Muslim World

मई 2025 के टाॅप 10 मुस्लिम चेहरे: जब दुनिया शोर में डूबी हो, तब कुछ आवाज़ें इतिहास बन जाती हैं

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मई 2025 के बीते दिनों में मुस्लिम समुदाय से जुड़े जिन चेहरों ने अपनी प्रतिभा, संघर्ष और सोच से वैश्विक मंचों पर छाप छोड़ी, Muslim Now उन्हें सामने लाने की अपनी मुहिम शुरू कर चुका है। यह श्रृंखला हर महीने उन मुसलमानों का दस्तावेज़ होगी जिन्होंने रूढ़ियों को तोड़ा, सीमाओं को पार किया और समाज में नई ऊर्जा भरी।


1. असदुद्दीन ओवैसी: सियासत से राजनयिक मोर्चे तक

ऑपरेशन सिंदूर के बाद असदुद्दीन ओवैसी ने भारतीय राजनीति में अपनी भूमिका को केवल “अल्पसंख्यक नेता” से आगे बढ़ाकर एक कूटनीतिक प्रतिनिधि में तब्दील किया है। वे भारत के उस सात-सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल में शामिल हैं, जो पाकिस्तान की भूमिका उजागर करने के लिए वैश्विक मंचों पर यात्रा कर रहा है। पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कठघरे में खड़ा करने वाले सबसे मुखर नेताओं में ओवैसी का नाम अब सबसे ऊपर है।


2. फैज़ान जकी: अमेरिका में भारत की स्पेलिंग बी जीत

हैदराबाद के 13 वर्षीय फैज़ान जकी ने 2025 Scripps National Spelling Bee जीतकर भारत का नाम अमेरिका में रोशन किया। उन्होंने ‘éclaircissement’ जैसे कठिन फ्रेंच शब्द को पूरी सहजता से स्पेल किया और 50,000 डॉलर का इनाम जीत लिया। उनकी यह सफलता न केवल व्यक्तिगत जीत है, बल्कि भारत-अमेरिका के प्रवासी संबंधों में भी एक सांस्कृतिक उत्सव की तरह देखी जा रही है।


3. बानू मुश्ताक: कन्नड़ से बुकर तक की यात्रा

लेखिका और मानवाधिकार वकील बानू मुश्ताक की लघुकथा संग्रह Heart Lamp को इंटरनेशनल बुकर प्राइज 2025 मिला है। यह पहली बार है जब किसी कन्नड़ रचना को यह सम्मान प्राप्त हुआ। उनके अनुवादक दीपा भस्थी भी पहली भारतीय अनुवादक बनीं जिन्हें यह प्रतिष्ठित पुरस्कार मिला। Heart Lamp दक्षिण भारत की महिलाओं के संघर्षों और संवेदनाओं की अनकही आवाज़ है।


4. जाफर पनाही: प्रतिबंधों को तोड़ता कान्स का सितारा

ईरानी फिल्मकार जाफर पनाही की फिल्म It Was Just An Accident को कान्स फिल्म फेस्टिवल 2025 में Palme d’Or मिला। इस फिल्म को उन्होंने ईरान की निगरानी और सेंसरशिप के बीच गुप्त रूप से निर्देशित किया। यह फिल्म केवल एक थ्रिलर नहीं, बल्कि विरोध और कलाकार की आत्मा की पुकार है। यह सम्मान उनके साहस और प्रतिबद्धता का प्रमाण है।


5. डॉ. सना शालान: अरबी साहित्य की वैश्विक गूंज

जॉर्डन की शिक्षाविद और लेखिका डॉ. सना शालान पर आधारित दो शोध प्रबंधों पर अल्जीरिया की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी में अकादमिक चर्चा हुई। एक शोध में उनकी नाट्यकृति ‘रिहला म’ अल-मुअल्लिमा फरहा’ में शैक्षणिक मूल्य खोजे गए, जबकि दूसरे में फिलिस्तीनी संघर्ष को प्रतीकात्मक रूप में पेश करने वाली उनकी रचना ‘सेल्फ़ी म’ अल-बह्र’ पर विमर्श हुआ। यह उनकी साहित्यिक ताक़त और समकालीन अरबी साहित्य में उनकी केंद्रीय भूमिका को दर्शाता है।


6. प्रो. असद उर रहमान खान: एएमयू से ओस्लो तक का शैक्षणिक पुल

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर असद खान को नॉर्वे की यूनिवर्सिटी ऑफ ओस्लो में विज़िटिंग प्रोफेसर नियुक्त किया गया है। दो साल की इस नियुक्ति से भारत और यूरोप के बीच शैक्षणिक आदान-प्रदान को मजबूती मिलेगी। इससे पहले वे स्पेन और मलेशिया के संस्थानों में भी विशेषज्ञता साझा कर चुके हैं। यह नियुक्ति भारतीय मुस्लिम शैक्षणिक समुदाय के लिए एक नया मानक तय करती है।


