विमानन क्षेत्र में महासंकट: ईंधन की किल्लत और युद्ध से थमीं वैश्विक उड़ानें
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मुस्लिम नाउ,नई दिल्ली/वॉशिंगटन
दुनिया ने साल 2020 में कोरोना महामारी के दौरान आसमान को सूना होते देखा था, लेकिन 1 अप्रैल 2026 की सुबह जो तस्वीरें सामने आ रही हैं, वे उससे भी अधिक भयावह हैं। ईरान युद्ध की आग ने न केवल जमीन को झुलसाया है, बल्कि वैश्विक विमानन उद्योग (Aviation Industry) की कमर तोड़ दी है। कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों और आपूर्ति श्रृंखला के ध्वस्त होने से दुनिया भर का हवाई क्षेत्र एक तरह से ‘लकवाग्रस्त’ हो गया है। विशेषज्ञ इसे विमानन इतिहास का अब तक का सबसे “भयानक संकट” (Perfect Storm) करार दे रहे हैं।

ईंधन का अकाल: 742 डॉलर से 1,710 डॉलर तक का सफर
इस संकट की जड़ में है जेट ईंधन (ATF) की कीमतों में हुआ बेतहाशा इजाफा। ‘द टेलीग्राफ’ की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले एक साल में जेट ईंधन की कीमत 742 डॉलर से बढ़कर 1,710 डॉलर प्रति मीट्रिक टन के पार चली गई है। यानी कीमतों में दोगुने से भी अधिक की वृद्धि।
इसका मुख्य कारण हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की नाकाबंदी है। दुनिया के कुल तेल का पांचवां हिस्सा इसी संकरे मार्ग से गुजरता है। युद्ध के कारण इस मार्ग पर प्रतिबंध लगने से एशिया से लेकर यूरोप तक ईंधन का अकाल पड़ गया है। ऊर्जा विशेषज्ञ एलेक्स मैकिरास ने चेतावनी दी है कि यदि स्थिति यही रही, तो प्रमुख यूरोपीय हवाई अड्डों पर एक सप्ताह के भीतर ईंधन पूरी तरह खत्म हो सकता है।

उड़ानें रद्द होने का रिकॉर्ड: हर 20 में से एक विमान जमीन पर
विमानन विश्लेषण कंपनी ‘सिरिम’ के ताजा आंकड़े डराने वाले हैं। सोमवार को वैश्विक स्तर पर निर्धारित 104,618 उड़ानों में से 7 प्रतिशत (7,049 उड़ानें) रद्द कर दी गईं। पिछले साल यह दर महज 4.7 प्रतिशत थी।
- उत्तरी अमेरिका: यहाँ स्थिति सबसे खराब है, जहाँ 14.6 प्रतिशत उड़ानें रद्द हुईं।
- यूनाइटेड एयरलाइंस: ईंधन की कमी और घाटे के कारण अपनी क्षमता में 5 प्रतिशत की कटौती करने वाली पहली बड़ी अमेरिकी एयरलाइन बन गई है।
- एयर न्यूजीलैंड: मई की शुरुआत तक 1,100 उड़ानें रद्द करने की घोषणा की है।
- एसएएस (स्कैंडिनेवियन): अप्रैल में कम से कम 1,000 उड़ानें रद्द करने की योजना बना चुका है।
लंबी दूरी की उड़ानों की स्थिति और भी जटिल है। ईंधन की कमी के कारण विमानों को अपने गंतव्य तक पहुँचने के लिए बीच रास्ते में किसी तीसरे देश में रुकना पड़ रहा है (Technical Halt), जिससे यात्रा का समय और लागत दोनों बढ़ गए हैं।

आम आदमी की पहुँच से बाहर हुई हवाई यात्रा
विमानन कंपनियां अब अपने बढ़ते खर्च का बोझ यात्रियों पर डाल रही हैं। यूनाइटेड एयरलाइंस के सीईओ स्कॉट किर्बी के अनुसार, अस्तित्व बचाने के लिए किराए में कम से कम 20 प्रतिशत की वृद्धि अनिवार्य है। वर्तमान में औसत हवाई किराया 465 डॉलर तक पहुँच गया है, जो 2019 के बाद का उच्चतम स्तर है।
इतना ही नहीं, एयरलाइंस अब टिकट के अलावा ‘अतिरिक्त शुल्क’ (Ancillary Fees) के जरिए भी मुनाफा कमाने की कोशिश कर रही हैं। जेटब्लू जैसी कंपनियों ने सामान शुल्क (Baggage Fees) बढ़ा दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि चूंकि इन अतिरिक्त शुल्कों पर सरकारी कर नहीं लगता, इसलिए कंपनियां इसे घाटे की भरपाई का जरिया बना रही हैं।

