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धर्म नहीं बाँटता, जोड़ता है: ‘धार्मिक जन मोर्चा’ में एकजुट हुए सभी मज़हब

नई दिल्ली
जमात-ए-इस्लामी हिंद के मुख्यालय में आयोजित एक महत्वपूर्ण अंतर-धार्मिक संवाद ‘धार्मिक जन मोर्चा’ में विभिन्न धर्मों के प्रमुख नेताओं ने समाज में बढ़ते नैतिक और आध्यात्मिक पतन पर गंभीर चिंता जताई। इस ऐतिहासिक मंच पर सभी धर्मों के प्रतिनिधियों ने एक स्वर में कहा कि नैतिक गिरावट न केवल देश के लिए, बल्कि पूरी मानवता के लिए एक गंभीर खतरा बन चुकी है।

कार्यक्रम में सभी वक्ताओं ने अपनी-अपनी धार्मिक शिक्षाओं के आलोक में समाज के नैतिक उत्थान के लिए मिलकर काम करने का संकल्प लिया।

कार्यक्रम के अध्यक्ष प्रो. सलीम इंजीनियर ने कहा कि नैतिक पतन का मूल कारण मनुष्य का अपने धर्म और ईश्वर से विमुख हो जाना है। उन्होंने कहा, “जब इंसान अपनी आध्यात्मिक जड़ों से कट जाता है, तो वह सही-गलत का भेद खो बैठता है, जिससे बुराइयों को बढ़ावा मिलता है।” उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि धार्मिक नेताओं की यह साझा ज़िम्मेदारी है कि वे एकजुट होकर समाज को नैतिक दिशा में आगे ले जाएं।

स्वामी सुशील गोस्वामी महाराज ने सनातन धर्म का प्रतिनिधित्व करते हुए कहा, “हम सभी एक ही देश के निवासी हैं और भाई-भाई हैं। कोई भी धर्म नफ़रत और विभाजन की बात नहीं करता।” उन्होंने राष्ट्रीय एकता और आपसी सद्भाव को राष्ट्र के विकास की नींव बताया और सभी को साथ मिलकर कार्य करने का आह्वान किया।

ज्ञानी मंगल सिंह, जिन्होंने सिख धर्म का प्रतिनिधित्व किया, ने गुरु ग्रंथ साहिब की शिक्षाओं को उद्धृत करते हुए कहा कि भाईचारा और समानता किसी भी समाज की प्रगति के दो मुख्य आधार हैं। उन्होंने इस तरह के संवाद कार्यक्रमों को समाज में जागरूकता और समरसता फैलाने का सशक्त माध्यम बताया।

फादर नॉर्बर्ट हरमन ने ईसाई धर्म की ओर से बोलते हुए बाइबिल के मूल संदेश “ईश्वर से प्रेम करो और अपने पड़ोसी से भी” को दोहराया। उन्होंने कहा कि हमें दूसरों के साथ वैसा ही व्यवहार करना चाहिए जैसा हम स्वयं के लिए अपेक्षा रखते हैं। उन्होंने प्रेम और करुणा को सभी धर्मों का मूल बताया।

कार्यक्रम में कई अन्य धर्मों के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया, जिनमें शामिल थे:

  • श्री मर्ज़बान ज़रीवाला (पारसी धर्म)
  • संत वीर सिंह हटकारी (रविदास समाज)
  • येशी फुंट शोक (बौद्ध धर्म)
  • एज़िकेल मालेकर (यहूदी धर्म)
  • सिस्टर हुसैन (ब्रह्माकुमारी)
  • नीलाक्षी राज खवा (बहाई धर्म)

इन सभी प्रतिनिधियों की उपस्थिति ने इस संवाद को एक सच्चे राष्ट्रीय और समावेशी कार्यक्रम का स्वरूप प्रदान किया, जिसमें यह स्पष्ट हुआ कि अलग-अलग आस्थाओं के लोग भी साझा मानवीय मूल्यों की रक्षा के लिए एकजुट हो सकते हैं।

श्री वारिस हुसैन, जिन्होंने कार्यक्रम का समन्वय और संचालन किया, ने सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम धार्मिक समुदायों के बीच समझ, सहयोग और निकटता को बढ़ाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है।

कार्यक्रम में मौजूद सभी लोगों ने इस बात पर सहमति जताई कि आज के भारत को, जहाँ सामाजिक समरसता की अत्यंत आवश्यकता है, ऐसे संवाद कार्यक्रमों की ज़रूरत पहले से कहीं अधिक है। यह आयोजन इस बात का उदाहरण था कि यदि हम अपनी साझा इंसानियत को प्राथमिकता दें, तो आपसी मतभेदों को पाटकर एक बेहतर समाज की ओर बढ़ सकते हैं।