7. डॉ. नवेद इकबाल: शरणार्थी बच्चों पर भारत-यूके शोध सेतु

जामिया मिल्लिया इस्लामिया के मनोविज्ञान विभाग के प्रोफेसर नवेद इकबाल को ब्रिटिश अकादमी की विज़िटिंग फेलोशिप प्राप्त हुई है। वे बाथ यूनिवर्सिटी (UK) में भारत और यूके में शरणार्थी बच्चों की मनोवैज्ञानिक और सामाजिक स्थिति पर तुलनात्मक अध्ययन कर रहे हैं। यह शोध न केवल शैक्षणिक है, बल्कि मानवीय सहानुभूति और नीति-निर्माण की दृष्टि से भी अत्यंत उपयोगी है।


8. प्रो. नईमा खातून: एएमयू में महिला नेतृत्व को मिली वैधानिक मुहर

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रो. नईमा खातून की एएमयू कुलपति के रूप में नियुक्ति को वैधानिक ठहराते हुए सभी याचिकाएं खारिज कर दीं। यह फैसला सिर्फ एक कानूनी जीत नहीं, बल्कि शैक्षणिक नेतृत्व में लैंगिक समावेशिता की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। नईमा खातून अब न केवल एएमयू की पहली महिला कुलपति हैं, बल्कि भारत की मुस्लिम शैक्षणिक दुनिया के लिए एक प्रेरणा भी।

9. उर्दू-फ़ारसी विद्वत्ता के प्रतीक प्रो. सैयद ऐनुल हसन को मिला पद्मश्री सम्मान

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने वर्ष 2025 में साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान के लिए प्रसिद्ध शिक्षाविद् प्रोफेसर सैयद ऐनुल हसन को पद्मश्री सम्मान प्रदान किया। प्रो. हसन न केवल उर्दू और फ़ारसी भाषा के विद्वान हैं, बल्कि इंडोलॉजी, भारतीय संस्कृति, तुलनात्मक साहित्य, और भाषायी अध्ययन में भी उन्हें महारत हासिल है।

हैदराबाद स्थित मौलाना आज़ाद राष्ट्रीय उर्दू विश्वविद्यालय (MANUU) के कुलपति के रूप में उन्होंने शिक्षा और भाषा-संवर्धन के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया। तीन दशकों से भी अधिक के अकादमिक जीवन में प्रो. हसन ने भारत और विदेशों में उर्दू-फ़ारसी अध्ययन को नई पहचान दिलाई है।

उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखने वाले प्रो. हसन ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक, परास्नातक और डॉक्टरेट की उपाधियां प्राप्त कीं। उनकी शोध यात्रा फ़ारसी और मध्य एशियाई अध्ययनों के प्रति जुनून से शुरू हुई थी, जो आज एक समर्पित अकादमिक मिशन बन चुकी है। उनकी यह उपलब्धि उर्दू-फ़ारसी भाषाओं और भारतीय बहुलतावादी ज्ञान परंपरा को राष्ट्रीय गौरव का हिस्सा बनाती है।


10. कौन हैं कर्नल सोफिया कुरैशी? ‘ऑपरेशन सिंदूर’ ब्रीफिंग की कमान संभालने वाली भारतीय सेना की जांबाज़ अफसर

‘ऑपरेशन सिंदूर’ के रणनीतिक संवाद और प्रस्तुति का नेतृत्व कर रहीं भारतीय सेना की कर्नल सोफिया कुरैशी और भारतीय वायुसेना की विंग कमांडर व्योमिका सिंह ने रक्षा क्षेत्र में महिला नेतृत्व की एक नई मिसाल पेश की है। विदेश सचिव विक्रम मिसरी के साथ मंच साझा करते हुए इन दोनों महिला अधिकारियों ने भारत की सैन्य रणनीति में महिला अधिकारियों की निर्णायक भूमिका को रेखांकित किया है।

कर्नल सोफिया कुरैशी एक जानी-मानी सैन्य अधिकारी हैं, जिन्होंने 2016 में पुणे में आयोजित बहुराष्ट्रीय सैन्य अभ्यास अभ्यास बल-18 में भारतीय सेना की टुकड़ी का नेतृत्व कर इतिहास रचा था। 18 देशों की इस शांति और मानवीय खदान कार्रवाई केंद्रित एक्सरसाइज में वह एकमात्र महिला टुकड़ी प्रमुख थीं। उन्होंने 40 सदस्यीय भारतीय दल की सफल अगुवाई की, जो सहयोग, संघर्ष समाधान और मानवीय मूल्यों पर केंद्रित था — वही मूल्य जो ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के रणनीतिक संदेश से भी जुड़े हुए हैं।

सिग्नल कोर की अधिकारी कर्नल कुरैशी सैन्य संचार और सूचना प्रणालियों की विशेषज्ञ हैं। 35 वर्ष की आयु में उन्हें अंतरराष्ट्रीय सैन्य प्रशिक्षकों की एक चयन समिति द्वारा अभ्यास बल-18 की अगुवाई के लिए चुना गया था। उनका नेतृत्व आज भारतीय रक्षा बलों में महिला अफसरों की बढ़ती भागीदारी और भरोसेमंद मौजूदगी का प्रतीक बन चुका है।