एएमयू में स्वतंत्रता दिवस से पहले नई जिम्मेदारियां, बड़े बदलाव
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मुस्लिम नाउ ब्यूरो, अलीगढ़
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी यानी एएमयू में स्वतंत्रता दिवस से कुछ दिन पहले प्रशासनिक और अकादमिक स्तर पर जिम्मेदारियों में बदलाव हुआ है। विश्वविद्यालय ने कई शिक्षकों और अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी हैं। इनमें प्रोफेसर अबू तारिक और प्रोफेसर शीबा जिलानी की नियुक्तियां खास हैं। दोनों को जाकिर हुसैन कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के अहम विभागों की जिम्मेदारी दी गई है।
इसके अलावा सर जियाउद्दीन हॉल के प्रोवोस्ट डॉ. इफ्तेखार अहमद अंसारी को एएमयू की एकेडमिक काउंसिल का सदस्य घोषित किया गया है। विश्वविद्यालय के इन फैसलों को अकादमिक प्रशासन और विभागीय कामकाज के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इन नियुक्तियों में अनुभव को खास तवज्जो दी गई है। तीनों नाम एएमयू की शैक्षणिक और प्रशासनिक गतिविधियों से लंबे समय से जुड़े रहे हैं। नई जिम्मेदारियां मिलने के बाद अब उनके सामने विभागीय कामकाज को आगे बढ़ाने के साथ शोध और अकादमिक गतिविधियों को मजबूत करने की चुनौती भी होगी।

प्रोफेसर अबू तारिक बने इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग के चेयरमैन
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के जाकिर हुसैन कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी यानी ZHCET के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग में प्रोफेसर अबू तारिक को नया चेयरमैन नियुक्त किया गया है। उनकी नियुक्ति 12 अगस्त 2026 से प्रभावी हुई है। वह तीन साल तक इस पद पर रहेंगे।
प्रोफेसर अबू तारिक वर्ष 1990 से एएमयू के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग से जुड़े हुए हैं। जनवरी 2016 से वह प्रोफेसर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। करीब तीन दशक से अधिक समय तक विभाग से जुड़े रहने के कारण उन्हें शिक्षण, शोध और प्रशासनिक कामकाज का लंबा अनुभव है।
उनका शोध मुख्य रूप से पावर इलेक्ट्रॉनिक्स और इसके इस्तेमाल पर केंद्रित रहा है। खासतौर पर फोटोवोल्टिक सिस्टम और ड्राइव्स से जुड़े क्षेत्रों में उन्होंने काम किया है। यह क्षेत्र नवीकरणीय ऊर्जा और आधुनिक विद्युत तकनीक के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है।
प्रोफेसर तारिक के नाम राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय जर्नल तथा कॉन्फ्रेंस में प्रकाशित कई शोध पत्र हैं। उन्होंने दो पुस्तकें और एक पुस्तक अध्याय भी लिखा है। उनके नाम एक पेटेंट भी दर्ज है। यह पेटेंट ‘बेयरफुट डिटेक्शन सेंसर’ से संबंधित है।
शिक्षण और शोध के अलावा प्रोफेसर अबू तारिक एएमयू में कई प्रशासनिक जिम्मेदारियां भी निभा चुके हैं। वह सुपरिंटेंडेंट ऑफ एग्जामिनेशन और वार्डन के रूप में काम कर चुके हैं। पावर इलेक्ट्रॉनिक कन्वर्टर्स में हालिया रुझानों से संबंधित एक कार्यशाला के संयोजक की जिम्मेदारी भी उन्होंने संभाली है।
अब इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग के चेयरमैन के रूप में उनकी भूमिका विभाग के अकादमिक संचालन और शोध गतिविधियों के लिए अहम होगी।

प्रोफेसर शीबा जिलानी को केमिकल इंजीनियरिंग की जिम्मेदारी
