ईरान को अलग थलग करने की नई पश्चिमी रणनीति शुरू
पेट्रीसिया मारिंस
ईरान और अमेरिका के बीच युद्धविराम के बाद पश्चिम एशिया की राजनीति एक नए मोड़ पर पहुंचती दिख रही है। अंतरराष्ट्रीय मामलों के कई विश्लेषकों का मानना है कि अब सैन्य संघर्ष की जगह कूटनीतिक और नैरेटिव की लड़ाई तेज हो गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान ने हालिया संघर्ष के दौरान रणनीतिक स्तर पर उल्लेखनीय क्षमता दिखाई थी। हालांकि युद्धविराम स्वीकार करने के बाद तेहरान कई ऐसे घटनाक्रमों में घिर गया है, जिन पर वह अब तक स्पष्ट और एकजुट रुख पेश नहीं कर सका है।
विश्लेषकों के अनुसार, शांति प्रस्तावों के कथित लीक दस्तावेज, आधिकारिक प्रतिक्रियाओं में देरी और अलग अलग बयानों ने ईरान की स्थिति को कमजोर किया है। इससे अंतरराष्ट्रीय मंच पर भ्रम की स्थिति पैदा हुई है।
फिलहाल ईरान और अमेरिका के बीच कोई औपचारिक शांति समझौता या मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग मौजूद नहीं है। दोनों देशों ने केवल इतना स्वीकार किया है कि मौजूदा परिस्थितियों में युद्ध जारी रखना उनके हित में नहीं है और दोनों पक्षों को पुनर्गठन के लिए समय चाहिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि युद्धविराम ईरान के लिए पूरी तरह अनुकूल नहीं रहा। संघर्ष के दौरान तेहरान को सैन्य और लॉजिस्टिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा। खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण बनाए रखना ईरान की प्रमुख रणनीति का हिस्सा था।
हालांकि हाल के दिनों में ओमान के रास्ते वैकल्पिक समुद्री मार्गों के इस्तेमाल में तेजी आई है। इससे होर्मुज जलडमरूमध्य की रणनीतिक अहमियत और ईरान के प्रभाव को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।
इसी बीच ओमानी समुद्री क्षेत्र में एक वाणिज्यिक जहाज पर हमले की खबरों ने अंतरराष्ट्रीय चिंता बढ़ा दी है। पश्चिमी देशों के कुछ रणनीतिक विश्लेषकों का दावा है कि ऐसे घटनाक्रम ईरान को वैश्विक सुरक्षा के लिए खतरे के रूप में प्रस्तुत करने की व्यापक कोशिश का हिस्सा बन सकते हैं।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि पश्चिमी देशों, विशेषकर अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस, की सैन्य उपस्थिति अब भी क्षेत्र में बनी हुई है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों द्वारा क्षेत्र में अतिरिक्त सैन्य संसाधन तैनात किए जाने को लेकर भी चर्चा जारी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में पश्चिम एशिया, ईरान अमेरिका संबंध, होर्मुज जलडमरूमध्य, ओमान समुद्री मार्ग और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दे वैश्विक राजनीति के केंद्र में बने रहेंगे।
Iran must strategically Reorient itself in Peacetime
— Patricia Marins (@pati_marins64) June 25, 2026
For several weeks I have been noting that Iran proved to be a highly capable strategist during the war.
Yet since accepting the truce, it has been caught in a succession of episodes orchestrated by Pentagon strategists,… pic.twitter.com/eOnLGI2k7z

