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न्यूजीलैंड में गूंजेगी तीसरी कसम, वहीदा रहमान होंगी खास मेहमान

मुंबई।

भारतीय सिनेमा की यादगार फिल्मों में शामिल तीसरी कसम अब न्यूजीलैंड के दर्शकों के सामने एक नए रूप में पहुंचने जा रही है। महान अभिनेत्री वहीदा रहमान इस फिल्म की विशेष स्क्रीनिंग के साथ न्यूजीलैंड में होने वाले इंडियन फिल्म फेस्टिवल के उद्घाटन समारोह में शामिल होंगी।

इंडियन फिल्म फेस्टिवल ऑफ न्यूजीलैंड का पहला संस्करण 23 से 25 अक्टूबर 2026 तक आयोजित किया जाएगा। तीन दिनों तक चलने वाला यह फिल्म महोत्सव न्यूजीलैंड के तीन शहरों में भारतीय सिनेमा की विविधता पेश करेगा।

फेस्टिवल में कुल 30 फिल्मों की स्क्रीनिंग होगी। इनमें 10 फीचर फिल्में, 16 शॉर्ट फिल्में और चार विशेष स्क्रीनिंग शामिल हैं। आयोजन में फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े पैनल, फिल्मों की स्क्रीनिंग के बाद सवाल जवाब, नेटवर्किंग कार्यक्रम और पुरस्कार समारोह भी होंगे।

लेकिन इस पूरे आयोजन की सबसे बड़ी खासियत इसकी शुरुआत और समापन के लिए चुनी गई दो क्लासिक फिल्मों को माना जा रहा है। उद्घाटन फिल्म तीसरी कसम होगी, जबकि समापन पाकीजा से होगा।

वहीदा रहमान की मौजूदगी बनाएगी उद्घाटन को खास

तीसरी कसम की स्क्रीनिंग के मौके पर वहीदा रहमान की मौजूदगी फिल्म महोत्सव के उद्घाटन को खास बना देगी। फिल्म में वहीदा रहमान और राज कपूर ने मुख्य भूमिकाएं निभाई थीं।

तीसरी कसम को हाल ही में नेशनल फिल्म आर्काइव ऑफ इंडिया और एनएफडीसी ने संरक्षित और पुनर्स्थापित किया है। फिल्म की बहाली के बाद इसका बड़े पर्दे पर प्रदर्शन भारतीय सिनेमा की विरासत को नए दर्शकों तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

वहीदा रहमान ने कहा कि सिनेमा में लोगों और संस्कृतियों को करीब लाने की ताकत है। उन्होंने न्यूजीलैंड में भारतीय सिनेमा की विविधता को सामने लाने वाले इस आयोजन पर खुशी जताई।

उनके लिए तीसरी कसम खास फिल्म है। उन्होंने कहा कि वह इस बात से विशेष रूप से खुश हैं कि फिल्म से महोत्सव की शुरुआत हो रही है। इससे नई पीढ़ी के दर्शकों को इस कहानी और इसकी कविता से जुड़ने का अवसर मिलेगा।

तीसरी कसम क्यों है खास

1960 के दशक में बनी तीसरी कसम भारतीय सिनेमा की उन फिल्मों में गिनी जाती है, जिनकी लोकप्रियता समय बीतने के साथ कम नहीं हुई। फिल्म में राज कपूर ने हीरामन की भूमिका निभाई थी। वहीदा रहमान ने हीराबाई का किरदार निभाया था।

फिल्म की कहानी ग्रामीण भारत की पृष्ठभूमि में आगे बढ़ती है। इसमें एक साधारण गाड़ीवान और नौटंकी कलाकार के बीच विकसित होने वाले रिश्ते को संवेदनशील तरीके से पेश किया गया है।

फिल्म का आधार फणीश्वरनाथ रेणु की प्रसिद्ध कहानी मारे गए गुलफाम से जुड़ा है। कहानी में ग्रामीण जीवन, लोक संस्कृति, मानवीय भावनाएं और रिश्तों की जटिलता दिखाई देती है।

तीसरी कसम की खासियत केवल इसकी कहानी नहीं है। फिल्म का संगीत, संवाद, लोक रंग और शैलेन्द्र की संवेदनशील दृष्टि इसे भारतीय सिनेमा की महत्वपूर्ण कृतियों में शामिल करते हैं।

अब इसकी बहाल की गई प्रति न्यूजीलैंड के दर्शकों तक पहुंच रही है। ऐसे दर्शकों के लिए यह एक खास मौका होगा, जिन्होंने शायद भारतीय सिनेमा के इस दौर को बड़े पर्दे पर कभी नहीं देखा है।

30 फिल्मों के जरिए दिखेगा भारतीय सिनेमा

इंडियन फिल्म फेस्टिवल ऑफ न्यूजीलैंड केवल पुरानी फिल्मों तक सीमित नहीं रहेगा। महोत्सव में भारतीय सिनेमा के अलग अलग दौर और भाषाओं की फिल्में दिखाई जाएंगी।

आयोजकों के अनुसार, फेस्टिवल में 10 फीचर फिल्में और 16 शॉर्ट फिल्में शामिल हैं। इसके अलावा चार विशेष स्क्रीनिंग भी रखी गई हैं।

इस आयोजन की सबसे दिलचस्प बात भाषाई विविधता है। फेस्टिवल में भारत की अलग अलग भाषाओं में बनी फिल्मों को जगह दी गई है। इनमें गुजराती, बंगाली, मलयालम, तेलुगु, तमिल, कन्नड़, हिंदी, अंग्रेजी, नेपाली, कश्मीरी, पंजाबी और कुमाऊंनी जैसी भाषाएं शामिल हैं।

