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जामिया मुद्दे पर पाकिस्तान के बयान पर भड़का NSUI: कहा- ‘आंतरिक मामलों में दखल बर्दाश्त नहीं’

नई दिल्ली:

भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते कूटनीतिक और सैन्य तनाव के बीच, जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में हो रहे हालिया विरोध प्रदर्शनों ने एक नया मोड़ ले लिया है। कांग्रेस पार्टी की छात्र शाखा नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) ने शुक्रवार को पाकिस्तान द्वारा जामिया मुद्दे पर की गई टिप्पणियों की कड़े शब्दों में निंदा की है। NSUI ने स्पष्ट कर दिया है कि भारत के आंतरिक मामले ‘गैर-परक्राम्य’ (Non-negotiable) हैं और उन पर किसी भी विदेशी हस्तक्षेप की कोई जगह नहीं है।


“जामिया भारत की संप्रभुता का हिस्सा”: NSUI का करारा जवाब

NSUI की जामिया इकाई ने एक आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा कि जामिया मिलिया इस्लामिया भारत के लोकतांत्रिक और संप्रभु ढांचे का एक अभिन्न अंग है। संगठन ने जोर देकर कहा कि कैंपस के भीतर होने वाली बहस, असहमति या विरोध प्रदर्शन पूरी तरह से देश का आंतरिक मामला है।

NSUI के प्रतिनिधि ने कहा:

“सीमा पार से जो लोग हमारी ओर से बोलने की कोशिश कर रहे हैं, उन्हें पहले अपने गिरेबान में झांकना चाहिए। छात्र राजनीति और कैंपस के मुद्दों को देश के बाहर से राजनीतिक रंग देने या ‘हाइजैक’ करने की कोशिशों को कभी स्वीकार नहीं किया जाएगा।”

संगठन ने स्पष्ट किया कि भारत के पास अपने मुद्दों को सुलझाने के लिए मजबूत संस्थागत तंत्र मौजूद हैं और उसे किसी बाहरी सलाह की आवश्यकता नहीं है।


विवाद की जड़: आरएसएस का कार्यक्रम और कुलपति का बयान

जामिया कैंपस में तनाव तब शुरू हुआ जब विश्वविद्यालय प्रशासन ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को उसके शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में एक कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति दी। छात्रों के एक बड़े वर्ग ने इसका विरोध किया, जिसमें NSUI भी शामिल थी।

हालाँकि, विवाद तब और बढ़ गया जब कुलपति मजहर आसिफ का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। आरएसएस द्वारा आयोजित ‘युवा कुंभ’ कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने कथित तौर पर कहा कि “भाषा, संस्कृति और धर्म की विविधताओं के बावजूद, हम सभी भारतीय हैं क्योंकि हम सभी के भीतर महादेव का डीएनए निवास करता है।”


छात्र संगठनों का विरोध: ‘अलोकतांत्रिक और बहुसंख्यकवादी’ सोच

कुलपति के इस बयान पर छात्र संगठनों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) ने कुलपति की टिप्पणी को “अलोकतांत्रिक, अवैज्ञानिक और बहुसंख्यकवादी” करार दिया है। AISA का तर्क है कि इस तरह के बयान भारतीय पहचान की एक संकुचित और संकीर्ण परिभाषा पेश करते हैं, जो देश के धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने के खिलाफ है।


राष्ट्रीय अखंडता बनाम कैंपस राजनीति

NSUI ने अपना रुख साफ करते हुए कहा कि वे कुलपति के बयानों और कैंपस के भगवाकरण के खिलाफ अपना विरोध जारी रखेंगे, लेकिन वे कभी भी बाहरी ताकतों को इस स्थिति का फायदा उठाने नहीं देंगे। संगठन ने कहा:

“जामिया राष्ट्रीय अखंडता और संवैधानिक मूल्यों के साथ खड़ा है। यह निडर संवाद का मंच है, लेकिन बाहरी प्रोपेगेंडा या हस्तक्षेप का मंच कभी नहीं बनेगा।”


निष्कर्ष: आंतरिक कलह पर राष्ट्रहित सर्वोपरि

1 मई 2026 की इस घटना ने साफ कर दिया है कि भले ही भारत के भीतर वैचारिक मतभेद कितने ही गहरे क्यों न हों, लेकिन जब बात विदेशी दखल की आती है, तो छात्र संगठन और राजनीतिक दल एकजुट होकर राष्ट्रहित की रक्षा करते हैं। पाकिस्तान की बयानबाजी ने केवल आग में घी डालने का काम किया है, जिसे भारतीय छात्र समुदाय ने सिरे से खारिज कर दिया है।


मुख्य बिंदु:

  • NSUI ने जामिया विरोध प्रदर्शनों पर पाकिस्तान की टिप्पणी को ‘अवांछित’ बताया।
  • कुलपति मजहर आसिफ के ‘महादेव डीएनए’ वाले बयान पर एआईएसए ने जताई कड़ी आपत्ति।
  • विश्वविद्यालय में आरएसएस के शताब्दी कार्यक्रम को लेकर छात्रों में भारी रोष।
  • NSUI ने कहा- “भारत की संप्रभुता पर कोई समझौता नहीं होगा।”