओं को भारतीय सेना में भर्ती होने के लिए भी प्रेरित करते हैं। वे विभिन्न सामाजिक कार्यक्रमों, विद्यालयों और ग्रामीण सभाओं में युवाओं से संवाद करते हैं।
वे उन्हें बताते हैं कि सेना केवल रोजगार का माध्यम नहीं, बल्कि राष्ट्र सेवा का सर्वोच्च अवसर है। उनके अनुभव और मार्गदर्शन से कई युवाओं ने सेना में भर्ती की तैयारी शुरू की और सफलता भी प्राप्त की।
धनूरी की सैनिक परंपरा को मिला नया सम्मान
झुंझुनूं जिले का धनूरी गांव देशभर में अपनी सैनिक परंपरा के लिए जाना जाता है। इस गांव को लंबे समय से फौजियों की खान कहा जाता है। यहां से बड़ी संख्या में युवा भारतीय सेना में भर्ती होते रहे हैं। यही नहीं, धनूरी देश के उन गांवों में शामिल है जहां से सबसे अधिक सैनिकों ने देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया है।
ऐसे गौरवशाली गांव के निवासी कैप्टन लियाकत अली को राष्ट्रीय सम्मान मिलने से पूरे क्षेत्र में खुशी का माहौल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस सम्मान ने एक बार फिर धनूरी की पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत किया है।
कायमखानी समाज में खुशी की लहर
कैप्टन लियाकत अली की उपलब्धि पर कायमखानी समाज के विभिन्न संगठनों ने खुशी व्यक्त की है। समाज के लोगों ने इसे पूरी बिरादरी के लिए सम्मान का क्षण बताया है।
सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में लोगों ने उन्हें शुभकामनाएं दीं। कई पूर्व सैनिक संगठनों ने कहा कि कैप्टन लियाकत अली ने यह साबित किया है कि सैनिक की सेवा वर्दी उतारने के बाद भी समाप्त नहीं होती। समाज के लिए लगातार काम करना भी राष्ट्र सेवा का ही विस्तार है।
कायमखानी समाज के लोगों ने कहा कि यह सम्मान नई पीढ़ी को समाज सेवा और राष्ट्र निर्माण के लिए प्रेरित करेगा।

क्या है वेटरन अचीवर्स अवार्ड
वेटरन अचीवर्स अवार्ड भारतीय थल सेना का एक प्रतिष्ठित सम्मान है। यह उन सेवानिवृत्त सैनिकों और अधिकारियों को दिया जाता है जिन्होंने सेना से रिटायर होने के बाद समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य किया हो।
इस सम्मान के लिए शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण, पूर्व सैनिक कल्याण, कचरा प्रबंधन, नवीकरणीय ऊर्जा, ग्रामीण विकास, युवाओं को सेना में भर्ती के लिए प्रेरित करना और समाज सेवा जैसे क्षेत्रों में किए गए कार्यों का मूल्यांकन किया जाता है।
भारतीय सेना इस पुरस्कार के माध्यम से यह संदेश देती है कि सैनिक का जीवन सेवा और समर्पण का जीवन होता है, जो सेवानिवृत्ति के बाद भी जारी रह सकता है।
समाज सेवा बनी नई पहचान
कैप्टन लियाकत अली की पहचान आज केवल एक पूर्व सैनिक की नहीं है। वे समाज सेवक, मार्गदर्शक और पूर्व सैनिकों के अधिकारों के लिए काम करने वाले सक्रिय व्यक्तित्व के रूप में भी जाने जाते हैं।
पिछले दो दशकों में उन्होंने अनेक गांवों का दौरा किया। जरूरतमंद परिवारों की सहायता की। प्रशासन और समाज के बीच संवाद स्थापित किया। कई लोगों की पेंशन और अन्य लंबित मामलों का समाधान कराया।
उनका मानना है कि सैनिक जीवन से मिला अनुशासन और अनुभव समाज के विकास में भी उपयोगी साबित हो सकता है। यही सोच उन्हें आज भी लगातार सक्रिय रखे हुए है।
A truly proud moment for a distinguished military family. 🇮🇳
— Colonel Mayank Chaubey (@col_chaubey) July 1, 2026
After receiving the Guard of Honour as the Chief of the Army Staff in New Delhi, Chief of the Army Staff Gen Dhiraj Seth paid his respects by saluting his father, Lt Gen KM Seth (Retd), a moving gesture that reflected… pic.twitter.com/tgXabjYx8n
पूरे राजस्थान के लिए प्रेरणा
कैप्टन लियाकत अली को मिला यह सम्मान केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है। यह उन सभी पूर्व सैनिकों के योगदान की भी पहचान है जो सेवानिवृत्ति के बाद समाज के लिए निस्वार्थ भाव से कार्य कर रहे हैं।
राजस्थान विशेष रूप से झुंझुनूं जिला लंबे समय से सैनिकों की धरती के रूप में जाना जाता है। ऐसे क्षेत्र के एक पूर्व सैनिक को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया जाना पूरे प्रदेश के लिए गर्व का विषय है।
कैप्टन लियाकत अली की यात्रा यह संदेश देती है कि सच्ची देशभक्ति केवल सीमा पर सेवा देने तक सीमित नहीं रहती। समाज के कमजोर वर्गों की मदद करना, पूर्व सैनिकों के अधिकारों के लिए आवाज उठाना और युवाओं को राष्ट्र सेवा के लिए प्रेरित करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
उनकी यह उपलब्धि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा है और इस बात का प्रमाण भी कि समर्पण, सेवा और राष्ट्रहित की भावना जीवन भर निभाई जा सकती है।

