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जुड़वां भाइयों की मिसाल: IIT बॉम्बे छोड़ चुना साथ

विशेष संवाददाता

प्रतिस्पर्धा के इस दौर में जहां लोग आगे बढ़ने के लिए हर अवसर को पकड़ लेना चाहते हैं, वहीं ओडिशा के दो जुड़वां भाइयों ने सफलता के बीच भाईचारे और रिश्तों की ऐसी मिसाल पेश की है, जिसने पूरे देश का दिल जीत लिया है। JEE Advanced 2026 में शानदार प्रदर्शन करने वाले महरूफ और मसरूर आज लाखों छात्रों के लिए प्रेरणा बन गए हैं।

ओडिशा के रहने वाले इन जुड़वां भाइयों ने न केवल देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक JEE Advanced को शानदार रैंक के साथ पास किया, बल्कि यह भी दिखाया कि जीवन में उपलब्धियां केवल व्यक्तिगत सफलता से नहीं, बल्कि अपनों के साथ आगे बढ़ने से भी बड़ी बनती हैं।

महरूफ ने JEE Advanced 2026 में ऑल इंडिया रैंक (AIR) 32 हासिल की, जबकि उनके जुड़वां भाई मसरूर ने AIR 169 प्राप्त की। इतनी शानदार रैंक के बाद महरूफ के लिए IIT बॉम्बे में कंप्यूटर साइंस की सीट लगभग तय थी। लेकिन उन्होंने ऐसा फैसला लिया, जिसकी आज हर तरफ चर्चा हो रही है।

उन्होंने IIT बॉम्बे की प्रतिष्ठित सीट छोड़कर IIT मद्रास को चुना, ताकि वह अपने भाई मसरूर के साथ पढ़ाई जारी रख सकें।

तीन साल की मेहनत ने बदली जिंदगी

इस सफलता के पीछे वर्षों का संघर्ष और अनुशासित जीवन छिपा है। दोनों भाई पिछले तीन वर्षों से राजस्थान के कोटा में रहकर IIT-JEE की तैयारी कर रहे थे। देशभर के लाखों छात्र जिस शहर में अपने सपनों को आकार देने आते हैं, वहीं महरूफ और मसरूर ने भी अपनी मंजिल तय की।

कोटा में बिताए गए वर्षों के दौरान दोनों भाइयों ने एक बेहद व्यवस्थित दिनचर्या का पालन किया। सुबह से लेकर रात तक उनका पूरा समय पढ़ाई, प्रैक्टिस टेस्ट, डाउट क्लियरिंग और सेल्फ स्टडी में बीतता था।

महरूफ बताते हैं कि कोचिंग संस्थान में प्रतिदिन लगभग पांच घंटे की पढ़ाई होती थी। इसके बाद दोनों भाई करीब एक घंटे तक शिक्षकों के साथ अपने सवालों और शंकाओं का समाधान करते थे। घर लौटने के बाद वे छह घंटे तक स्व-अध्ययन करते थे।

मानसिक संतुलन बनाए रखने के लिए दोनों रोजाना एक घंटा बैडमिंटन भी खेलते थे। पढ़ाई के दबाव के बावजूद उन्होंने पर्याप्त नींद और संतुलित जीवनशैली को कभी नजरअंदाज नहीं किया।

भाईचारा बना सबसे बड़ी ताकत

JEE जैसी कठिन परीक्षा में अक्सर छात्र अकेले संघर्ष करते हैं, लेकिन महरूफ और मसरूर की सफलता की सबसे बड़ी वजह उनका आपसी सहयोग रहा।

दोनों भाइयों के बीच हमेशा स्वस्थ प्रतिस्पर्धा रही। यदि किसी विषय में एक भाई कमजोर होता था तो दूसरा उसकी मदद करता था। किसी टेस्ट में कम अंक आने पर दोनों एक-दूसरे का मनोबल बढ़ाते थे।

महरूफ कहते हैं कि उन्होंने कभी एक-दूसरे को प्रतिद्वंद्वी नहीं माना। उनका लक्ष्य हमेशा साथ में बेहतर प्रदर्शन करना था। दोनों एक-दूसरे के डाउट्स सुलझाते थे और जरूरत पड़ने पर शिक्षकों से मार्गदर्शन लेते थे।

यही टीमवर्क आज उनकी सबसे बड़ी ताकत बन गया।

IIT बॉम्बे से बड़ा निकला भाई का साथ

देश के अधिकांश टॉप रैंकर्स का सपना IIT बॉम्बे में कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई करना होता है। यही वजह है कि महरूफ का फैसला लोगों को हैरान भी कर रहा है और भावुक भी।

AIR 32 हासिल करने के बाद उनके पास IIT बॉम्बे में प्रवेश का सुनहरा अवसर था। लेकिन उन्होंने अपने करियर के सबसे महत्वपूर्ण मोड़ पर भाई को प्राथमिकता दी।

महरूफ का कहना है कि वे हमेशा से साथ पढ़ते आए हैं और आगे भी यही चाहते हैं। उनका मानना है कि दोनों एक-दूसरे की ताकत हैं और साथ रहने से वे बेहतर प्रदर्शन कर पाएंगे।

दूसरी ओर, मसरूर अपने भाई के इस फैसले से बेहद भावुक हैं। उनका कहना है कि बड़े भाई का साथ उनके लिए किसी भी उपलब्धि से कम नहीं है।

