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दया की कोई सीमा नहीं,जमाअत के वेबिनार में गूँजा मानवीय संदेश

जमाअत-ए-इस्लामी हिंद के महिला विंग का राष्ट्रीय वेबिनार: “सीमाओं से परे देखभाल—एक बेहतर समाज की ओर”

मुस्लिम नाउ ब्यूरो, नई दिल्ली

जमाअत-ए-इस्लामी हिंद के राष्ट्रीय महिला विंग द्वारा आयोजित “सीमाओं से परे देखभाल: एक बेहतर समाज की ओर” विषयक राष्ट्रीय वेबिनार ने देशभर के दर्शकों को सहानुभूति, भावात्मक संबंधों और इंसानियत के व्यापक संदेश से जोड़ दिया। विविध क्षेत्रों से जुड़े वक्ताओं ने इसमें हिस्सा लिया और आधुनिक दुनिया में बढ़ती संवेदनहीनता, सामाजिक दूरी तथा मानवीय रिश्तों के विखंडन पर गहन चर्चा की। वेबिनार का मूल संदेश था—इंसानियत की कोई सरहद नहीं होती; दिलों को जोड़ना हर नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है।

इंसानी रिश्तों को पुनर्जीवित करने की आवश्यकता

जमाअत-ए-इस्लामी हिंद की राष्ट्रीय सचिव रहमतुन्निसा ए ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि समाज में पड़ोसी हक़, इंसानी जुड़ाव और आपसी सहयोग जैसी बुनियादी मान्यताएँ कमजोर पड़ती जा रही हैं। उन्होंने संगठन की ‘पड़ोसियों के अधिकार’ मुहीम का उल्लेख करते हुए कहा कि यह पहल लोगों के बीच बढ़ती दूरी को कम करने और सहानुभूति को पुनः जीवित करने का प्रयास है।
उन्होंने चेताया कि भावात्मक उदासीनता—चाहे परिवारों में हो या समाज में—एक गंभीर संकट का रूप ले चुकी है। यदि दिल एक-दूसरे के दर्द को महसूस करना बंद कर दें, तो समाज स्वस्थ नहीं रह सकता। इसलिए यह वेबिनार सामाजिक मूल्यों को पुनः जीवंत करने के विज़न का हिस्सा है।

आधुनिक जीवनशैली और बढ़ती भावात्मक रुकावटें

चर्चा की शुरुआत विजयवाड़ा जमाअत की सिटी प्रेसिडेंट कनिता सलमा ने की। उन्होंने बताया कि आधुनिक जीवनशैली, डिजिटल जुड़ाव और व्यस्त दिनचर्या ने इंसानों के बीच अनदेखी दीवारें खड़ी कर दी हैं।
उन्होंने कहा, “ऑनलाइन कनेक्शन भले ही अनगिनत हों, लेकिन लोग एक-दूसरे की ज़रूरतों और खामोश तकलीफ़ों को समझने में पिछड़ रहे हैं।”
उनके अनुसार, यह समय है जब हम अपने आस-पास के लोगों की भावनाओं और जरूरतों पर नए सिरे से ध्यान दें।

वैश्विक दृष्टिकोण: सीमाओं के बिना दिल

स्पेस किड्ज़ इंडिया की संस्थापक और CEO डॉ. श्रीमती केसन ने वेबिनार को एक वैश्विक वैज्ञानिक दृष्टिकोण प्रदान किया। उन्होंने बताया कि एयरोस्पेस जैसी उभरती हुई तकनीकी फील्ड में महिलाएँ अभी भी बेहद कम हैं और उन्हें आगे लाने की जरूरत है।
उन्होंने मिशन सैटेलाइट स्पेसक्राफ्ट जैसे अंतरराष्ट्रीय प्रोजेक्ट का उल्लेख किया, जिसमें 108 देशों के बच्चे बिना धर्म और जातीय पहचान के भेदभाव के वैज्ञानिक परियोजनाओं पर मिलकर काम करते हैं।
उन्होंने कहा, “भौगोलिक सीमाएँ ज़मीनें बाँटती हैं, मगर इंसानों के दिल हमेशा असीम और खुला होना चाहिए।”

भाईचारा, समानता और मूलभूत अधिकार

शिक्षाविद, समाज सेविका और लेखिका फरीदा रहमतुल्ला खान ने इंसानी भाईचारे की नैतिक ज़रूरतों पर प्रकाश डाला। उन्होंने पंडित जवाहरलाल नेहरू के विज़न—“जाति और धर्म से परे एक भारत”—को याद करते हुए कहा कि किसी भी समाज का पहला कर्तव्य है कि वह हाशिये पर रहने वालों को भोजन, स्वच्छ पानी और आश्रय जैसी मूलभूत सुविधाएँ उपलब्ध कराए।
उन्होंने समाज को चेताते हुए कहा कि असमानता और उपेक्षा किसी भी राष्ट्र की प्रगति में सबसे बड़ी बाधाएँ हैं।

भावनात्मक गर्मजोशी और दया की शक्ति

राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता और समाज सेवा परामर्शदाता डॉ. सुवर्णा फोंसेका ई एंटाओ ने बताया कि दया की कोई सीमा नहीं होती। एक मुस्कान, एक सरल संवाद या किसी की बात ध्यान से सुन लेना भी थके हुए दिल को सुकून दे सकता है।
उन्होंने लोगों को यह संकल्प लेने के लिए प्रेरित किया कि—“दिन में कम से कम एक घंटा दया के कामों के लिए निकालें। छोटी-छोटी नेकियां समाज को बदलने की ताकत रखती हैं।”

मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण: बदलाव परिवार से शुरू होता है

जीवन संरेखण कोच और TEDx वक्ता स्वाति तिवारी ने समझाया कि सामाजिक संवेदनशीलता का आरंभ घर से होता है।
उन्होंने कहा कि यदि परिवारों के भीतर दिल नरम हों, रिश्तों में संवाद और समझ बढ़े, तो समाज स्वतः करुणामय और एकजुट बन जाता है।

दूरियाँ अब दिलों में पैदा हो रही हैं

गोवा की शिक्षा कार्यकर्ता और जमाअत महिला विंग की एक्जीक्यूटिव सदस्य मीनाज़ बानो ने कहा कि भौतिक दीवारें तो हमेशा से थीं, लेकिन अब दिलों ने खुद दूरी बनानी शुरू कर दी है।
गाज़ा जैसे वैश्विक मानवीय संकटों का जिक्र करते हुए उन्होंने आगाह किया कि दया और हमदर्दी को भूगोल या जाति से ऊपर उठना चाहिए।

समापन और धन्यवाद

केंद्रीय सलाहकार कमेटी की सदस्य फाखरा तबस्सुम ने सभी वक्ताओं के रचनात्मक विचारों की सराहना की और धन्यवाद व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम समाज में सकारात्मक परिवर्तन की प्रेरणा पैदा करते हैं, क्योंकि इंसानियत की असली ताकत सीमाओं को नहीं पहचानती।