‘आपातकालीन प्रबंधन’ और अस्तित्व की लड़ाई
ओलंपिक एयरवेज के पूर्व प्रमुख रिगास डोगानिस का मानना है कि एयरलाइंस अब ‘सर्वाइवल मोड’ में हैं। दक्षिण कोरिया की राष्ट्रीय एयरलाइन कोरियन एयर ने 1 अप्रैल से ‘आपातकालीन प्रबंधन’ अभियान शुरू किया है। कंपनी के उपाध्यक्ष वू की-होंग ने इसे कंपनी की बुनियाद बचाने की कोशिश बताया है।
ब्रिटिश एयरवेज, एयर फ्रांस-केएलएम और लुफ्थांसा जैसी दिग्गज कंपनियों ने मध्य पूर्व के संघर्ष क्षेत्र के लिए अपनी सभी उड़ानें पहले ही निलंबित कर दी हैं। इससे न केवल पर्यटन, बल्कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार और कूटनीतिक संवाद भी ठप्प हो गया है।
ट्रंप का बयान और भू-राजनीतिक अस्थिरता
इस संकट के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान ने आग में घी डालने का काम किया है। उन्होंने अपने प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर ब्रिटेन और अन्य देशों को सलाह दी कि वे “हिम्मत दिखाएं और हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर कब्जा कर लें।” ट्रंप ने यह भी कहा कि दुनिया को अमेरिका से तेल खरीदना चाहिए क्योंकि वहां प्रचुर मात्रा में स्टॉक है। उनके इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई बहस और तनाव को जन्म दे दिया है।

क्या 2027 तक जारी रहेगा यह संकट?
वित्तीय विशेषज्ञों और विश्लेषकों का अनुमान है कि यदि ईरान युद्ध जल्द समाप्त नहीं होता है, तो तेल की कीमतें 175 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँच सकती हैं। ऐसी स्थिति में 2027 तक तेल की कीमतें 100 डॉलर से नीचे आने की उम्मीद नहीं है। इसका सीधा मतलब है कि अगले दो-तीन सालों तक हवाई यात्रा आम लोगों के लिए एक विलासिता (Luxury) बनी रहेगी।
सिर्फ आसमान ही नहीं, समुद्र भी प्रभावित
ईंधन संकट का असर अब क्रूज जहाजों पर भी दिखने लगा है। स्टारड्रीम क्रूज ने प्रति व्यक्ति प्रति रात 15 डॉलर का अतिरिक्त ईंधन अधिभार (Fuel Surcharge) लगाना शुरू कर दिया है। परिवहन के हर क्षेत्र में बढ़ती लागत ने वैश्विक महंगाई (Global Inflation) को चरम पर पहुँचा दिया है।
निष्कर्ष: एक अनिश्चित भविष्य
विमानन क्षेत्र फिलहाल उस अंधेरी सुरंग में है जिसका दूसरा सिरा नजर नहीं आ रहा। एक ओर धनी यात्री हैं जो बढ़े हुए किराए के बावजूद यात्रा कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर मध्यम वर्ग है जिसके लिए हवाई यात्रा अब केवल एक सपना बनती जा रही है।
जब तक मध्य पूर्व में तोपें शांत नहीं होतीं और हॉर्मुज का जलमार्ग फिर से सुरक्षित नहीं होता, तब तक वैश्विक विमानन उद्योग इसी तरह झुलसता रहेगा। आने वाले महीने इस उद्योग के लिए ‘अग्निपरीक्षा’ के समान होंगे।
संपादन: न्यूज़ डेस्क, मुस्लिम नाउ स्रोतः द टेलीग्राफ, रॉयटर्स, ब्लूमबर्ग और सिरियस।