अब दोनों भाइयों ने IIT मद्रास में कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग में दाखिला लेने का निर्णय लिया है।

डॉक्टर माता-पिता का बड़ा योगदान

महरूफ और मसरूर की सफलता के पीछे उनके माता-पिता की भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण रही है।

उनके पिता डॉ. मंसूर अहमद खान मेडिसिन में एमडी हैं और IIT भुवनेश्वर की डिस्पेंसरी के प्रभारी हैं। वहीं उनकी मां डॉ. ज़ीनत बेगम स्त्री रोग विशेषज्ञ हैं और सरकारी अस्पताल में सेवाएं दे चुकी हैं।

बच्चों की पढ़ाई और सपनों को प्राथमिकता देने के लिए डॉ. ज़ीनत बेगम ने अपनी नौकरी छोड़ दी और कोटा जाकर उनके साथ रहने का फैसला किया। यह निर्णय आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने अपने बेटों के भविष्य के लिए हर संभव त्याग किया।

आज जब दोनों बेटों ने देश की प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग परीक्षा में शीर्ष रैंक हासिल की है, तब परिवार का यह संघर्ष सफल होता दिखाई दे रहा है।

नौवीं कक्षा में तय कर लिया था लक्ष्य

दिलचस्प बात यह है कि दोनों भाइयों ने बहुत कम उम्र में ही अपना करियर लक्ष्य तय कर लिया था।

महरूफ और मसरूर बताते हैं कि नौवीं कक्षा के दौरान उनकी रुचि गणित और समस्या समाधान में बढ़ने लगी थी। उसी समय उन्होंने इंजीनियरिंग और IIT में जाने का सपना देखा।

जब उनके पिता ने भविष्य की योजनाओं के बारे में पूछा, तब दोनों ने स्पष्ट रूप से कहा कि वे IIT में प्रवेश लेना चाहते हैं और इसके लिए कोटा जाकर तैयारी करना चाहते हैं।

परिवार ने उनके फैसले का समर्थन किया और पूरी ताकत से उनके साथ खड़ा रहा।

शानदार शैक्षणिक रिकॉर्ड

दोनों भाइयों का शैक्षणिक रिकॉर्ड भी उनकी प्रतिभा की कहानी कहता है।

महरूफ ने JEE Main में AIR 44 और JEE Advanced में AIR 32 हासिल की। उन्होंने दसवीं कक्षा में 95.20 प्रतिशत और बारहवीं में 98.6 प्रतिशत अंक प्राप्त किए।

वहीं मसरूर ने JEE Main में AIR 58 और JEE Advanced में AIR 169 हासिल की। उन्होंने दसवीं में 97.6 प्रतिशत और बारहवीं में 94.6 प्रतिशत अंक प्राप्त किए।

इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि दोनों ने लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है।

IIT के बाद सिविल सेवा का सपना

हालांकि फिलहाल दोनों भाइयों का ध्यान IIT मद्रास में कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई पर है, लेकिन उनका अंतिम लक्ष्य इससे भी आगे का है।

मसरूर बताते हैं कि BTech पूरा करने के बाद दोनों सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करना चाहते हैं। उनका सपना देश की प्रशासनिक सेवाओं में योगदान देना है।

तकनीकी शिक्षा और प्रशासनिक सेवा का यह अनूठा संयोजन उनके व्यापक दृष्टिकोण को दर्शाता है।

युवाओं के लिए प्रेरणा

महरूफ और मसरूर की कहानी केवल JEE टॉपर्स की कहानी नहीं है। यह अनुशासन, मेहनत, पारिवारिक समर्थन और भाईचारे की मिसाल है।

आज जब सफलता की दौड़ में रिश्ते अक्सर पीछे छूट जाते हैं, तब इन दोनों भाइयों ने दिखाया है कि उपलब्धियां साझा करने से और बड़ी हो जाती हैं।

IIT बॉम्बे जैसी प्रतिष्ठित सीट छोड़कर भाई के साथ IIT मद्रास जाने का फैसला केवल एक शैक्षणिक निर्णय नहीं, बल्कि जीवन मूल्यों का संदेश भी है।

यही कारण है कि आज महरूफ और मसरूर की कहानी देशभर के छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। उनकी सफलता यह साबित करती है कि जब मेहनत, परिवार और आपसी विश्वास साथ हों, तो कोई भी सपना असंभव नहीं रहता।

AEO (Answer Engine Optimization) FAQs

Q. महरूफ और मसरूर कौन हैं?
ओडिशा के जुड़वां भाई जिन्होंने JEE Advanced 2026 में AIR 32 और AIR 169 हासिल की है।

Q. महरूफ ने IIT बॉम्बे क्यों छोड़ा?
उन्होंने अपने भाई मसरूर के साथ पढ़ाई जारी रखने के लिए IIT मद्रास चुनने का फैसला किया।

Q. दोनों भाई किस शाखा में पढ़ाई करेंगे?
दोनों IIT मद्रास में कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग (CSE) में BTech करने की योजना बना रहे हैं।

Q. दोनों की सफलता का मुख्य कारण क्या रहा?
अनुशासित दिनचर्या, लगातार सेल्फ स्टडी, शिक्षकों का मार्गदर्शन और आपसी सहयोग।

Q. IIT के बाद उनका लक्ष्य क्या है?
दोनों भाई भविष्य में सिविल सेवा (UPSC) की तैयारी करना चाहते हैं।

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