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ईरान के हमलों पर सऊदी अरब की कड़ी प्रतिक्रिया: यह खतरनाक उकसावे से द्विपक्षीय संबंधों पर पड़ेगा बड़ा असर

मुस्लिम नाउ ब्यूरो | रियाद/नई दिल्ली

पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध तनाव के बीच सऊदी अरब ने ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमलों की कड़ी निंदा की है। सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय ने सोमवार को जारी एक सख्त बयान में कहा कि ईरान के लगातार हमले क्षेत्र में तनाव को और बढ़ाने वाले कदम हैं और इनका दोनों देशों के रिश्तों पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा।

सऊदी अरब ने कहा कि इन हमलों को किसी भी परिस्थिति में स्वीकार या उचित नहीं ठहराया जा सकता। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि देश अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा, संप्रभुता और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने का पूरा अधिकार रखता है।

अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया

सऊदी विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि ईरान द्वारा सऊदी अरब, खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के सदस्य देशों और कई अन्य अरब तथा मित्र देशों को निशाना बनाना अंतरराष्ट्रीय चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन है।

बयान में कहा गया कि ईरानी हमलों में नागरिक ठिकानों, हवाई अड्डों और तेल प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया गया, जो क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता को गंभीर खतरे में डालने की कोशिश को दर्शाता है।

सऊदी अरब ने यह भी कहा कि ईरान के राष्ट्रपति ने हाल ही में दावा किया था कि पड़ोसी देशों पर हमला करने की कोई योजना नहीं है, लेकिन जमीन पर हालात इससे बिल्कुल अलग दिखाई दे रहे हैं। मंत्रालय के अनुसार, ईरान लगातार ऐसे आरोप लगा रहा है जिनका कोई आधार नहीं है।

सऊदी ने खारिज किए ईरान के आरोप

रियाद ने उन आरोपों को भी खारिज किया जिनमें कहा गया था कि सऊदी अरब से लड़ाकू विमान और ईंधन भरने वाले विमान युद्ध में भाग लेने के लिए रवाना हुए थे। सऊदी अरब का कहना है कि ये विमान केवल हवाई गश्त और क्षेत्रीय हवाई क्षेत्र की सुरक्षा के लिए तैनात किए गए थे ताकि ईरानी मिसाइलों और ड्रोन से GCC देशों की रक्षा की जा सके।

सऊदी विदेश मंत्रालय ने चेतावनी दी कि ईरान के मौजूदा कदम समझदारी नहीं दिखाते और यदि संघर्ष बढ़ता है तो उसका सबसे बड़ा नुकसान खुद ईरान को ही उठाना पड़ेगा।

यूएई ने भी रोके मिसाइल और ड्रोन

इस बीच संयुक्त अरब अमीरात के रक्षा मंत्रालय ने बताया कि देश की वायु रक्षा प्रणाली ने सोमवार को कई मिसाइल और ड्रोन हमलों को नाकाम कर दिया।

मंत्रालय के अनुसार, वायु रक्षा प्रणाली ने 12 बैलिस्टिक मिसाइल और 17 ड्रोन को इंटरसेप्ट किया, जबकि कुछ मिसाइल समुद्र में गिर गईं। आंकड़ों के अनुसार ईरान के हमले शुरू होने के बाद अब तक 253 बैलिस्टिक मिसाइल का पता लगाया गया, जिनमें से 233 को नष्ट कर दिया गया।

इसी अवधि में 1,440 ईरानी ड्रोन भी पकड़े गए, जिनमें से 1,359 को मार गिराया गया जबकि कुछ देश की सीमा के भीतर गिरे।

हमलों में विदेशी नागरिकों की मौत

इन हमलों के कारण मानवीय नुकसान भी सामने आया है। यूएई रक्षा मंत्रालय के मुताबिक इन हमलों में पाकिस्तान, नेपाल और बांग्लादेश के चार नागरिकों की मौत हो गई, जबकि 117 लोग मामूली रूप से घायल हुए।

घायलों में यूएई, मिस्र, सूडान, इथियोपिया, फिलीपींस, पाकिस्तान, भारत, बांग्लादेश, श्रीलंका, तुर्किये, जॉर्डन और अन्य देशों के नागरिक शामिल हैं।

खामेनेई की हत्या के बाद भड़का संकट

पश्चिम एशिया में यह तनाव 28 फरवरी 2026 को उस समय तेजी से बढ़ गया जब अमेरिका और इज़रायल के संयुक्त सैन्य हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई मारे गए। इस हमले में इस्लामिक गणराज्य के कई वरिष्ठ नेता भी मारे गए थे।

इसके जवाब में तेहरान ने क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों और इज़रायली संपत्तियों पर जवाबी हमले शुरू कर दिए, जिससे पूरे पश्चिम एशिया में युद्ध के और फैलने की आशंका गहरा गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द ही कूटनीतिक समाधान नहीं निकला तो यह टकराव पूरे क्षेत्र की सुरक्षा, ऊर्जा बाजार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर डाल सकता है।