फेस्टिवल में एक साइलेंट फिल्म की स्क्रीनिंग भी होगी।

इससे साफ है कि आयोजक भारतीय सिनेमा को केवल हिंदी फिल्मों तक सीमित करके नहीं देख रहे हैं। भारत के अलग अलग क्षेत्रों की कहानियों और स्थानीय भाषाओं को भी अंतरराष्ट्रीय दर्शकों के सामने लाने की कोशिश की जा रही है।

पाकीजा से होगा फेस्टिवल का समापन

फेस्टिवल का उद्घाटन तीसरी कसम से होगा और समापन पाकीजा से किया जाएगा। मीना कुमारी की प्रमुख फिल्मों में शामिल पाकीजा को भी हाल ही में संरक्षण और पुनर्स्थापन का काम किया गया है।

फिल्म को फिल्म हेरिटेज फाउंडेशन ने बहाल किया है। फाउंडेशन के संस्थापक और निदेशक शिवेंद्र सिंह डूंगरपुर ने इसके संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

फेस्टिवल की निदेशक पेट्रीना डी रोजारियो के अनुसार, न्यूजीलैंड के दर्शकों के लिए पाकीजा की स्क्रीनिंग विशेष महत्व रखती है। उनके मुताबिक, यह फिल्म बहाली के बाद दुनिया के उन शुरुआती फिल्म महोत्सवों में दिखाई जा रही है, जिन्हें इसे देखने का अवसर मिल रहा है।

पाकीजा 1972 में रिलीज हुई थी। मीना कुमारी की अदाकारी और फिल्म का संगीत आज भी भारतीय सिनेमा के इतिहास में विशेष स्थान रखता है।

भारतीय फिल्म विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की कोशिश

फिल्मों का संरक्षण केवल पुरानी फिल्मों को सुरक्षित रखने का काम नहीं है। इसका उद्देश्य उन फिल्मों को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना भी है, जिनका भारतीय सिनेमा के विकास में बड़ा योगदान रहा है।

तीसरी कसम और पाकीजा जैसी फिल्मों की बहाली इसी दृष्टि से महत्वपूर्ण है। फिल्म की मूल गुणवत्ता को बचाने के बाद उन्हें बड़े पर्दे पर दोबारा दिखाया जा सकता है।

न्यूजीलैंड में इन फिल्मों की स्क्रीनिंग भारतीय फिल्म विरासत को अंतरराष्ट्रीय दर्शकों से जोड़ने का अवसर भी देगी।

खासकर युवा दर्शकों के लिए यह अनुभव अलग हो सकता है। आज की तेज रफ्तार डिजिटल दुनिया में पुरानी फिल्मों को बड़े पर्दे पर देखना अपने आप में एक अलग अनुभव है।

सिनेमा के साथ बातचीत और नेटवर्किंग भी

इंडियन फिल्म फेस्टिवल ऑफ न्यूजीलैंड का कार्यक्रम केवल फिल्मों की स्क्रीनिंग तक सीमित नहीं है। इसमें फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े पैनल और स्क्रीनिंग के बाद सवाल जवाब के कार्यक्रम भी होंगे।

दर्शकों को फिल्म निर्माताओं और सिनेमा से जुड़े लोगों के साथ बातचीत का अवसर मिलेगा। नेटवर्किंग कार्यक्रमों के जरिए फिल्म उद्योग से जुड़े लोगों के बीच संवाद की संभावना भी बनेगी।

इसके अलावा महोत्सव में पुरस्कार समारोह भी आयोजित किया जाएगा।

इस तरह आयोजन को भारतीय फिल्मों की स्क्रीनिंग के साथ साथ सिनेमा पर बातचीत का मंच बनाने की कोशिश की गई है।

न्यूजीलैंड में भारतीय सिनेमा की नई तस्वीर

भारतीय सिनेमा दुनिया के अलग अलग हिस्सों में देखा जाता है। इसकी लोकप्रियता केवल बॉलीवुड तक सीमित नहीं है। क्षेत्रीय सिनेमा और स्वतंत्र फिल्मों ने भी अंतरराष्ट्रीय दर्शकों के बीच अपनी जगह बनाई है।

न्यूजीलैंड में आयोजित यह फिल्म फेस्टिवल इसी व्यापक तस्वीर को सामने लाने की कोशिश करता दिखाई देता है।

एक तरफ तीसरी कसम जैसी कालजयी फिल्म है। दूसरी तरफ नई पीढ़ी के फिल्मकारों की शॉर्ट फिल्में और फीचर फिल्में हैं। इनके बीच भारतीय सिनेमा की कई भाषाएं और अलग अलग कहानी कहने की परंपराएं दिखाई देंगी।

वहीदा रहमान की मौजूदगी इस आयोजन को एक अतिरिक्त महत्व देती है। वह भारतीय सिनेमा के उस दौर की प्रतिनिधि हैं, जिसने अभिनय को नई संवेदनशीलता और गहराई दी।

अब उनकी चर्चित फिल्म तीसरी कसम न्यूजीलैंड के दर्शकों के सामने नए रूप में दिखाई जाएगी।

23 अक्टूबर से शुरू होने वाला यह तीन दिवसीय आयोजन 25 अक्टूबर तक चलेगा। भारतीय सिनेमा की पुरानी यादों, नई कहानियों और विविध भाषाओं को एक साथ देखने का यह अवसर न्यूजीलैंड में रहने वाले भारतीय समुदाय के साथ साथ स्थानीय सिनेमा प्रेमियों के लिए भी खास होगा।

और इस पूरे सफर की शुरुआत होगी तीसरी कसम से। वहीदा रहमान और राज कपूर की वह कहानी, जिसने दशकों पहले भारतीय दर्शकों का दिल छुआ था, अब एक नई पीढ़ी के सामने फिर से बड़े पर्दे पर होगी।