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दुनिया जंग से परेशान, बांग्लादेश में मचा है खसरे से कोहराम

दुनिया इस समय इजरायल-अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव से जूझ रही है, लेकिन दक्षिण एशिया के मुस्लिम बहुल देश बांग्लादेश के सामने एक अलग ही गंभीर संकट खड़ा हो गया है। यह संकट है खसरे (मीजल्स) का, जो लगातार बच्चों को अपनी चपेट में ले रहा है। हैरानी की बात यह है कि टीकाकरण अभियान तेज होने के बावजूद संक्रमण रुकने का नाम नहीं ले रहा।

हाल ही में सामने आए एक अध्ययन ने स्थिति की भयावहता को और स्पष्ट कर दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, बांग्लादेश में आज भी लगभग 11 प्रतिशत बच्चे खसरे से संक्रमित पाए जा रहे हैं। यह आंकड़ा न केवल स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए चुनौती है, बल्कि टीकाकरण कार्यक्रम की प्रभावशीलता पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।

टीकाकरण के बावजूद संक्रमण: क्यों बढ़ रही चिंता?

देश में खसरे के बढ़ते मामलों ने विशेषज्ञों और सरकार दोनों को चिंतित कर दिया है। आमतौर पर यह माना जाता है कि खसरे की दो खुराक लेने के बाद बच्चों में संक्रमण का खतरा बेहद कम हो जाता है। लेकिन बांग्लादेश में तस्वीर इससे अलग नजर आ रही है।

स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय के अंतर्गत राष्ट्रीय ईपीआई (Expanded Programme on Immunization) निगरानी द्वारा किए गए एक सर्वेक्षण में पाया गया कि खसरे के संदिग्ध 2,310 बच्चों में से:

  • 54.7% बच्चों को कोई टीका नहीं लगा था
  • 22% बच्चों को पहली खुराक लेने के बाद भी संक्रमण हुआ
  • 23.2% बच्चों को दोनों खुराक लेने के बावजूद खसरा हुआ

ये आंकड़े साफ संकेत देते हैं कि समस्या केवल टीकाकरण की कमी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे और भी जटिल कारण हो सकते हैं।

छोटे बच्चों पर सबसे बड़ा खतरा

रिपोर्ट के अनुसार, सबसे ज्यादा चिंता 9 महीने से कम उम्र के बच्चों को लेकर है। यह वही आयु वर्ग है, जिसे सामान्यतः टीकाकरण से पहले मां की रोग प्रतिरोधक क्षमता (मातृ इम्युनिटी) से सुरक्षा मिलती है। लेकिन अब यह सुरक्षा भी कमजोर पड़ती दिखाई दे रही है।

पिछले वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो:

  • 2023 में 6% बच्चे 9 महीने से पहले संक्रमित हुए
  • 2024 में यह आंकड़ा 15% तक पहुंच गया
  • 2025 में 11% रहा
  • जबकि 2026 में यह अचानक बढ़कर 33% हो गया

यह वृद्धि इस बात का संकेत है कि मातृ प्रतिरक्षा अब बच्चों को पर्याप्त सुरक्षा नहीं दे पा रही है।

टीकाकरण कवरेज पर उठे सवाल

विशेषज्ञों का मानना है कि समस्या का एक बड़ा कारण टीकाकरण आंकड़ों में गड़बड़ी भी हो सकता है। बीएमयू सुपर स्पेशलाइज्ड हॉस्पिटल के निदेशक प्रोफेसर डॉ. सैफ उल्लाह मुंशी ने इस पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि कुछ जिलों में 150% तक टीकाकरण कवरेज दिखाया जा रहा है, जो पूरी तरह अवास्तविक है।

इसका मतलब है कि या तो डेटा सही तरीके से संकलित नहीं किया जा रहा या फिर वास्तविक स्थिति को समझने में चूक हो रही है। ऐसे में नीति निर्माण और रणनीति दोनों प्रभावित हो रहे हैं।

विशेषज्ञों की राय: केवल टीका पर्याप्त नहीं

ढाका मेडिकल कॉलेज की पूर्व विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. लुत्फुन्नेसा के अनुसार, खसरा एक बेहद संक्रामक और खतरनाक बीमारी है, जो बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर कर देती है। उन्होंने विटामिन ए की कमी को भी एक बड़ा कारण बताया।

