नागपुर में सेवा तंजीम का तालीमी इजलास, UPSC तैयारी कर रही छात्रा को मिला लैपटॉप
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मुस्लिम नाउ ब्यूरो, नागपुर
नागपुर के बरमकाम Islamic Cultural Centre, Teka में 7 फ़रवरी 2026 को ‘सेवा तंजीम’ का एक ऐतिहासिक और दिलों को छू लेने वाला इजलास मुनक़्क़द हुआ। यह इजलास शहर के जाने-माने बिल्डर जनाब ज़ाकिर ख़ान और उनके अहबाब की जानिब से आयोजित किया गया, जो लंबे समय से तालीम के मिशन में गहरी दिलचस्पी रखते हैं और ख़ामोशी से समाज की ख़िदमत में जुटे हुए हैं।
इजलास का आग़ाज़ क़ुरआने करीम की तिलावत और नात-ए-पाक से हुआ। शुरुआत से ही माहौल में रूहानियत, उम्मीद और ज़िम्मेदारी का एहसास साफ़ झलक रहा था। सेवा नागपुर टीम के साथियों ने मंच से अपने तजुर्बे साझा किए और बताया कि किस तरह यह काम शून्य से शुरू होकर आज भरोसे की मिसाल बन चुका है।

घर-घर दस्तक से भरोसे तक का सफ़र
टीम के सदस्यों ने बताया कि शुरुआत में हालात आसान नहीं थे। दो-तीन बार घरों की कुंडियां खटखटानी पड़ीं, लोगों को समझाना पड़ा, भरोसा कायम करना पड़ा। लेकिन धीरे-धीरे तस्वीर बदलती चली गई। आज हालात यह हैं कि टीम के किसी इलाके में पहुंचने से पहले ही मां-बाप अपने बच्चों के साथ इंतज़ार करते नज़र आते हैं—इस उम्मीद के साथ कि शायद इस रहबरी से उनके बच्चों का मुस्तक़बिल संवर जाए।
13 अक्टूबर 2025 से नागपुर में शुरू हुई ‘तालीमी गश्त’ की अब तक की कारगुज़ारी इजलास में पेश की गई। मौजूद सामईन ने न सिर्फ़ इस जद्दोजहद को सराहा, बल्कि खुद भी इस नेक काम को आगे बढ़ाने का अज़्म किया।
मस्तूरात की भागीदारी, तालीम की नई तस्वीर
इजलास की ख़ास बात यह रही कि इसमें सिर्फ़ मर्द ही नहीं, बल्कि बड़ी तादाद में आई मस्तूरात ने भी खुलकर हिस्सा लिया। उन्होंने अपने संपर्क नंबर दिए और कहा कि जहां-जहां उनकी ज़रूरत होगी, वे तालीमी ख़िदमत के लिए हर वक़्त तैयार हैं। यह मंज़र साफ़ बता रहा था कि तालीम की जंग अब सिर्फ़ मंचों तक सीमित नहीं, बल्कि घरों से निकलकर समाज की धड़कन बन चुकी है।
संघर्ष, क़र्ज़ और फिर भी उम्मीद
इजलास में Social Educational and Welfare Association (यवतमाल) के जनरल सेक्रेटरी जनाब Nizamuddin Sheikh ने 2014 से शुरू हुई अपनी जद्दोजहद की दास्तान सुनाई। उन्होंने कहा,
“हमने तय किया कि हर घर जाएंगे, हर बच्चे से मिलेंगे और यह काम बिना नतीजे की परवाह किए लगातार करते रहेंगे। हम किसी बच्चे में फर्क नहीं करेंगे। हर ज़रूरतमंद हमारी ज़िम्मेदारी है।”
उन्होंने बेबाकी से बताया कि इस वक़्त सेवा तंजीम पर लगभग 7 लाख रुपये का क़र्ज़ है, लेकिन इसके बावजूद किसी बच्चे की ज़रूरत को कभी पीछे नहीं रखा गया। इसी इजलास में जब दो बच्चियों ने अपने हालात बताए, तो जनाब निज़ामुद्दीन शेख ने वहीं मंच से मदद का एलान कर दिया—
- एक बच्ची को BAMS की पढ़ाई के लिए 50,000 रुपये,
- और UPSC की तैयारी कर रही दूसरी बच्ची को लैपटॉप के लिए 20,000 रुपये।
“हम कौन होते हैं किसी बच्चे को नाक़ाबिल ठहराने वाले”
अपने ख़िताब में निज़ामुद्दीन शेख साहब ने कहा,
“हम कौन होते हैं यह तय करने वाले कि कौन बच्चा कमज़ोर है और कौन नाक़ाबिल?”
