भारत का मेगा सैन्य अभ्यास ‘प्रगति’: 11 पड़ोसी देशों का संगम, पाक-बांग्लादेश बाहर
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मुख्य बिंदु:
- मेघालय में 18 मई से शुरू होगा बहुपक्षीय अभ्यास ‘प्रगति’।
- लाओस, वियतनाम और फिलीपींस समेत 11 देश लेंगे हिस्सा।
- आतंकवाद विरोधी अभियानों पर रहेगा मुख्य फोकस।
- पाकिस्तान और बांग्लादेश को इस सूची में जगह नहीं मिली।

शिलांग/नई दिल्ली:
भारतीय रक्षा कूटनीति के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। भारतीय सेना पहली बार अपने 11 मित्र पड़ोसी देशों के साथ एक विशाल बहुपक्षीय सैन्य अभ्यास का आयोजन करने जा रही है। 18 से 31 मई 2026 तक मेघालय में आयोजित होने वाले इस अभ्यास को ‘प्रगति’ नाम दिया गया है। हालांकि, इस मेगा इवेंट की सबसे बड़ी चर्चा का विषय पाकिस्तान और बांग्लादेश का इस सूची से बाहर होना है।
अभ्यास ‘प्रगति’: क्षेत्रीय शक्ति प्रदर्शन का नया केंद्र
मेघालय के उमरोई में होने वाले इस 14 दिवसीय अभ्यास में दक्षिण-पूर्व एशिया और हिंद महासागर क्षेत्र के 11 देश हिस्सा लेंगे। इन देशों में शामिल हैं:
- दक्षिण-पूर्व एशिया: लाओस, वियतनाम, फिलीपींस, मलेशिया, कंबोडिया, म्यांमार।
- दक्षिण एशिया और हिंद महासागर: श्रीलंका, नेपाल, मालदीव, भूटान, सेशेल्स।
भारतीय सेना के अतिरिक्त महानिदेशक (लोक सूचना) के अनुसार, इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य क्षेत्रीय शक्तियों के बीच सहयोग को बढ़ावा देना और संयुक्त परिचालन क्षमताओं का निर्माण करना है।

पाकिस्तान और बांग्लादेश की अनुपस्थिति: रणनीतिक संकेत?
इस सैन्य अभ्यास से बांग्लादेश और पाकिस्तान को दूर रखना अंतरराष्ट्रीय गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।
- बांग्लादेश का मामला: हाल के दिनों में बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के बाद भारत के साथ संबंधों में सुधार की खबरें आई थीं, लेकिन इस महत्वपूर्ण अभ्यास में उसकी अनुपस्थिति कई सवाल खड़े करती है। विश्लेषकों का मानना है कि सुरक्षा प्रोटोकॉल या रणनीतिक प्राथमिकताओं के कारण फिलहाल उसे इस बहुपक्षीय ढांचे से बाहर रखा गया है।
- पाकिस्तान का रुख: पाकिस्तान के प्रति भारत का नजरिया हाल के हफ्तों में कुछ ‘नर्म’ दिखाई दिया है। विशेष रूप से रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के उस बयान के बाद, जिसमें उन्होंने कहा था कि “आतंकवाद का कोई देश या मजहब नहीं होता”, इसे पाकिस्तान पर लगे पुराने आरोपों के प्रति एक कूटनीतिक नरमी के रूप में देखा जा रहा था। इसके बावजूद, सैन्य सहयोग के स्तर पर पाकिस्तान अभी भी भारत की प्राथमिकता सूची से बाहर है।

अभ्यास का मुख्य उद्देश्य: आतंकवाद और उग्रवाद का खात्मा
‘प्रगति’ सैन्य अभ्यास का प्राथमिक केंद्र उग्रवाद-विरोधी (Counter-Insurgency) और आतंकवाद-विरोधी (Counter-Terrorism) अभियानों को धार देना है।
- संयुक्त प्रशिक्षण: भाग लेने वाले देशों की सेनाएं शहरी और जंगली इलाकों में आतंकवादियों से निपटने की आधुनिक तकनीकों का साझा प्रशिक्षण लेंगी।
- रक्षा कूटनीति: प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, यह अभ्यास पड़ोसी देशों और हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) के साथ भारत की बढ़ती रक्षा भागीदारी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
सुरक्षा विश्लेषकों का नजरिया: ‘एशियाई नाटो’ की ओर कदम?
भारतीय सुरक्षा विश्लेषकों का मानना है कि यह भारत की रक्षा रणनीति में एक बड़ा बदलाव है। अतीत में भारत आम तौर पर द्विपक्षीय (दो देशों के बीच) या त्रिपक्षीय (तीन देशों के बीच) अभ्यास करता रहा है। लेकिन एक साथ 11 एशियाई देशों को एक मंच पर लाना यह दर्शाता है कि भारत अब एक ‘संघ-प्रकार’ (Coalition-style) के गठबंधन की तलाश कर रहा है।
यह पहल न केवल क्षेत्रीय रक्षा कूटनीति में एक नया आयाम जोड़ती है, बल्कि चीन के बढ़ते प्रभाव के बीच भारत को एक ‘नेट सुरक्षा प्रदाता’ (Net Security Provider) के रूप में भी स्थापित करती है।
निष्कर्ष: बदलती वैश्विक व्यवस्था में भारत का नेतृत्व
संक्षेप में कहें तो, ‘प्रगति’ केवल एक सैन्य अभ्यास नहीं है, बल्कि यह हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत के बढ़ते रणनीतिक कद का प्रमाण है। 11 देशों का एक साथ आना भारत की ‘नेबरहुड फर्स्ट’ (Neighborhood First) और ‘एक्ट ईस्ट’ (Act East) नीतियों के सफल एकीकरण को दर्शाता है। जहां पाकिस्तान और बांग्लादेश की अनुपस्थिति कूटनीतिक पहेली बनी हुई है, वहीं भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि वह समान विचारधारा वाले मित्र देशों के साथ मिलकर क्षेत्रीय स्थिरता के लिए प्रतिबद्ध है।
स्रोत: टाइम्स ऑफ इंडिया

