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परवेज परवाज की जेल में मौत, गोरखपुर के पुराने मामले फिर चर्चा में

मुस्लिम नाउ ब्यूरो, गोरखपुर, उत्तर प्रदेश

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर के पूर्व पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता परवेज परवाज की जेल में मौत हो गई। वह 72 वर्ष के थे और दुष्कर्म के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे थे। जेल प्रशासन के अनुसार, परवेज लंबे समय से कई बीमारियों से पीड़ित थे। शनिवार रात उन्हें सांस लेने में परेशानी हुई। इसके बाद जिला जेल प्रशासन उन्हें गोरखपुर जिला अस्पताल ले गया, जहां उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई।

परवेज परवाज की मौत के बाद गोरखपुर में वर्ष 2007 में दिए गए एक भाषण और उसके बाद हुई हिंसा से जुड़ा मामला भी फिर चर्चा में आ गया है। परवेज उस मामले में याचिकाकर्ता थे। उन्होंने तत्कालीन सांसद और वर्तमान उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कथित भड़काऊ भाषण की जांच कराने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ी थी।

उनकी मौत पर सोशल मीडिया पर कई लोगों ने प्रतिक्रिया दी है। कुछ टिप्पणियों में उनके सामाजिक कार्यों और सांप्रदायिक सौहार्द से जुड़े प्रयासों का उल्लेख किया गया है। वहीं, उनके खिलाफ दुष्कर्म के मामले में सुनाई गई उम्रकैद की सजा भी उनकी जिंदगी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रही। इसलिए उनकी मृत्यु से जुड़ी खबर में दोनों मामलों के तथ्यों को अलग-अलग समझना जरूरी है।

कौन थे परवेज परवाज?

परवेज परवाज गोरखपुर के तुर्कमानपुर इलाके के निवासी थे। वह पत्रकारिता से जुड़े रहे और बाद में सामाजिक गतिविधियों तथा कानूनी मामलों को लेकर भी पहचान बनाने लगे। उत्तर प्रदेश की राजनीति और गोरखपुर में सांप्रदायिक तनाव से जुड़े एक पुराने मामले में उनकी भूमिका ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में ला दिया था।

वर्ष 2007 में गोरखपुर में एक भाषण के बाद हिंसा भड़कने का मामला सामने आया था। उस समय योगी आदित्यनाथ गोरखपुर से सांसद थे। परवेज परवाज ने इस भाषण में कथित रूप से भड़काऊ बातें कहे जाने और उसके बाद हुई हिंसा में आदित्यनाथ की भूमिका की जांच की मांग की थी।

इस मामले में उन्होंने स्थानीय अदालत का दरवाजा खटखटाया। उनकी याचिका में भाषण से संबंधित आरोपों की जांच कर कानूनी कार्रवाई करने की मांग की गई थी। हालांकि, मजिस्ट्रेट ने उनकी याचिका खारिज कर दी। उपलब्ध विवरण के अनुसार, अदालत ने कहा था कि इस मामले में पहले ही प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी है।

इसके बाद परवेज परवाज ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की। इस तरह वर्ष 2007 के गोरखपुर भाषण का मामला लंबे समय तक कानूनी और राजनीतिक चर्चा का हिस्सा बना रहा।

2007 के भाषण और गोरखपुर हिंसा का मामला

गोरखपुर में वर्ष 2007 की घटना उस समय के राजनीतिक और सामाजिक माहौल से जुड़ी थी। परवेज परवाज ने आरोप लगाया था कि तत्कालीन सांसद योगी आदित्यनाथ के भाषण की जांच होनी चाहिए। उनका प्रयास था कि भाषण और उसके बाद हुई हिंसा के बीच संबंध की जांच कानूनी प्रक्रिया के तहत की जाए।

यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि किसी व्यक्ति द्वारा जांच की मांग करना और अदालत में आरोप साबित होना दो अलग-अलग बातें हैं। परवेज की याचिका में उठाए गए सवालों को उनके आरोपों और कानूनी मांगों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

इस मामले में प्रस्तुत एक सीडी को लेकर भी विवाद हुआ था। उपलब्ध विवरण के मुताबिक, सीडी की जांच में कथित छेड़छाड़ सामने आने के बाद इससे जुड़े मामले में परवेज परवाज के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज किया गया। गोरखपुर में दंगों के दौरान उन पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून यानी रासुका के तहत कार्रवाई किए जाने का भी उल्लेख मिलता है।

इस पूरे घटनाक्रम ने परवेज परवाज को एक ऐसे व्यक्ति के रूप में चर्चा में रखा, जो एक ओर राजनीतिक रूप से संवेदनशील मामले में याचिकाकर्ता थे और दूसरी ओर खुद भी कानूनी विवादों में घिर गए थे।

दुष्कर्म के मामले में क्यों मिली उम्रकैद?

