मौलाना सलमान हुसैनी नदवी का इंतकाल, जमाअत ए इस्लामी हिंद शोकाकुल
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मुस्लिम नाउ ब्यूरो, नई दिल्ली
देश के प्रख्यात इस्लामी विद्वान, लेखक, शिक्षाविद और चिंतक मौलाना सैयद सलमान हुसैनी नदवी के इंतकाल पर पूरे देश में शोक की लहर है। जमाअत ए इस्लामी हिंद के अध्यक्ष सैयद सआदतुल्लाह हुसैनी ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि यह केवल उनके परिवार या विद्यार्थियों का ही नहीं बल्कि पूरी मुस्लिम उम्मत और इस्लामी दुनिया के लिए अपूरणीय क्षति है।
मंगलवार को जारी अपने शोक संदेश में सैयद सआदतुल्लाह हुसैनी ने कहा कि मौलाना सलमान हुसैनी नदवी अपने दौर के सबसे सम्मानित इस्लामी विद्वानों में शामिल थे। उन्होंने पूरी जिंदगी इस्लाम की सेवा शिक्षा, शोध, दावत, बौद्धिक मार्गदर्शन और शैक्षणिक संस्थानों के विकास के लिए समर्पित कर दी।
उन्होंने कहा कि मौलाना के इंतकाल की खबर ने देश और विदेश में उनके चाहने वालों को गहरे दुख में डाल दिया है। उनके जाने से जो खालीपन पैदा हुआ है, उसे भर पाना आसान नहीं होगा।
The President of Jamaat-e-Islami Hind (JIH), Syed Sadatullah Husaini has expressed profound grief and sorrow over the demise of eminent Islamic scholar, renowned author, educationist, and intellectual Maulana Syed Salman Hussaini Nadwi (Rahimahullah). pic.twitter.com/ZnRqG1GPMI
— CNS Kashmir (@cnskashmir) June 29, 2026
इस्लामी शिक्षा को नई दिशा देने वाले विद्वान
सैयद सआदतुल्लाह हुसैनी ने कहा कि मौलाना सलमान हुसैनी नदवी ने कुरआन, हदीस, सीरत और इस्लामी फिक्ह के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया। उन्होंने भारत ही नहीं बल्कि कई देशों में हजारों विद्यार्थियों को शिक्षा दी और उन्हें इस्लामी ज्ञान से जोड़ा।
उन्होंने कहा कि मौलाना की किताबें, लेख, व्याख्यान और शोध कार्य आने वाली पीढ़ियों के लिए ज्ञान का महत्वपूर्ण स्रोत बने रहेंगे। इस्लामी अध्ययन के क्षेत्र में उनका योगदान लंबे समय तक याद किया जाएगा।
शिक्षा और समाज सेवा को बनाया मिशन
जमाअत ए इस्लामी हिंद के अध्यक्ष ने कहा कि मौलाना सलमान हुसैनी नदवी का जीवन केवल शिक्षण तक सीमित नहीं था। उन्होंने कई शैक्षणिक और सामाजिक संस्थाओं के निर्माण तथा विकास में भी अहम भूमिका निभाई।
उनका संबंध लंबे समय तक दारुल उलूम नदवतुल उलेमा से रहा। इसके अलावा उन्होंने जामिया सैयद अहमद शहीद और जमीयत शबाब उल इस्लाम जैसे संस्थानों के माध्यम से नई पीढ़ी को शिक्षा और नैतिक मूल्यों से जोड़ने का प्रयास किया।
उन्होंने शिक्षा के साथ साथ चिकित्सा और समाज सेवा के क्षेत्र में भी कई संस्थानों की स्थापना और विकास में सक्रिय योगदान दिया। यही वजह है कि उन्हें केवल एक धार्मिक विद्वान नहीं बल्कि समाज सुधारक के रूप में भी याद किया जाता है।
आधुनिक दौर की चुनौतियों पर भी रही गहरी नजर
सैयद सआदतुल्लाह हुसैनी ने कहा कि मौलाना सलमान हुसैनी नदवी की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि उन्होंने पारंपरिक इस्लामी ज्ञान को आधुनिक समय की जरूरतों और चुनौतियों के साथ जोड़ने की कोशिश की।
उन्होंने इस्लामी विचारधारा को समकालीन संदर्भ में समझाने का प्रयास किया। उनके व्याख्यानों और लेखों में धार्मिक मूल्यों के साथ सामाजिक और बौद्धिक मुद्दों पर भी गंभीर चर्चा देखने को मिलती थी।