उनका कहना है कि अस्पतालों में अलग आइसोलेशन व्यवस्था न होने के कारण एक संक्रमित बच्चा कई अन्य बच्चों को भी संक्रमित कर रहा है। इसलिए स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार बेहद जरूरी है।

मातृ प्रतिरक्षा पर नए सवाल

बांग्लादेश मेडिकल यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रोफेसर डॉ. एफएम सिद्दीकी ने एक अहम मुद्दा उठाया है। उन्होंने कहा कि पहले यह माना जाता था कि 6 महीने तक के बच्चों को खसरा नहीं होता, क्योंकि मां की प्रतिरक्षा उन्हें बचाती है। लेकिन अब ऐसा नहीं हो रहा।

उन्होंने सुझाव दिया कि किशोरियों को विवाह से पहले बूस्टर डोज देने पर विचार किया जाना चाहिए, ताकि माताओं की प्रतिरक्षा मजबूत हो और वह बच्चों को बेहतर सुरक्षा दे सकें।

मौत के आंकड़े बढ़ा रहे डर

खसरे का प्रकोप अब केवल संक्रमण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह जानलेवा भी साबित हो रहा है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार:

  • 15 मार्च के बाद से 28 बच्चों की मौत खसरे से हो चुकी है
  • 151 अन्य बच्चों की मौत खसरे जैसे लक्षणों के कारण हुई
  • यानी कुल 179 बच्चों की मौत एक महीने के भीतर हुई

ये आंकड़े इस बीमारी की गंभीरता को दर्शाने के लिए पर्याप्त हैं।

देशभर में तेजी से फैल रहा संक्रमण

देश में अब तक:

  • 2,639 मामलों की पुष्टि हो चुकी है
  • 10,225 संदिग्ध मामले सामने आए हैं

ढाका डिवीजन सबसे ज्यादा प्रभावित है, जिसके बाद राजशाही, चटगांव और मयमनसिंह का स्थान आता है।

सरकार के विशेष कदम

स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने कई अहम कदम उठाए हैं। सबसे बड़ा फैसला यह है कि टीकाकरण की आयु 9 महीने से घटाकर 6 महीने कर दी गई है।

इसके साथ ही:

  • 5 अप्रैल से विशेष टीकाकरण अभियान शुरू किया गया
  • 6 से 59 महीने के बच्चों को शामिल किया जा रहा है
  • लगभग 20 मिलियन बच्चों को टीका लगाने का लक्ष्य है
  • 18 जिलों के 30 उपजिलों में 12 लाख बच्चों को कवर करने की योजना है

सरकार का लक्ष्य है कि 95% बच्चों को टीकाकरण के दायरे में लाया जाए।

स्वास्थ्य व्यवस्था पर बढ़ता दबाव

खसरे के बढ़ते मामलों के कारण अस्पतालों पर भारी दबाव पड़ रहा है। खासकर बच्चों के अस्पतालों में आईसीयू बेड की कमी गंभीर समस्या बनती जा रही है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते स्थिति को नियंत्रित नहीं किया गया, तो यह संकट और गहरा सकता है।

आगे का रास्ता: क्या है समाधान?

विशेषज्ञों के अनुसार, केवल टीकाकरण अभियान चलाना पर्याप्त नहीं होगा। इसके लिए बहुआयामी रणनीति की जरूरत है, जिसमें शामिल हैं:

  • टीकाकरण डेटा की सटीकता सुनिश्चित करना
  • मातृ प्रतिरक्षा पर शोध बढ़ाना
  • अस्पतालों में आइसोलेशन सुविधाएं विकसित करना
  • पोषण (विशेषकर विटामिन ए) पर ध्यान देना
  • जागरूकता अभियान को मजबूत करना

निष्कर्ष

बांग्लादेश में खसरे का मौजूदा प्रकोप केवल एक स्वास्थ्य संकट नहीं, बल्कि यह सिस्टम की कमजोरियों को भी उजागर करता है। टीकाकरण के बावजूद बच्चों का संक्रमित होना इस बात का संकेत है कि समस्या गहरी है और इसके समाधान के लिए ठोस और वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाना होगा।

यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो यह संकट आने वाले समय में और भी भयावह रूप ले सकता है।

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