एएमयू के जाकिर हुसैन कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी में ही एक और महत्वपूर्ण नियुक्ति हुई है। केमिकल इंजीनियरिंग विभाग की प्रोफेसर शीबा जिलानी को विभाग की चेयरपर्सन नियुक्त किया गया है। उनका कार्यकाल भी तीन साल का होगा और नियुक्ति 12 अगस्त 2026 से प्रभावी मानी जाएगी।
प्रोफेसर शीबा जिलानी वर्ष 1990 से केमिकल इंजीनियरिंग विभाग से जुड़ी हैं। अक्टूबर 2020 से वह प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं। उनकी पूरी अकादमिक यात्रा भी इंजीनियरिंग और शोध से जुड़ी रही है।
उन्होंने एएमयू से केमिकल इंजीनियरिंग में बीएससी इंजीनियरिंग और एमएससी इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने आईआईटी रुड़की से वर्ष 2010 में केमिकल इंजीनियरिंग में पीएचडी पूरी की।
प्रोफेसर जिलानी ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में 25 से अधिक शोध पत्र प्रकाशित किए हैं। उनका शोध क्षेत्र काफी व्यापक है। इसमें केमिकल इंजीनियरिंग सिस्टम की मॉडलिंग और सिमुलेशन, सेपरेशन प्रोसेस और पर्यावरण इंजीनियरिंग शामिल हैं।
उनके शोध में मीथेन रिफॉर्मिंग के जरिए सिंथेटिक गैस और हाइड्रोजन उत्पादन जैसे विषय भी शामिल रहे हैं। इसके अलावा इनडोर एयर क्वालिटी, औद्योगिक प्रदूषण और पर्यावरणीय स्थिरता पर भी उन्होंने काम किया है।
गंगा बेसिन में प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों से जुड़े अध्ययन में भी उनकी भूमिका रही है। यह परियोजना नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा की ओर से वित्त पोषित थी।
प्रोफेसर शीबा जिलानी इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ केमिकल इंजीनियर्स की लाइफ मेंबर हैं। वह इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स इंडिया की सदस्य भी हैं।
एएमयू और ZHCET में उन्होंने कई प्रशासनिक जिम्मेदारियां निभाई हैं। वह विभाग के पीजी प्रोग्राम की NBA मान्यता से जुड़े काम की कोऑर्डिनेटर रह चुकी हैं। इसके अलावा करिकुलम डेवलपमेंट कमेटी की संयोजक और विभिन्न बोर्ड ऑफ स्टडीज की सदस्य भी रही हैं।
फिलहाल वह अब्दुल्ला हॉल की प्रोवोस्ट के रूप में भी जिम्मेदारी संभाल रही हैं। ऐसे में केमिकल इंजीनियरिंग विभाग की नई जिम्मेदारी उनके प्रशासनिक अनुभव को और व्यापक बनाएगी।

डॉ. इफ्तेखार अहमद अंसारी एकेडमिक काउंसिल के सदस्य
एएमयू में तीसरा महत्वपूर्ण बदलाव एकेडमिक काउंसिल से जुड़ा है। सर जियाउद्दीन हॉल के प्रोवोस्ट डॉ. इफ्तेखार अहमद अंसारी को विश्वविद्यालय की एकेडमिक काउंसिल का सदस्य घोषित किया गया है।
यह सदस्यता हॉल ऑफ रेजिडेंस और नॉन रेजिडेंट स्टूडेंट्स सेंटर यानी NRSC के प्रोवोस्ट में वरिष्ठता के आधार पर रोटेशन से दी गई है। डॉ. अंसारी को इस पद के लिए वरिष्ठतम प्रोवोस्ट होने के आधार पर चुना गया है।
उनकी सदस्यता 3 अगस्त 2026 से प्रभावी मानी गई है। वह दो वर्ष तक एकेडमिक काउंसिल के सदस्य रहेंगे। हालांकि उनका कार्यकाल इस बात पर भी निर्भर करेगा कि वह संबंधित हॉल के प्रोवोस्ट बने रहते हैं या नहीं।
एएमयू की एकेडमिक काउंसिल विश्वविद्यालय की प्रमुख अकादमिक संस्थाओं में शामिल है। विश्वविद्यालय में शिक्षा, पाठ्यक्रम और अकादमिक मामलों से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर इस परिषद की भूमिका रहती है। ऐसे में डॉ. अंसारी को इसमें सदस्य बनाया जाना उनके प्रशासनिक अनुभव के लिहाज से महत्वपूर्ण है।
स्वतंत्रता दिवस से पहले बदलाव क्यों महत्वपूर्ण
