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खामेनेई की मौत के बाद ईरान का भीषण पलटवार; दुबई, अबू धाबी समेत खाड़ी देशों में भारी तबाही और खलबली

मुस्लिम नाउ ब्यूरो, दुबई-अबू धाबी

मध्य पूर्व (मिडल ईस्ट) इस समय इतिहास के सबसे भीषण सैन्य संकट से गुजर रहा है। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमले में मौत के बाद पूरे क्षेत्र में युद्ध की ज्वाला भड़क उठी है। ईरान ने अपने ‘सुप्रीम लीडर’ का बदला लेने के लिए ‘ऑपरेशन प्रतिशोध’ शुरू करते हुए संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कतर, बहरीन और ओमान जैसे खाड़ी देशों पर मिसाइलों और ड्रोन्स की बारिश कर दी है। इन हमलों ने न केवल दुबई और अबू धाबी जैसे सुरक्षित माने जाने वाले शहरों में खलबली मचा दी है, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और विमानन क्षेत्र को भी घुटनों पर ला दिया है।

UAE पर भीषण हमला: दुबई और अबू धाबी में दहशत का माहौल

ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने घोषणा की है कि उन्होंने अमेरिका और इजरायल को सहयोग देने वाले क्षेत्रों को निशाना बनाया है। यूएई रक्षा मंत्रालय के अनुसार, ईरानी सेना ने अब तक 137 बैलिस्टिक मिसाइलें और 209 ड्रोन यूएई की सीमा की ओर दागे हैं।

यद्यपि यूएई की उन्नत वायु रक्षा प्रणालियों (Air Defence Systems) ने इनमें से 132 मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया, लेकिन गिरते हुए मलबे और कुछ सीधे प्रहारों ने भारी नुकसान पहुँचाया है।

  • अबू धाबी में जान-माल की हानि: जायद इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास हुए ड्रोन हमले के मलबे की चपेट में आने से एक पाकिस्तानी नागरिक की मौत हो गई और सात अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। अबू धाबी एयरपोर्ट पर हुए इस हमले ने सुरक्षा तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
  • दुबई में तबाही: दुबई के रिहायशी इलाकों में भी खलबली मची हुई है। आधिकारिक रिपोर्टों के अनुसार, इंटरसेप्ट किए गए ड्रोन्स का मलबा दुबई के दो घरों के आंगन में गिरा, जिससे दो लोग घायल हो गए। इसके अलावा, दुबई के प्रतिष्ठित स्थलों बुर्ज अल अरब और पाम जुमेराह के पास भी मामूली आग लगने की खबरें आईं, जिन्हें नागरिक सुरक्षा टीमों ने नियंत्रित किया।
  • दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट: यहाँ चार लोग घायल हुए हैं और उड़ानों का संचालन पूरी तरह ठप हो गया है।

क्षेत्रीय विस्तार: कतर, बहरीन और ओमान भी निशाने पर

ईरान का गुस्सा केवल यूएई तक सीमित नहीं है। अमेरिकी सैन्य अड्डों की मेजबानी करने वाले अन्य देशों को भी भीषण परिणाम भुगतने पड़ रहे हैं:

  1. कतर: कतर के रक्षा मंत्रालय ने पुष्टि की है कि उन्होंने ईरानी मिसाइलों की कई लहरों को इंटरसेप्ट किया है। हालांकि, इंडस्ट्रियल एरिया में मिसाइल के मलबे से आग लग गई। कतर में अब तक 16 लोग घायल हो चुके हैं। कतर एयरवेज ने अपना परिचालन अनिश्चित काल के लिए बंद कर दिया है।
  2. बहरीन: बहरीन के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को सीधे तौर पर ड्रोन हमले का निशाना बनाया गया। बहरीन डिफेंस फोर्स ने 45 मिसाइलों और 9 ड्रोन्स को मार गिराने का दावा किया है। हवाई अड्डे के टर्मिनल को खाली करा लिया गया है और वहाँ मामूली ढांचागत क्षति हुई है।
  3. ओमान: ओमान का दुक्म (Duqm) पोर्ट भी ईरानी ड्रोन्स की चपेट में आया, जहाँ एक विदेशी कर्मचारी घायल हो गया।

ईरान में सत्ता का अंत: खामेनेई समेत शीर्ष नेतृत्व खत्म

इस पूरे संकट की जड़ शनिवार सुबह ईरान पर हुए अमेरिका और इजरायल के विनाशकारी हवाई हमले हैं। ईरानी सरकारी मीडिया ने पुष्टि की है कि सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई अपने कार्यालय में मारे गए। उनके साथ आईआरजीसी के प्रमुख, रक्षा मंत्री जनरल अजीज नसीरजादा और सेना प्रमुख जनरल अब्दुल रहीम मौसवी समेत लगभग 40 उच्च पदस्थ अधिकारी भी मारे गए हैं।

