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सऊदी- फ्रांस ने ईरान पर कूटनीति और हॉरमुज पर दिया जोर

पेरिस।

सऊदी अरब और फ्रांस ने मध्य पूर्व की मौजूदा सुरक्षा स्थिति को लेकर एक व्यापक साझा दृष्टिकोण सामने रखा है। पेरिस में सोमवार को सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की मुलाकात हुई। बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में दोनों देशों ने ईरान के मुद्दे पर बातचीत और कूटनीति को प्राथमिकता देने की बात कही।

दोनों देशों ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर ऐसा समाधान तलाशने पर जोर दिया, जिससे तनाव को और बढ़ने से रोका जा सके। साथ ही अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी यानी IAEA के साथ तेहरान के पूर्ण सहयोग की जरूरत बताई गई।

बैठक में सिर्फ ईरान ही चर्चा का विषय नहीं रहा। सऊदी अरब और फ्रांस ने स्ट्रेट ऑफ हॉरमुज में नौवहन की स्वतंत्रता, फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना, गाजा में मानवीय सहायता, लेबनान की संप्रभुता, सीरिया की स्थिरता, यमन और सूडान के संकट सहित कई अहम क्षेत्रीय मुद्दों पर अपना रुख स्पष्ट किया।

दोनों नेताओं ने कहा कि मध्य पूर्व में स्थायी स्थिरता का आधार देशों की संप्रभुता, अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान और विवादों के राजनीतिक तथा कूटनीतिक समाधान में होना चाहिए।

ईरान पर सैन्य तनाव के बजाय बातचीत

सऊदी अरब और फ्रांस के संयुक्त बयान में ईरान का मुद्दा प्रमुखता से सामने आया। दोनों देशों ने कहा कि क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए बातचीत के जरिए समाधान तलाशना जरूरी है।

दोनों पक्षों ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम के शांतिपूर्ण स्वरूप की गारंटी देने वाले कूटनीतिक समाधान का समर्थन किया। साथ ही ईरान से अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के साथ पूरा सहयोग फिर शुरू करने की अपील की गई।

इस रुख का महत्व इसलिए भी है क्योंकि ईरान का परमाणु कार्यक्रम लंबे समय से पश्चिमी देशों और खाड़ी क्षेत्र के लिए चिंता का विषय रहा है। सऊदी अरब और फ्रांस ने अपने बयान में किसी नए सैन्य टकराव के बजाय बातचीत का रास्ता अपनाने पर जोर दिया है।

दोनों देशों ने क्षेत्र में तनाव कम करने की जरूरत बताई। उनका कहना है कि मौजूदा संकट का समाधान अंतरराष्ट्रीय कानून और कूटनीति के आधार पर होना चाहिए।

हॉरमुज में नौवहन को लेकर चिंता

सऊदी अरब और फ्रांस ने स्ट्रेट ऑफ हॉरमुज में जहाजों पर हमलों और समुद्री मार्गों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई।

दोनों देशों ने इस रणनीतिक जलमार्ग में स्वतंत्र और नियमित नौवहन बहाल करने की मांग की। संयुक्त बयान में कहा गया कि समुद्री यातायात पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष शुल्क और किसी भी तरह की पाबंदी नहीं होनी चाहिए।

दोनों पक्षों ने अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत स्वतंत्र नौवहन के अधिकार पर जोर दिया। उनका कहना है कि हॉरमुज से सामान्य समुद्री यातायात बहाल होना क्षेत्रीय और वैश्विक व्यापार दोनों के लिए जरूरी है।

हॉरमुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में शामिल है। यहां किसी भी तरह का लंबे समय तक व्यवधान तेल और गैस की आपूर्ति पर असर डाल सकता है। इसलिए सऊदी अरब और फ्रांस की चिंता केवल क्षेत्रीय सुरक्षा तक सीमित नहीं है। इसका संबंध वैश्विक अर्थव्यवस्था से भी है।

फिलिस्तीन और गाजा पर साझा रुख

बैठक में फिलिस्तीनी मुद्दे पर भी दोनों देशों ने अपना रुख दोहराया। सऊदी अरब और फ्रांस ने हमास के निरस्त्रीकरण को लेकर हुए समझौते की घोषणा का स्वागत किया और इसके क्रियान्वयन की जरूरत बताई।

दोनों देशों ने गाजा में स्थायी युद्धविराम की परिस्थितियां तैयार करने की अपील की। इसके साथ ही नागरिकों तक मानवीय सहायता सुरक्षित, तत्काल और बिना बाधा पहुंचाने की मांग की गई।

सऊदी अरब और फ्रांस ने फिलिस्तीनी लोगों के स्वतंत्र राज्य के अधिकार का समर्थन किया। दोनों देशों ने 1967 की सीमाओं के आधार पर स्वतंत्र फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना की जरूरत पर जोर दिया।