उनके अनुसार यही दृष्टिकोण उन्हें अपने समय के प्रमुख इस्लामी चिंतकों की श्रेणी में खड़ा करता है।
इंतिक़ाल हो गये है
— Qalb E Haq (@qalbEhaq) June 29, 2026
मौलाना सैय्यद सलमान हुसैनी नदवी साहब।
इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन…….. pic.twitter.com/pTFzZUqvKs
मतभेदों के बावजूद सेवाओं का महत्व कम नहीं
अपने बयान में सैयद सआदतुल्लाह हुसैनी ने एक महत्वपूर्ण बात भी कही। उन्होंने कहा कि किसी भी बड़े विद्वान के विचारों से हर व्यक्ति का पूरी तरह सहमत होना जरूरी नहीं होता।
उन्होंने कहा कि मौलाना सलमान हुसैनी नदवी के कुछ विचारों या बयानों से लोगों को मतभेद हो सकते हैं। यह स्वाभाविक है। लेकिन ऐसे मतभेद उनके विशाल ज्ञान, लंबे संघर्ष और इस्लाम तथा समाज के लिए किए गए योगदान के महत्व को कम नहीं कर सकते।
उन्होंने कहा कि किसी भी विद्वान का मूल्यांकन उसके पूरे जीवन और उसके व्यापक योगदान के आधार पर किया जाना चाहिए।
हजारों छात्रों के मार्गदर्शक रहे
मौलाना सलमान हुसैनी नदवी ने अपने लंबे शैक्षणिक जीवन में हजारों छात्रों का मार्गदर्शन किया। उनके कई शिष्य आज भारत और विदेशों में विभिन्न शैक्षणिक और धार्मिक संस्थानों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
उनके व्याख्यानों में इस्लामी शिक्षा के साथ नैतिकता, चरित्र निर्माण और सामाजिक जिम्मेदारी पर विशेष जोर दिया जाता था। यही कारण है कि उनके विद्यार्थी उन्हें केवल शिक्षक नहीं बल्कि मार्गदर्शक और प्रेरणास्रोत मानते हैं।

पूरे मुस्लिम समाज के नाम संवेदना
जमाअत ए इस्लामी हिंद के अध्यक्ष ने अपने संदेश के अंत में मौलाना के परिवार, विद्यार्थियों, सहयोगियों, प्रशंसकों और पूरी मुस्लिम उम्मत के प्रति संवेदना व्यक्त की।
उन्होंने कहा कि जमाअत ए इस्लामी हिंद इस दुख की घड़ी में सभी शोक संतप्त लोगों के साथ खड़ी है। उन्होंने अल्लाह से दुआ की कि वह परिवार और चाहने वालों को सब्र ए जमी़ल अता करे।
उन्होंने यह भी प्रार्थना की कि अल्लाह तआला मौलाना की कमियों को माफ फरमाए, उनकी पूरी जिंदगी की दीनी सेवाओं को सदकए जारिया के रूप में स्वीकार करे, उन्हें नेक बंदों में उच्च स्थान प्रदान करे और जन्नतुल फिरदौस में आला मकाम अता करे।
सैयद सआदतुल्लाह हुसैनी ने अपनी दुआ में यह भी कहा कि अल्लाह मुस्लिम उम्मत को ऐसे ईमानदार, सक्षम और दूरदर्शी विद्वान देता रहे जो आने वाली पीढ़ियों तक दीन की सेवा और ज्ञान की इस परंपरा को आगे बढ़ाते रहें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न: मौलाना सैयद सलमान हुसैनी नदवी कौन थे?
उत्तर: वह भारत के प्रमुख इस्लामी विद्वान, लेखक, शिक्षाविद और चिंतक थे। उन्होंने इस्लामी शिक्षा, शोध और समाज सेवा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
प्रश्न: जमाअत ए इस्लामी हिंद ने क्या कहा?
उत्तर: अध्यक्ष सैयद सआदतुल्लाह हुसैनी ने उनके इंतकाल को पूरी मुस्लिम उम्मत और इस्लामी जगत के लिए अपूरणीय क्षति बताया।
प्रश्न: मौलाना सलमान हुसैनी नदवी का सबसे बड़ा योगदान क्या रहा?
उत्तर: उन्होंने कुरआन, हदीस, सीरत और फिक्ह की शिक्षा को आगे बढ़ाया, हजारों विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया और कई शैक्षणिक एवं सामाजिक संस्थानों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
प्रश्न: उनके लिए क्या दुआ की गई?
उत्तर: उनके लिए मगफिरत, जन्नतुल फिरदौस में उच्च स्थान, उनकी सेवाओं की कबूलियत और शोक संतप्त परिवार के लिए सब्र की दुआ की गई।