ईरान में इस समय 40 दिनों के शोक की घोषणा की गई है और 7 दिनों की सार्वजनिक छुट्टी दी गई है। राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन की अध्यक्षता में एक अंतरिम परिषद का गठन किया गया है, जो नए नेता के चुनाव तक देश की कमान संभालेगी। ईरान के भीतर अब तक इन हमलों में 201 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें एक लड़कियों के स्कूल पर हुई बमबारी में मारी गई 108 छात्राएं भी शामिल हैं।

विमानन क्षेत्र में कोहराम: हजारों यात्री फंसे

युद्ध के कारण पूरे मध्य पूर्व का हवाई क्षेत्र (Airspace) युद्ध के मैदान में बदल गया है।

  • अमीरात (Emirates) और एतिहाद (Etihad): दुबई और अबू धाबी की प्रमुख एयरलाइनों ने सोमवार दोपहर तक अपनी सभी उड़ानें रद्द कर दी हैं। लगभग 20,200 यात्री इस फैसले से प्रभावित हुए हैं।
  • भारतीय एयरलाइंस: एयर इंडिया, इंडिगो और स्पाइसजेट ने दुबई, लंदन और यूरोप जाने वाली अपनी सभी उड़ानें रद्द या डाइवर्ट कर दी हैं। एयर इंडिया ने दिल्ली से लंदन और फ्रैंकफर्ट जैसी प्रमुख सेवाओं को भी रोक दिया है।
  • उड़ान मार्ग: सुरक्षा कारणों से अब विमानों को मध्य पूर्व के ऊपर से उड़ान भरने की अनुमति नहीं दी जा रही है, जिससे यात्रा का समय और किराया दोनों बढ़ने की संभावना है।

आम जनजीवन पर प्रभाव और कूटनीतिक हलचल

यूएई सरकार ने नागरिकों की सुरक्षा के लिए कड़े कदम उठाए हैं:

  • शिक्षा: 2 से 4 मार्च तक सभी स्कूलों और विश्वविद्यालयों को ‘डिस्टेंस लर्निंग’ (ऑनलाइन पढ़ाई) पर स्थानांतरित कर दिया गया है।
  • बाजार: यूएई के आर्थिक मंत्रालय ने आश्वासन दिया है कि देश में रणनीतिक भंडार पर्याप्त है और लोगों को सामान जमा करने की आवश्यकता नहीं है।
  • चेतावनी: अधिकारियों ने जनता को मलबे के पास न जाने और सोशल मीडिया पर अफवाहें न फैलाने की सख्त हिदायत दी है।

यूएई के राष्ट्रपति के राजनयिक सलाहकार डॉ. अनवर गर्गाश ने कहा कि यह स्थिति ईरान के परमाणु मुद्दे को सुलझाने में विफलता और बार-बार होने वाले संकटों का परिणाम है। उन्होंने कहा कि यूएई ने टकराव से बचने की हर संभव कोशिश की थी, लेकिन अब संप्रभुता की रक्षा सर्वोपरि है।

डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनी और वैश्विक प्रतिक्रिया

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए ‘ट्रुथ सोशल’ पर लिखा, “ईरान ने कहा है कि वे आज बहुत जोर से हमला करने जा रहे हैं। वे ऐसा न करें तो बेहतर है, क्योंकि अगर उन्होंने ऐसा किया, तो हम उन पर ऐसी ताकत से हमला करेंगे जो पहले कभी नहीं देखी गई!”

दूसरी ओर, रूस के अनुरोध पर संयुक्त राष्ट्र की परमाणु एजेंसी (IAEA) सोमवार को एक असाधारण बैठक करने जा रही है, क्योंकि इजरायल-अमेरिका के हमलों में ईरान के परमाणु केंद्रों को भी निशाना बनाए जाने की खबरें हैं।

निष्कर्ष: आगे क्या?

ईरानी मिसाइल हमलों ने दुबई और अबू धाबी जैसे व्यापारिक केंद्रों की सुरक्षा को बड़ी चुनौती दी है। अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हमले में सहयोग का असर यूएई पर अब दूरगामी होने वाला है। क्षेत्रीय विश्लेषकों का मानना है कि यदि ईरान ने अपनी ‘विध्वंसक आक्रामक कार्रवाई’ जारी रखी, तो पूरा खाड़ी क्षेत्र एक अंतहीन युद्ध की आग में झुलस सकता है।

फिलहाल, दुनिया की नजरें ईरान के अगले कदम और अमेरिका की संभावित जवाबी कार्रवाई पर टिकी हैं। क्या कूटनीति इस आग को बुझा पाएगी या यह 2026 का साल वैश्विक मानचित्र को हमेशा के लिए बदल देगा?

न्यूज सोर्स: अल-जजीरा एवं गल्फ न्यूज