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मुहर्रम विशेष: ईरान बन रहा है नई वैश्विक शक्ति !

‘ इस्लाम जिंदा होता है अर कर्बला के बाद.’

मुहर्रम के दिनों में कर्बला की याद केवल एक ऐतिहासिक घटना तक सीमित नहीं रहती। यह अन्याय के खिलाफ संघर्ष, धैर्य और प्रतिरोध का प्रतीक भी मानी जाती है। पश्चिम एशिया में हाल में हुए ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच तनाव और सैन्य टकराव के बाद कई राजनीतिक विश्लेषक इसी संदर्भ को याद कर रहे हैं।

हालिया संघर्ष के बाद अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक नई बहस शुरू हुई है। सवाल यह उठ रहा है कि क्या ईरान अब केवल एक क्षेत्रीय शक्ति नहीं रहा, बल्कि एक ऐसे देश के रूप में उभर रहा है, जो वैश्विक शक्ति संतुलन को प्रभावित करने की क्षमता रखता है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा युद्धविराम की घोषणा के बाद तेहरान की सड़कों पर जश्न का माहौल दिखाई दिया। विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों में नागरिकों के उत्साह और सैन्य प्रदर्शन की तस्वीरें सामने आईं। इस घटनाक्रम ने दुनिया का ध्यान एक बार फिर ईरान की ओर खींचा है।

क्या ईरान दुनिया की चौथी महाशक्ति बन रहा है?

यह दावा अभी सर्वमान्य नहीं है। हालांकि कुछ अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक शक्ति संरचना में ईरान की भूमिका तेजी से बढ़ रही है।

पारंपरिक रूप से अमेरिका, चीन और रूस को दुनिया की प्रमुख महाशक्तियों के रूप में देखा जाता रहा है। आर्थिक आकार, सैन्य क्षमता और वैश्विक प्रभाव के आधार पर ये देश शीर्ष पर हैं। लेकिन बदलते भू राजनीतिक परिदृश्य में शक्ति की परिभाषा भी बदल रही है।

अंतरराष्ट्रीय मामलों के कई जानकारों का कहना है कि किसी देश की ताकत केवल उसकी अर्थव्यवस्था या सेना से नहीं मापी जाती। रणनीतिक स्थिति, संसाधनों पर नियंत्रण, तकनीकी क्षमता और संकटों का सामना करने की क्षमता भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है।

प्रतिबंधों के बावजूद क्यों मजबूत दिख रहा है ईरान

ईरान पिछले चार दशकों से अमेरिकी और पश्चिमी प्रतिबंधों का सामना कर रहा है। इसके बावजूद उसने अपने रक्षा ढांचे को लगातार मजबूत किया है।

विशेषज्ञों के अनुसार ईरान ने मिसाइल तकनीक, ड्रोन तकनीक और असममित युद्ध रणनीति पर विशेष ध्यान दिया। यही वजह है कि सीमित संसाधनों के बावजूद वह अपने विरोधियों को चुनौती देने में सक्षम रहा।

हालिया संघर्ष में ईरान को नुकसान भी उठाना पड़ा। कई सैन्य प्रतिष्ठानों, बुनियादी ढांचे और सुरक्षा ठिकानों को निशाना बनाया गया। इसके बावजूद प्रशासनिक और सैन्य व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त नहीं हुई।

विश्लेषकों का कहना है कि ईरान की कमान व्यवस्था विकेंद्रीकृत है। इसलिए शीर्ष स्तर पर नुकसान होने के बाद भी निचले स्तर की सैन्य इकाइयां काम करती रहती हैं। यही उसकी सबसे बड़ी ताकत मानी जा रही है।

हॉर्मुज जलडमरूमध्य क्यों है ईरान की सबसे बड़ी ताकत

हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में शामिल है। वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है।

ऊर्जा विशेषज्ञों के मुताबिक दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल और गैस का व्यापार इस समुद्री मार्ग पर निर्भर है। ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी तरह का तनाव पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है।

ईरान लंबे समय से इस जलमार्ग पर अपनी रणनीतिक स्थिति का इस्तेमाल करता रहा है। यही कारण है कि अमेरिका, यूरोप, चीन और भारत समेत कई देश इस क्षेत्र की गतिविधियों पर लगातार नजर रखते हैं।

कूटनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर प्रभावी उपस्थिति ईरान को वैश्विक राजनीति में विशेष महत्व प्रदान करती है।

मिसाइल और ड्रोन तकनीक ने बढ़ाया प्रभाव

हाल के वर्षों में ईरान ने अपनी मिसाइल और ड्रोन तकनीक में उल्लेखनीय प्रगति की है। पश्चिमी देशों और इजरायल ने कई बार इन क्षमताओं को अपनी सुरक्षा के लिए चुनौती बताया है।

रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि ड्रोन युद्ध ने आधुनिक सैन्य रणनीति को बदल दिया है। अपेक्षाकृत कम लागत वाले ड्रोन अब महंगे सैन्य उपकरणों के लिए चुनौती बन रहे हैं।

ईरान ने इसी क्षेत्र में निवेश कर अपनी सामरिक क्षमता को मजबूत किया है। कई क्षेत्रीय संघर्षों में उसकी तकनीक का प्रभाव देखने को मिला है।

क्या बदल रहा है पश्चिम एशिया का शक्ति संतुलन

मध्य पूर्व की राजनीति लंबे समय से अमेरिका के प्रभाव में रही है। लेकिन हाल के वर्षों में रूस, चीन, तुर्किये और ईरान जैसे देशों की भूमिका बढ़ी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया अब बहुध्रुवीय व्यवस्था की ओर बढ़ रहा है। क्षेत्रीय देश अपनी सुरक्षा और आर्थिक हितों के आधार पर नए गठजोड़ तलाश रहे हैं।

ईरान और खाड़ी देशों के संबंधों में भी पिछले कुछ वर्षों में बदलाव देखने को मिला है। कई देश टकराव के बजाय संवाद और संतुलन की नीति अपना रहे हैं।

क्या युद्ध के बजाय संवाद ही समाधान है

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम एशिया में स्थायी शांति केवल सैन्य कार्रवाई से संभव नहीं है। इसके लिए व्यापक कूटनीतिक संवाद जरूरी होगा।

विशेषज्ञों के अनुसार अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच तनाव कम करने के लिए भरोसे का माहौल बनाना आवश्यक है। साथ ही क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचे को भी नए सिरे से परिभाषित करने की जरूरत होगी।

यदि ऐसा नहीं हुआ तो पश्चिम एशिया लंबे समय तक अस्थिरता और तनाव का केंद्र बना रह सकता है।

निष्कर्ष

ईरान ने हालिया घटनाक्रम के बाद यह जरूर दिखाया है कि प्रतिबंधों और दबाव के बावजूद वह क्षेत्रीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण शक्ति बना हुआ है। हालांकि उसे दुनिया की चौथी महाशक्ति कहना अभी जल्दबाजी माना जा सकता है।

फिर भी इतना स्पष्ट है कि पश्चिम एशिया की राजनीति में ईरान की अनदेखी अब किसी भी वैश्विक शक्ति के लिए आसान नहीं होगी। आने वाले वर्षों में उसकी भूमिका अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और वैश्विक शक्ति संतुलन को प्रभावित कर सकती है।

AEO Friendly FAQs

प्रश्न: क्या ईरान दुनिया की चौथी महाशक्ति बन गया है?
उत्तर: कुछ विशेषज्ञ ईरान को उभरती वैश्विक शक्ति मानते हैं, लेकिन इसे औपचारिक रूप से चौथी महाशक्ति नहीं माना गया है।

प्रश्न: हॉर्मुज जलडमरूमध्य ईरान के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
उत्तर: दुनिया के बड़े हिस्से का तेल और गैस व्यापार इसी मार्ग से होता है, जिससे ईरान को रणनीतिक बढ़त मिलती है।

प्रश्न: ईरान की सबसे बड़ी सैन्य ताकत क्या है?
उत्तर: मिसाइल तकनीक, ड्रोन क्षमता और विकेंद्रीकृत सैन्य ढांचा ईरान की प्रमुख ताकत माने जाते हैं।

प्रश्न: क्या ईरान और अमेरिका के बीच तनाव खत्म हो गया है?
उत्तर: तनाव कम करने के प्रयास जारी हैं, लेकिन क्षेत्रीय परिस्थितियां अभी भी संवेदनशील बनी हुई हैं।