सैयदना मुफ़द्दल सैफुद्दीन की 82वीं सालगिरह, केंद्रीय मंत्री सीआर पाटिल हुए शामिल
मुस्लिम नाउ ब्यूरो, सूरज गुजरात
जल शक्ति मंत्रालय के केंद्रीय मंत्री और सांसद श्री सी. आर. पाटिल ने सूरत में दाऊदी बोहरा समाज के साथ उनके आध्यात्मिक मार्गदर्शक, हज़रत सैयदना मुफ़द्दल सैफुद्दीन के 82वें जन्मदिन के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में भाग लिया।

माननीय मंत्री विशेष रूप से सैयदना साहब को जन्मदिन की शुभकामनाएँ देने और उनके प्रति अपनी शुभेच्छाएँ प्रकट करने पहुँचे थे। उनके साथ सूरत के वरिष्ठ सरकारी अधिकारी और अन्य गणमान्य व्यक्ति भी मौजूद थे।
यह समारोह ज़म्पा बाज़ार में आयोजित हुआ, जो बोहरा समाज के इतिहास से गहराई से जुड़ा हुआ इलाक़ा है। यहाँ सैयदना साहब का पुश्तैनी घर ‘देवड़ी मुबारक’ स्थित है, जिसके पास 200 साल पुरानी अरबी अकादमी अल-जामिया-तुस-सैफिया भी है, जो शिक्षा के प्रति समाज की प्रतिबद्धता का प्रतीक है।
अपने संबोधन में मंत्री सी. आर. पाटिल ने सैयदना मुफ़द्दल सैफुद्दीन द्वारा देश के विकास में दिए गए योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि उन्होंने सूरत में जमा हुए हजारों बोहरा समाज के लोगों की आँखों में प्रेम, श्रद्धा और गहरी आस्था देखी। मंत्री ने यह भी कहा कि “जब आप सूरत आते हैं, तो सूरत और भी खूबसूरत हो जाता है।”
रविवार को सैयदना मुफ़द्दल सैफुद्दीन ने सूरत की मस्जिद ‘अल-मस्जिद अल-मुअज़्ज़म’ में एक बयान (वाअज़) दिया।
अपने संबोधन में उन्होंने उन हजारों लोगों की सराहना की जो ज्ञान की तलाश में सूरत आए हैं। उन्होंने कहा कि हर इंसान जीवन भर का विद्यार्थी होता है और किसी भी उम्र में शिक्षा प्राप्त करने में हिचकिचाहट नहीं होनी चाहिए।
अपने बयान में सैयदना साहब ने समाज को एक सच्चा और संतोषजनक जीवन जीने की प्रेरणा दी — ऐसा जीवन जिसमें दूसरों की मदद करना और समाज में सौहार्द बनाए रखना जरूरी हो।
भारत और विदेशों से आए 70,000 से अधिक बोहरा समाज के लोगों ने सूरत में “इस्तेफ़ादा इल्मिया” (वार्षिक शैक्षिक सम्मेलन) में भाग लिया, जो सैयदना साहब के जन्मदिन समारोह के साथ समाप्त हुआ।

सैयदना मुफ़द्दल सैफुद्दीन दुनिया भर के 40 से अधिक देशों में फैले हुए 10 लाख से अधिक दाऊदी बोहरा समाज के आध्यात्मिक नेता हैं। उनके नेतृत्व में समाज ने आपसी भाईचारे, सतत विकास और मानवता की सेवा को बढ़ावा दिया है। शिक्षा, भूख मिटाने, जल संरक्षण और पर्यावरण सुधार जैसे क्षेत्रों में उनकी पहल ने समाज को यह सिखाया है कि आस्था और सेवा दोनों को मिलाकर समाज का भला कैसे किया जा सकता है।

