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आखिरी दौर में तीखी भिड़ंत: ममदानी बनाम कुओमो, न्यूयॉर्क मेयर की कुर्सी पर टिकी निगाहें

मुस्लिम नाउ ब्यूरो,न्यूयाॅर्क

न्यूयॉर्क में मेयर पद की जंग अपने चरम पर पहुँच गई है। शनिवार से शुरुआती मतदान शुरू हो गया है और पूरा शहर इस ऐतिहासिक चुनाव की चर्चा में डूबा है। डेमोक्रेटिक उम्मीदवार ज़ोहरान ममदानी ने अब तक के सभी सर्वेक्षणों में बढ़त बना रखी है। उनके सामने पूर्व गवर्नर एंड्रयू कुओमो हैं, जो इस बार स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में मैदान में हैं, और रिपब्लिकन उम्मीदवार कर्टिस स्लिवा भी मुकाबले में हैं। मौजूदा मेयर एरिक एडम्स पहले इस दौड़ में थे लेकिन पिछले महीने उन्होंने नाम वापस लेकर कुओमो का समर्थन किया।

अंतिम बहस में तीनों उम्मीदवारों के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। कुओमो और स्लिवा ने मिलकर ममदानी पर अनुभवहीनता, सवालों से बचने और इसराइल की आलोचना करने के आरोप लगाए। लेकिन ममदानी ने पलटवार करते हुए कुओमो को उन यौन उत्पीड़न के आरोपों की याद दिलाई, जिनके कारण उन्हें 2021 में गवर्नर पद से इस्तीफ़ा देना पड़ा था।

ममदानी, जो एक लोकतांत्रिक समाजवादी हैं, ने अपने अभियान को आम लोगों की ज़िंदगी से जोड़ा है। वे न्यूयॉर्क में मुफ्त बस सेवा, सार्वभौमिक निशुल्क बाल देखभाल और किराए पर नियंत्रण जैसे कदमों का वादा कर रहे हैं। उनका कहना है कि “शहर को अमीरों के लिए नहीं, बल्कि मेहनतकश न्यूयॉर्कवासियों के लिए सुलभ बनाना होगा।”

इस चुनाव का एक और पहलू धर्म और पहचान की राजनीति भी रहा है। ममदानी शहर के पहले मुस्लिम मेयर बन सकते हैं। उनके इसराइल और गाज़ा पर बयानों को लेकर विरोधियों ने उन्हें निशाना बनाया है, लेकिन उन्होंने कहा है कि उनकी आलोचना “जातिवादी और बेबुनियाद” है। ममदानी का कहना है कि “न्यूयॉर्क में मुस्लिम होना अक्सर अपमान झेलना है, लेकिन यही हमें मजबूत बनाता है।”

कुओमो ने अपने अनुभव और प्रशासनिक क्षमता को मुख्य मुद्दा बनाया है, जबकि स्लिवा कानून-व्यवस्था को लेकर प्रचार कर रहे हैं। वहीं, विश्लेषकों का मानना है कि यह चुनाव न केवल न्यूयॉर्क की दिशा तय करेगा, बल्कि पूरे देश की राजनीति को भी प्रभावित कर सकता है। affordability यानी जीवन की लागत, आवास और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दे इस चुनाव के केंद्र में हैं।

न्यूयॉर्क में 2019 से शुरुआती मतदान की व्यवस्था है और हर साल इसकी लोकप्रियता बढ़ रही है। इस बार भी बड़ी संख्या में लोग पहले ही वोट डाल रहे हैं। अब देखना यह है कि क्या ज़ोहरान ममदानी अपनी बढ़त को जीत में बदल पाते हैं या एंड्रयू कुओमो एक बार फिर वापसी करते हैं।