अजमेर में मुस्लिम परिवार बना रहा 65 फीट का रावण, गंगा-जमुनी तहजीब की अनूठी मिसाल
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सबा अहमद, अजमेर, जयपुर
सूफी संत ख्वाजा गरीब नवाज की नगरी अजमेर इस बार भी सामाजिक सौहार्द की मिसाल पेश कर रही है. देश में नफरत फैलाने के तमाम दावों और कोशिशों के बीच कौमी एकता का यह अटूट रिश्ता बेहद मजबूत नजर आता है. त्यौहार चाहे हिंदुओं के हों या मुसलमानों के, दोनों समुदाय एक-दूसरे की खुशियों में शरीक होकर ही इन्हें मुकम्मल बनाते हैं.
इस बार अजमेर के ऐतिहासिक पटेल मैदान में दशहरा महोत्सव को लेकर तैयारियां अपने अंतिम चरण में हैं. पटेल स्टेडियम में इस वर्ष विजयादशमी पर्व पर 65 फीट ऊंचा रावण, 45-45 फीट के कुंभकरण और मेघनाद के विशालकाय पुतले आकर्षण का केंद्र होंगे. इन पुतलों को ढालने और अंतिम रूप देने का काम फतेहपुर सीकरी से आए मुस्लिम कारीगर शब्बीर अहमद फारूकी अपने बेटे और 15 साथियों की टीम के साथ दिन-रात कर रहे हैं.


32 सालों से बना रहे हैं भाईचारे का प्रतीक पुतला
फतेहपुर सीकरी के कारीगर शब्बीर अहमद फारूकी का अजमेर से नाता तीन दशकों से अधिक पुराना है. वे पिछले 32 सालों से अजमेर नगर निगम के लिए दशहरा पर्व पर पुतले तैयार करते आ रहे हैं. शब्बीर अहमद बताते हैं कि धर्म अलग होने के बावजूद उन्हें हिंदू त्योहारों के लिए काम करने में गर्व महसूस होता है. वे इसे केवल रोजी-रोटी का जरिया नहीं मानते, बल्कि दो संस्कृतियों को जोड़ने वाली कलात्मक डोर मानते हैं.
अजमेर का पटेल मैदान इस अनोखे निर्माण का साक्षी बन रहा है. अजमेर के नागरिक हर साल बेसब्री से इन पुतलों के दहन का इंतजार करते हैं. इस साल का रावण दहन तकनीकी बदलावों की वजह से और ज्यादा खास होने जा रहा है.

रावण की आंखें झपकेंगी और हाथ में तलवार हिलेगी
इस बार रावण के 65 फीट ऊंचे पुतले में कई अत्याधुनिक और इनोवेटिव तकनीकी प्रयोग किए जा रहे हैं.
- पलकें झपकेंगी: पुतले की आंखों में विशेष मैकेनिकल गियर और सेंसर लगाए गए हैं जिससे रावण की पलकें झपकती हुई दिखाई देंगी.
- हाथ और तलवार की गतिविधि: रावण के हाथ में विशालकाय तलवार होगी. पुतले का हाथ और तलवार हवा में घूमते नजर आएंगे.
- मुंह से निकलेंगे अंगारे: रावण दहन के वक्त उसके मुंह से आग और अंगारे निकलने का विशेष इंतजाम किया गया है.
- लाइटिंग वाला मुकुट: दशानन के मुकुट को रंग-बिरंगी आकर्षक लाइट्स से सजाया जा रहा है जो रात के अंधेरे में जगमगाएगा.
500 बांस और कुंतलों सामग्री से बन रहा विशालकाय ढांचा
इतने विशाल पुतलों को खड़ा करना आसान काम नहीं है. शब्बीर अहमद की टीम रात-दिन मेहनत करके ढांचा तैयार कर रही है.
इन पुतलों को मजबूती देने के लिए करीब 500 बांस के डंडों का इस्तेमाल हो रहा है. इसके साथ ही 5 से 6 क्विंटल रद्दी कागज, कपड़ा, सूती बोरी, टाट, नारियल की जटाएं, गोल्डन पेपर और अभ्रक का प्रयोग किया जा रहा है. पुतले के अलग-अलग हिस्सों को चिपकाने के लिए पारंपरिक तरीके से मैदा की लेई तैयार की जाती है.
मुख्य पुतले के पास ही लंका विजय की प्रतीक खूबसूरत अशोक वाटिका भी तैयार की जा रही है. नगर निगम अजमेर की देखरेख में पटेल मैदान को पूरी तरह सजाया जा रहा है.
नफरत के बाजार में मोहब्बत और एकता की मिसाल
अजमेर का यह दशहरा महोत्सव देश भर के लिए संदेश देता है. जब कई जगहों पर त्योहारों के दौरान एक-दूसरे को रोकने और भेदभाव की खबरें सामने आती हैं, तब अजमेर की धरती से उठती यह तस्वीर दिलों को जोड़ती है. मुस्लिम कारीगरों की हाथों से तराशा गया रावण जब जलकर राख होगा, तो उसके साथ समाज की बुराइयां और नफरत भी भस्म होगी.
अजमेर का हर नागरिक इस पल का साक्षी बनने के लिए पटेल मैदान पहुंचने की तैयारी कर रहा है. आपसी प्रेम, भाईचारे और साझी विरासत का यह पर्व राजस्थान की गंगा-जमुनी तहजीब को नया आयाम दे रहा है.