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— muslimnow (@muslimnow3) February 11, 2026
उन्होंने अल्बर्ट आइंस्टीन का वाक़िआ सुनाया—जिसे बचपन में डॉक्टरों ने मानसिक रूप से कमज़ोर बताया और स्कूल से निकाल दिया गया, लेकिन मां के भरोसे और तालीम ने उसे दुनिया का महान वैज्ञानिक बना दिया। इसी तरह हज़रत उमर फ़ारूक़ (रज़ि.) की मिसाल देते हुए कहा कि इस्लाम और तालीम ने किस तरह उनकी ज़िंदगी पलट दी।
“यक़ीनन तालीम ही वह ताक़त है, जो ज़िंदगियों को बदल देती है—तो फिर हम उसमें भेदभाव क्यों करें?”
ज़ाकिर ख़ान का एलान, काम को नई रफ़्तार
इजलास के इख़्तिताम पर जनाब ज़ाकिर ख़ान ने पढ़ाई की अहमियत पर ज़ोर देते हुए कहा कि जब भी ज़रूरत होगी, वे हर मुमकिन मदद के लिए तैयार रहेंगे। उन्होंने कोरोना काल में ज़रूरतमंदों तक लगातार खाना पहुंचाने की अपनी ख़ामोश कोशिशों का ज़िक्र किए बिना ही, सेवा तंजीम को कल्चरल हॉल में एक कमरा ऑफिस के लिए देने और दो अटेंडेंट उपलब्ध कराने का एलान किया।
उनके अहबाब में से कुछ लोगों ने नए इलाकों में ऑफिस के लिए जगह देने का वादा किया—और यह सिर्फ़ वादा नहीं रहा। 8 फ़रवरी, इतवार को उन्हीं इलाकों में सेवा नागपुर टीम ने गश्त भी शुरू कर दी।
अमल की रफ़्तार, दुआओं की छांव
इजलास में चाय-नाश्ते का बेहतरीन इंतज़ाम ज़ाकिर ख़ान की तरफ़ से किया गया, जबकि इख़्तिताम के बाद भाई इमरान ने होटल अफ़ग़ान दरबार में तमाम साथियों की शानदार ज़ियाफ़त की।
इजलास के बाद निज़ामुद्दीन शेख साहब UPSC की तैयारी कर रही उस बेटी से मिलने के लिए टीम के साथ हाफ़िज़ साहब के घर पहुंचे। वहां मां-बाप की दीनी और दुनियावी तरबियत का ऐसा बेहतरीन नमूना देखने को मिला कि हर आंख चमक उठी—घर में गोल्ड मेडल्स, 90% से ऊपर नंबर, बेटियां और बेटा सभी ऊंचे मक़सद के साथ आगे बढ़ते हुए।
निज़ामुद्दीन साहब ने बेटियों से कहा,
“यह पढ़ाई सिर्फ़ दुनियावी नहीं, बल्कि दीनी भी है। इसे इबादत समझकर पढ़ो और ख़िदमत-ए-ख़ल्क़ के लिए इस्तेमाल करो।”

वादा पूरा हुआ, लैपटॉप सौंपा गया
जिस बेटी को 7 फ़रवरी को लैपटॉप के लिए 20,000 रुपये देने का वादा किया गया था, उसे सोमवार को नागपुर में बाक़ायदा लैपटॉप सौंप दिया गया। सेवा तंजीम यूं तो किसी बच्चे में फर्क नहीं करती, लेकिन UPSC जैसे कठिन इम्तिहान की तैयारी करने वालों की मदद को वह अपनी ख़ास ज़िम्मेदारी मानती है।
सेवा तंजीम नागपुर के काम को देखकर एक साहिब-ए-ख़ैर ने 5,000 रुपये का तआवुन भी किया।
हक़ीक़त यही है कि अफ़राद के हाथों में है अक़वाम की तक़दीर—हर फ़र्द मिल्लत के मुक़द्दर का सितारा है।
नागपुर का यह इजलास इसी हक़ीक़त की ज़िंदा मिसाल बनकर सामने आया।