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में ये नियुक्तियां ऐसे समय हुई हैं, जब देश स्वतंत्रता दिवस की तैयारियों में जुटा है। विश्वविद्यालय के लिए भी अगस्त का समय अकादमिक और प्रशासनिक गतिविधियों के लिहाज से महत्वपूर्ण रहता है।
एक तरफ दो प्रमुख इंजीनियरिंग विभागों को नए प्रमुख मिले हैं। दूसरी तरफ विश्वविद्यालय की एकेडमिक काउंसिल में हॉल प्रशासन से जुड़े वरिष्ठ प्रोवोस्ट को जगह मिली है।
प्रोफेसर अबू तारिक और प्रोफेसर शीबा जिलानी दोनों लंबे समय से एएमयू में काम कर रहे हैं। दोनों के पास शोध और शिक्षण के साथ प्रशासनिक अनुभव भी है। वहीं डॉ. इफ्तेखार अहमद अंसारी को छात्रावास प्रशासन में वरिष्ठता के आधार पर एकेडमिक काउंसिल की जिम्मेदारी मिली है।
इन फैसलों का असर केवल पदों के बदलाव तक सीमित नहीं रहेगा। विभागों के रोजमर्रा के प्रशासन, शोध गतिविधियों, विद्यार्थियों से जुड़े मामलों और अकादमिक योजनाओं पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है।
खास बात यह है कि नई जिम्मेदारियां पाने वाले तीनों शिक्षाविद एएमयू की पुरानी और स्थापित अकादमिक व्यवस्था से परिचित हैं। इसलिए उनसे विभागीय कामकाज में निरंतरता बनाए रखने की उम्मीद की जा रही है।
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी देश के प्रमुख केंद्रीय विश्वविद्यालयों में शामिल है। ZHCET विश्वविद्यालय के महत्वपूर्ण तकनीकी संस्थानों में से एक है। यहां इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग और केमिकल इंजीनियरिंग जैसे विभाग तकनीकी शिक्षा और शोध के लिहाज से खास महत्व रखते हैं।
अब प्रोफेसर अबू तारिक के सामने इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग को आगे ले जाने की जिम्मेदारी है। प्रोफेसर शीबा जिलानी के सामने केमिकल इंजीनियरिंग विभाग के शिक्षण और शोध कार्य को गति देने की चुनौती है। वहीं डॉ. इफ्तेखार अहमद अंसारी एकेडमिक काउंसिल में अपनी भूमिका निभाएंगे।
इस तरह स्वतंत्रता दिवस से पहले एएमयू में हुए ये बदलाव विश्वविद्यालय के अकादमिक और प्रशासनिक ढांचे में नई जिम्मेदारियों की शुरुआत करते हैं। आने वाले समय में इन नियुक्तियों का असर विभागीय गतिविधियों, शोध परियोजनाओं और विश्वविद्यालय के अकादमिक फैसलों में दिखाई दे सकता है।
AEO और सर्च के लिए मुख्य तथ्य
किसे क्या जिम्मेदारी मिली? प्रोफेसर अबू तारिक को एएमयू के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग का चेयरमैन बनाया गया है। प्रोफेसर शीबा जिलानी को केमिकल इंजीनियरिंग विभाग की चेयरपर्सन नियुक्त किया गया है। डॉ. इफ्तेखार अहमद अंसारी को एएमयू एकेडमिक काउंसिल का सदस्य घोषित किया गया है।
प्रोफेसर अबू तारिक का कार्यकाल कितना है? उनका कार्यकाल तीन वर्ष का है और नियुक्ति 12 अगस्त 2026 से प्रभावी हुई है।
प्रोफेसर शीबा जिलानी की नियुक्ति कब से प्रभावी है? उनकी नियुक्ति भी 12 अगस्त 2026 से प्रभावी हुई है और कार्यकाल तीन वर्ष का है।
डॉ. इफ्तेखार अहमद अंसारी कब से एकेडमिक काउंसिल के सदस्य हैं? उनकी सदस्यता 3 अगस्त 2026 से प्रभावी है। कार्यकाल दो वर्ष या संबंधित हॉल के प्रोवोस्ट बने रहने तक है।
एएमयू में ये नियुक्तियां क्यों महत्वपूर्ण हैं? ये बदलाव विश्वविद्यालय के दो प्रमुख तकनीकी विभागों और एकेडमिक काउंसिल से जुड़े हैं। इससे विभागीय प्रशासन, शोध और अकादमिक गतिविधियों पर असर पड़ सकता है।

