महाशक्ति का महासंकट: खामेनेई की मौत और ईरान पर हमलों से कांपी दुनिया, जानें किस देश ने क्या कहा
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मुस्लिम नाउ ब्यूरो,ब्रसेल्स/तेहरान:
1 मार्च 2026 की सुबह दुनिया के लिए एक अनिश्चित भविष्य लेकर आई है। ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई की कथित मृत्यु और अमेरिका-इजरायल के भीषण हवाई हमलों ने पूरी मानवता को एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध के मुहाने पर खड़ा कर दिया है। शनिवार से शुरू हुए इस घटनाक्रम पर दुनिया भर के नेताओं ने बेहद सधे हुए, लेकिन चिंताजनक बयान जारी किए हैं।
सबसे बड़ा सवाल जो आज हर ज़ुबान पर है— “यह संघर्ष कब तक चलेगा और क्या यह तीसरे विश्व युद्ध का रूप ले लेगा?”
डोनाल्ड ट्रम्प और नेतन्याहू का कड़ा रुख
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर इस घटना को ऐतिहासिक बताया। उन्होंने खामेनेई की मौत की पुष्टि करते हुए कहा, “यह ईरानी जनता के लिए अपने देश को वापस पाने का सबसे बड़ा और इकलौता मौका है।” ट्रम्प ने स्पष्ट संकेत दिया कि अमेरिका अब ईरान में सत्ता परिवर्तन (Regime Change) के पक्ष में है।
वहीं, इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक टेलीविजन संबोधन में कहा कि खामेनेई के परिसर पर किए गए सटीक हमलों में उनके मारे जाने के “पुख्ता संकेत” मिले हैं। उन्होंने इसे “आतंक के युग का अंत” करार दिया।
यूरोपीय शक्तियों की संतुलित प्रतिक्रिया
ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर, फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ ने एक संयुक्त बयान जारी कर दोनों पक्षों से बातचीत की मेज पर लौटने की अपील की।
- जर्मनी और फ्रांस का रुख: चांसलर मर्ज़ और राष्ट्रपति मैक्रों ने स्पष्ट किया कि उनके देश इन हमलों में शामिल नहीं थे, लेकिन वे अमेरिका और इजरायल के साथ निरंतर संपर्क में हैं। उन्होंने ईरान द्वारा अरब देशों पर किए गए पलटवार की कड़ी निंदा की।
- मैक्रों की चेतावनी: एक आपातकालीन सुरक्षा बैठक में मैक्रों ने कहा, “कोई यह न सोचे कि परमाणु कार्यक्रम या क्षेत्रीय अस्थिरता जैसे मुद्दे केवल हमलों से हल हो जाएंगे। कूटनीति ही एकमात्र रास्ता है।”
अरब जगत में खलबली: अपनों ने ही मोड़ा मुंह
इस युद्ध में सबसे चौंकाने वाला रुख उन अरब देशों का रहा है, जो कभी ईरान के करीब हुआ करते थे।
- सीरिया का बदला मिजाज: बशर अल-असद के बाद बनी सीरिया की नई सरकार ने सीधे तौर पर ईरान की निंदा की है। यह सीरिया द्वारा अमेरिका और क्षेत्रीय आर्थिक शक्तियों (सऊदी अरब, यूएई) के साथ संबंध सुधारने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
- सऊदी अरब और ओमान: सऊदी अरब ने ईरानी हमलों को “क्षेत्रीय संप्रभुता का उल्लंघन” बताया। वहीं, ओमान जो हमेशा अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ रहा है, उसने अमेरिकी कार्रवाई को “अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन” और “रक्तपात बढ़ाने वाला कदम” बताया।
- अरब लीग: 22 देशों के इस समूह ने ईरान की निंदा करते हुए इसे शांति चाहने वाले देशों की संप्रभुता पर हमला बताया।
रूस और चीन: अमेरिका पर सीधा हमला
जहाँ पश्चिमी देश संतुलित भाषा का प्रयोग कर रहे हैं, वहीं रूस और चीन ने अमेरिका और इजरायल की खुलकर आलोचना की है।
- रूस: रूसी विदेश मंत्रालय ने इसे “एक संप्रभु देश के खिलाफ पूर्व-नियोजित और अकारण सैन्य आक्रामकता” करार दिया। रूस ने आरोप लगाया कि वाशिंगटन और तेल अवीव परमाणु कार्यक्रम का बहाना बनाकर सत्ता परिवर्तन का खूनी खेल खेल रहे हैं।
- चीन: चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा कि वह इन हमलों से “बेहद चिंतित” है। चीन ने ईरान की सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने की मांग की और तत्काल युद्ध रोकने को कहा।
कनाडा और ऑस्ट्रेलिया: अमेरिका के ‘कंधे से कंधा’
तनाव के बावजूद कनाडा और ऑस्ट्रेलिया ने अमेरिकी कार्रवाई का खुला समर्थन किया है। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कहा, “ईरानी शासन मध्य-पूर्व में अस्थिरता और आतंक का मुख्य स्रोत है।” ऑस्ट्रेलिया ने भी माना कि यह हमला क्षेत्र को एक दीर्घकालिक खतरे से बचाने के लिए आवश्यक था।
फिलिस्तीन: डर के बीच सामान्य जीवन की कोशिश
कब्जे वाले वेस्ट बैंक (West Bank) में स्थिति अजीबोगरीब है। जहाँ इजरायल में सायरन बज रहे हैं और लोग बंकरों में छिपे हैं, वहीं रामल्लाह की सड़कों पर लोग रमजान की मिठाइयां और मांस खरीदते देखे गए। हालांकि, इजरायल द्वारा चेकपॉइंट बंद करने के बाद गैस स्टेशनों पर लंबी कतारें लग गई हैं, क्योंकि लोगों को डर है कि आने वाले दिनों में रसद की भारी कमी हो सकती है। फिलिस्तीनी अथॉरिटी ने अरब देशों पर ईरानी हमलों की निंदा की, लेकिन अमेरिका-इजरायल के हमलों पर चुप्पी साधे रखी।
परमाणु युद्ध का मंडराता खतरा
नोबेल शांति पुरस्कार विजेता संगठन ICAN (International Campaign to Abolish Nuclear Weapons) ने चेतावनी दी है कि ये हमले परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की संभावना को बढ़ा रहे हैं। संगठन की कार्यकारी निदेशक मेलिसा पार्क ने इसे “पूरी तरह गैर-जिम्मेदाराना” बताया।
निष्कर्ष: क्या होगा अगला कदम?
ईरान में खामेनेई का कोई घोषित उत्तराधिकारी नहीं है, जिससे देश के भीतर गृहयुद्ध जैसी स्थिति पैदा हो सकती है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने फ्रांस और बहरीन के अनुरोध पर एक आपातकालीन बैठक बुलाई है।
दुनिया अब दो धड़ों में बंट चुकी है— एक तरफ वे जो इसे ईरान की तानाशाही से मुक्ति मान रहे हैं, और दूसरी तरफ वे जो इसे एक अंतहीन युद्ध की शुरुआत समझ रहे हैं।
अगला कदम: क्या आप इस युद्ध के कारण वैश्विक शेयर बाजार और कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों पर पड़ने वाले असर के बारे में जानना चाहेंगे? या आप खामेनेई के बाद ईरान के संभावित नेतृत्व (Succession) पर रिपोर्ट चाहते हैं?