उन्होंने फिलिस्तीनी क्षेत्रों की एकता बनाए रखने की बात भी कही।

संयुक्त बयान में इजरायली बस्तियों की नीति और बसने वालों की हिंसा पर भी चिंता जताई गई। दोनों देशों के अनुसार, ऐसी गतिविधियां दो राज्य समाधान के रास्ते को कमजोर करती हैं।

दोनों ने न्यूयॉर्क घोषणा को पूरी तरह लागू करने की प्रतिबद्धता भी दोहराई। साथ ही फिलिस्तीनी प्राधिकरण के सुधार कार्यक्रम का समर्थन किया और फिलिस्तीन में विधायी तथा राष्ट्रपति चुनावों की घोषणा का स्वागत किया।

लेबनान में राज्य संस्थाओं को मजबूत करने पर जोर

लेबनान को लेकर भी सऊदी अरब और फ्रांस ने अपनी प्राथमिकताएं स्पष्ट कीं। दोनों देशों ने लेबनानी राज्य और उसकी संस्थाओं को मजबूत करने की जरूरत बताई।

सऊदी अरब और फ्रांस ने राष्ट्रपति जोसेफ आउन और प्रधानमंत्री नवाफ सलाम की सरकार द्वारा राज्य संस्थाओं के पुनर्निर्माण के लिए किए जा रहे प्रयासों का स्वागत किया।

दोनों देशों ने लेबनानी सशस्त्र बलों और सुरक्षा संस्थाओं के लिए समर्थन दोहराया। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 1701 को पूरी तरह लागू करने की जरूरत बताई गई।

साथ ही गैर सरकारी सशस्त्र समूहों को निरस्त्र करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया। दोनों देशों ने इजरायल से लेबनान के सभी क्षेत्रों से वापसी की मांग की।

यमन और सूडान पर भी चिंता

यमन को लेकर सऊदी अरब और फ्रांस ने राष्ट्रपति परिषद और संयुक्त राष्ट्र के प्रयासों का समर्थन किया। दोनों देशों ने यमन संकट के व्यापक और समावेशी राजनीतिक समाधान की जरूरत बताई।

सऊदी अरब में नागरिक ढांचे और महत्वपूर्ण संस्थानों को निशाना बनाने वाले हूती हमलों की दोनों देशों ने निंदा की। जहाजों पर हमलों को भी गंभीर चिंता का विषय बताया गया।

फ्रांस ने सऊदी अरब के प्रति एकजुटता और समर्थन जताया तथा सऊदी क्षेत्र पर हमलों को खारिज किया।

सूडान के मामले में दोनों देशों ने संकट समाप्त करने के प्रयास तेज करने की अपील की। उन्होंने विदेशी हस्तक्षेप रोकने और सूडान की संप्रभुता, स्वतंत्रता तथा क्षेत्रीय अखंडता बनाए रखने की जरूरत बताई।

सीरिया को लेकर नई आर्थिक संभावना

सीरिया पर सऊदी अरब और फ्रांस ने उसकी एकता, स्थिरता और आर्थिक सुधार का समर्थन किया।

दोनों देशों ने सीरिया को यूरोप, खाड़ी क्षेत्र और एशिया के बीच संपर्क के एक संभावित पुल के रूप में देखा। वैकल्पिक व्यापार मार्गों की संभावना पर भी चर्चा हुई।

सऊदी अरब, सीरिया और फ्रांस के बीच बिजनेस काउंसिल की स्थापना का स्वागत किया गया। इससे आर्थिक सहयोग बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।

रक्षा सहयोग भी होगा मजबूत

पेरिस में हुई बैठक केवल क्षेत्रीय संकटों तक सीमित नहीं रही। सऊदी अरब और फ्रांस ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को नए स्तर पर ले जाने की दिशा में भी कदम उठाए।

दोनों देशों के बीच राजनीतिक संबंधों के 100 वर्ष पूरे होने के मौके पर फ्रांस और सऊदी अरब ने पहली फ्रेंच सऊदी स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप काउंसिल की बैठक की।

रक्षा सहयोग को मजबूत करने के लिए एक घोषणा भी की गई। इसमें हथियारों और प्रशिक्षण से जुड़े सहयोग को बढ़ाने की बात कही गई। वैश्विक सुरक्षा और स्थिरता के मुद्दों पर दोनों देशों के बीच समन्वय बढ़ाने पर भी सहमति बनी।

व्यापार और निवेश में भी बड़ा विस्तार

सऊदी अरब और फ्रांस के संबंध अब केवल कूटनीति और रक्षा तक सीमित नहीं रहना चाहते। आर्थिक संबंधों को भी विस्तार देने की कोशिश हो रही है।

