Culture

श्रीनगर में 31 जोड़ों का सामूहिक विवाह आयोजित, सामाजिक संस्था की अनूठी पहल

श्रीनगर रिपोर्टर

कश्मीर घाटी में बढ़ती महंगाई और शादी-ब्याह के भारी-भरकम खर्चों के बीच एक राहत भरी खबर सामने आई है। श्रीनगर में 31 जोड़े परिणय सूत्र में बंध गए। यह सामूहिक विवाह समारोह शहर की जानी-मानी संस्था अल नूर यतीम ट्रस्ट द्वारा आयोजित किया गया था। इस आयोजन का मकसद आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद परिवारों पर शादी के नाम पर पड़ने वाले वित्तीय बोझ को कम करना था।

समारोह में दूल्हा-दुल्हन के रिश्तेदार, स्थानीय लोग और समाज के गणमान्य व्यक्ति बड़ी संख्या में पहुंचे। सभी ने नवदंपतियों को आशीर्वाद दिया। इस्लामिक परंपराओं के तहत सादगी से निकाह की रस्में पूरी करवाई गईं। आयोजन स्थल पर माहौल काफी भावुक और खुशियों भरा रहा।

सामूहिक विवाह का मुख्य उद्देश्य और सामाजिक संदेश

कश्मीर में पिछले कुछ सालों में शादियों पर होने वाला फिजूलखर्च एक बड़ी सामाजिक चुनौती बन चुका है। कई गरीब परिवार अपनी बेटियों और बेटों की शादी के लिए कर्ज के जाल में फंस जाते हैं। ऐसे माहौल में अल नूर यतीम ट्रस्ट का यह प्रयास लोगों के लिए एक नई उम्मीद बनकर उभरा है।

  • आर्थिक राहत: 31 परिवारों को शादी के भारी खर्च से सीधी मुक्ति मिली।
  • सादगी को बढ़ावा: फिजूलखर्च छोड़कर सादे विवाह को सामाजिक मान्यता देना।
  • सहानुभूति और एकजुटता: जरूरतमंदों को यह अहसास कराना कि समाज उनके साथ खड़ा है।
  • आत्मसम्मान की रक्षा: बिना किसी मजबूरी या कर्ज के नए जीवन की शुरुआत।

ट्रस्ट के अध्यक्ष शबीर ने क्या कहा?

अल नूर यतीम ट्रस्ट के अध्यक्ष शबीर ने इस मौके पर मीडिया से बात करते हुए कहा कि शादी इंसान की जिंदगी का बहुत अहम फैसला होता है। लेकिन माली तंगी के कारण अक्सर गरीब परिवार अपने बच्चों की शादी तय समय पर नहीं कर पाते।

उन्होंने कहा कि हमारा मकसद यह पक्का करना है कि कोई भी नवविवाहित जोड़ा या उनका परिवार पैसों की कमी के कारण खुद को असहाय न समझे। आज सिर्फ 31 निकाह नहीं हुए हैं, बल्कि 31 परिवारों के घरों में चिराग जला है। हम समाज को यह संदेश देना चाहते हैं कि इंसानियत अभी जिंदा है।

शबीर ने यह भी बताया कि उनकी संस्था सिर्फ सामूहिक विवाह तक सीमित नहीं है। ट्रस्ट आने वाले समय में शिक्षा, स्वास्थ्य, यतीम बच्चों की देखरेख और शादी सहायता जैसी योजनाओं को और बड़े स्तर पर चलाने की तैयारी कर रहा है।

सामूहिक विवाह समारोह का विवरण

विवरणजानकारी
आयोजक संस्थाअल नूर यतीम ट्रस्ट
स्थानश्रीनगर, जम्मू और कश्मीर
लाभार्थी जोड़े31 जोड़े (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग)
रीति-रिवाजइस्लामिक परंपरा (सादा निकाह)
प्रमुख उद्देश्यदहेज प्रथा और शादी के फिजूलखर्च पर रोक

सादगी की ओर लौटता समाज

शादी में शामिल हुए दूल्हा-दुल्हन और उनके घरवाले इस पहल से काफी खुश नजर आए। परिजनों का कहना था कि अगर वे खुद शादी का इतंजाम करते तो उन्हें कई जगह से उधार लेना पड़ता। ट्रस्ट की मदद से शादी बिना किसी कर्ज और परेशानी के सम्मानजनक तरीके से संपन्न हो गई।

समारोह में आए स्थानीय समाजसेवियों और बुजुर्गों ने भी इस पहल की सराहना की। उनका मानना है कि घाटी में इस तरह के आयोजनों की बार-बार जरूरत है ताकि समाज में फैली खर्चीली रस्मों पर लगाम लगाई जा सके।

सहयोग की अपील

कार्यक्रम के आखिर में संस्था के अध्यक्ष शबीर ने आम जनता और दानदाताओं से आगे आने की अपील की। उन्होंने कहा कि कोई भी समाज अकेले सरकार या किसी एक संस्था के भरोसे नहीं बदल सकता। जब तक लोग आपस में एक-दूसरे का हाथ नहीं थामेंगे, तब तक गरीब और बेसहारा लोगों की समस्याएं खत्म नहीं होंगी।

समारोह का समापन नवविवाहित जोड़ों के सुखद और खुशहाल भविष्य की दुआओं के साथ हुआ। घाटी के लोगों को उम्मीद है कि श्रीनगर का यह आयोजन अन्य जिलों के लिए भी एक मिसाल बनेगा और आने वाले दिनों में और भी संस्थाएं इस तरह के सामाजिक कार्यों के लिए आगे आएंगी।