परवेज परवाज की जिंदगी का दूसरा महत्वपूर्ण पक्ष वर्ष 2018 में दर्ज दुष्कर्म का मामला था। इसी मामले में उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। इस मामले में उनके साथ महमूद उर्फ जुम्मन बाबा का नाम भी शामिल था।

मामले के उपलब्ध विवरण के अनुसार, एक महिला ने आरोप लगाया था कि वह 3 जून 2018 को अपनी वैवाहिक समस्याओं के समाधान के लिए जुम्मन बाबा के पास गई थी। महिला का आरोप था कि झाड़-फूंक या उपचार के बहाने उसे बुलाया गया और बाद में एक सुनसान जगह पर ले जाकर उसके साथ बंदूक की नोक पर सामूहिक दुष्कर्म किया गया।

महिला की शिकायत में परवेज परवाज का नाम भी शामिल था। शिकायत के आधार पर दोनों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। सितंबर 2018 में परवेज को गिरफ्तार किया गया था।

जुलाई 2020 में जिला अदालत ने इस मामले में परवेज परवाज और जुम्मन बाबा को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। दोनों पर 25-25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था। उपलब्ध विवरण के अनुसार, जुर्माने की राशि में से कुल 40 हजार रुपये पीड़िता के पुनर्वास के लिए देने का आदेश दिया गया था।

इस सजा के बाद परवेज परवाज गोरखपुर जिला जेल में बंद थे। वह करीब आठ वर्ष से जेल में थे। उनके साथ इसी मामले में सजा पाए जुम्मन बाबा की भी जेल में सजा काटने के दौरान पहले मौत हो चुकी थी।

बीमारी के बाद अस्पताल में हुई मौत

गोरखपुर जिला जेल के अधीक्षक वी.के. पांडे के अनुसार, परवेज परवाज उच्च रक्तचाप और मधुमेह समेत कई स्वास्थ्य समस्याओं से पीड़ित थे। शनिवार रात उन्हें सांस लेने में परेशानी हुई। जेल प्रशासन ने उनकी तबीयत बिगड़ने पर उन्हें जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां उनकी मौत हो गई।

रिपोर्टों के मुताबिक, कुछ दिन पहले उनकी आंखों की सर्जरी भी कराई गई थी। लंबे समय से बीमार रहने के कारण उनकी सेहत को लेकर परेशानी बनी हुई थी।

फिलहाल उपलब्ध जानकारी में उनकी मौत का तत्काल कारण सांस लेने में परेशानी के बाद बिगड़ी तबीयत बताया गया है। उनकी मृत्यु के संबंध में इससे आगे किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए आधिकारिक चिकित्सकीय जानकारी जरूरी होगी।

सोशल मीडिया पर क्यों हो रही है चर्चा?

परवेज परवाज की मौत के बाद सोशल मीडिया पर उनके पुराने सामाजिक कार्यों और कानूनी लड़ाई का उल्लेख किया जा रहा है। द मुस्लिम मैटर इंडिया ने अपने एक्स हैंडल पर उनकी मौत की जानकारी साझा करते हुए वर्ष 2007 के भाषण से जुड़े मामले में उनकी भूमिका का जिक्र किया।

पोस्ट में बताया गया कि परवेज ने योगी आदित्यनाथ के कथित भाषण और उसके बाद हुई हिंसा की जांच की मांग करते हुए अदालत का रुख किया था। याचिका खारिज होने के बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। पोस्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि इस मामले की सुनवाई से पहले उन पर दुष्कर्म का आरोप लगा और बाद में उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई गई।

सोशल मीडिया पर आई प्रतिक्रियाओं में कुछ लोगों ने परवेज के सामाजिक सरोकारों और सांप्रदायिक सौहार्द से जुड़े प्रयासों को याद किया। हालांकि, सोशल मीडिया पर व्यक्त विचारों को किसी व्यक्ति के पूरे जीवन या उसके खिलाफ दर्ज मामलों का अंतिम मूल्यांकन नहीं माना जा सकता।

परवेज परवाज की जिंदगी से जुड़े दोनों प्रमुख मामले अलग-अलग कानूनी और सामाजिक संदर्भ रखते हैं। एक मामला वर्ष 2007 के भाषण, गोरखपुर हिंसा और उसकी जांच की मांग से जुड़ा था। दूसरा मामला वर्ष 2018 में दर्ज सामूहिक दुष्कर्म के आरोपों से संबंधित था, जिसमें अदालत ने उन्हें दोषी ठहराकर उम्रकैद की सजा सुनाई थी।

परवेज परवाज की मौत से जुड़े प्रमुख सवाल

परवेज परवाज कौन थे?

परवेज परवाज गोरखपुर के पूर्व पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता थे। वह वर्ष 2007 के एक भाषण और उसके बाद हुई हिंसा की जांच की मांग करने वाली याचिका के कारण चर्चा में आए थे।

उनकी मौत कहां हुई?

परवेज परवाज गोरखपुर जिला जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहे थे। तबीयत बिगड़ने पर उन्हें जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी मौत हो गई।

उन्हें उम्रकैद की सजा क्यों मिली थी?

उन्हें वर्ष 2018 में दर्ज सामूहिक दुष्कर्म के मामले में जुलाई 2020 में जिला अदालत ने दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी।

योगी आदित्यनाथ से जुड़ा मामला क्या था?

परवेज ने वर्ष 2007 में गोरखपुर में दिए गए एक कथित भड़काऊ भाषण और उसके बाद हुई हिंसा में तत्कालीन सांसद योगी आदित्यनाथ की भूमिका की जांच की मांग की थी। उनकी याचिका स्थानीय अदालत में खारिज होने के बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी।

परवेज परवाज की मौत के साथ गोरखपुर के एक पुराने और विवादित घटनाक्रम से जुड़ा व्यक्ति अब नहीं रहा। उनके जीवन को समझने के लिए सामाजिक गतिविधियों, कानूनी लड़ाई और दुष्कर्म मामले में हुई सजा, तीनों पहलुओं को तथ्यों के आधार पर देखना जरूरी है। उनकी मृत्यु की खबर के बीच यही संतुलित दृष्टिकोण जरूरी है, ताकि किसी एक घटना के आधार पर उनके पूरे जीवन की व्याख्या न की जाए।

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