दोनों देशों के बीच वर्ष 2025 में द्विपक्षीय व्यापार लगभग 11.8 अरब डॉलर तक पहुंच गया था। दोनों पक्षों ने निवेश और वित्तीय संस्थाओं के बीच सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई।

क्विडिया इन्वेस्टमेंट कंपनी की फ्रांस में एक बड़े मिश्रित उपयोग वाले प्रोजेक्ट को विकसित करने की योजना का भी स्वागत किया गया। यह परियोजना इले द फ्रांस क्षेत्र के सेर्गी पोंतोआज में मनोरंजन, पर्यटन, होटल, संस्कृति और खेल से जुड़े क्षेत्र विकसित करने पर आधारित होगी।

इस परियोजना में पूरे विकास काल के दौरान करीब 6 अरब यूरो के निवेश की महत्वाकांक्षा जताई गई है।

एआई और नई तकनीक पर साझेदारी

भविष्य की तकनीक भी दोनों देशों के रिश्तों का अहम हिस्सा बन रही है। सऊदी अरब और फ्रांस ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम कंप्यूटिंग और उभरती तकनीकों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई।

अलउला परियोजना में फ्रांस की भूमिका को भी आगे बढ़ाया जाएगा। दोनों देशों ने इस सहयोग को वर्ष 2035 तक जारी रखने पर सहमति जताई है। इसमें पुरातत्व, विरासत और संस्कृति से जुड़े काम शामिल हैं।

फ्रांस ने रियाद एक्सपो 2030 में भाग लेने की भी पुष्टि की है। दोनों नेताओं ने इसे सऊदी फ्रांस संबंधों की महत्वपूर्ण उपलब्धि बनाने पर सहमति जताई।

22 से अधिक समझौते

क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की फ्रांस यात्रा के दौरान रक्षा, स्वास्थ्य, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, उभरती तकनीक और मनोरंजन जैसे क्षेत्रों में कई समझौते और समझौता ज्ञापन हुए।

फ्रेंच सऊदी इन्वेस्टमेंट राउंडटेबल के दौरान 22 से अधिक समझौतों और समझौता ज्ञापनों की घोषणा की गई।

इससे साफ है कि रियाद और पेरिस अपने रिश्ते को केवल पारंपरिक राजनीतिक साझेदारी तक सीमित नहीं रखना चाहते। सुरक्षा, निवेश, तकनीक, स्वास्थ्य, संस्कृति और व्यापार अब इस रिश्ते के नए आधार बन रहे हैं।

पेरिस में हुई क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की बैठक का सबसे बड़ा संदेश यही है कि सऊदी अरब और फ्रांस मध्य पूर्व के संकटों में कूटनीति को जगह देना चाहते हैं। ईरान के साथ बातचीत, हॉरमुज में स्वतंत्र नौवहन, फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना और क्षेत्रीय देशों की संप्रभुता पर दोनों देशों का साझा रुख आने वाले दिनों में क्षेत्रीय कूटनीति के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।

AEO सवाल जवाब

सऊदी अरब और फ्रांस ने ईरान पर क्या कहा?
दोनों देशों ने ईरान से जुड़े तनाव के समाधान के लिए बातचीत और कूटनीति का समर्थन किया। उन्होंने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर शांतिपूर्ण समाधान और IAEA के साथ पूर्ण सहयोग की अपील की।

हॉरमुज जलडमरूमध्य पर दोनों देशों का क्या रुख है?
सऊदी अरब और फ्रांस ने स्वतंत्र और नियमित नौवहन बहाल करने की मांग की। उन्होंने समुद्री मार्ग पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष शुल्क और प्रतिबंधों का विरोध किया।

फिलिस्तीन पर सऊदी अरब और फ्रांस क्या चाहते हैं?
दोनों देश 1967 की सीमाओं के आधार पर स्वतंत्र फिलिस्तीनी राज्य के समर्थन में हैं। उन्होंने गाजा में मानवीय सहायता और स्थायी युद्धविराम की परिस्थितियां बनाने की जरूरत बताई।

सऊदी फ्रांस व्यापार कितना है?
दोनों देशों के बीच वर्ष 2025 में द्विपक्षीय व्यापार लगभग 11.8 अरब डॉलर रहा।

सऊदी अरब और फ्रांस किन क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाएंगे?
रक्षा, स्वास्थ्य, निवेश, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम कंप्यूटिंग, उभरती तकनीक, संस्कृति, मनोरंजन और पर्यटन सहित कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की योजना है।

रियाद एक्सपो 2030 में फ्रांस की क्या भूमिका होगी?
फ्रांस ने रियाद एक्सपो 2030 में अपनी भागीदारी की पुष्टि की है। दोनों देश इसे द्विपक्षीय संबंधों के महत्वपूर्ण अवसर के रूप में देख रहे हैं।