पाक-अफगान तनाव के पीछे कौन? साजिश, शक्ति और सीमाएं
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इस्लामाबाद | मुस्लिम नाउ ब्यूरो
ईरान-पाकिस्तान और पाकिस्तान-अफगानिस्तान की सीमाओं पर तनातनी कोई नई बात नहीं है। तीन मुस्लिम देशों के इन क्षेत्रों में अक्सर किसी न किसी मुद्दे को लेकर तनाव बना रहता है, और कई बार हालात इतने बिगड़ जाते हैं कि सीमावर्ती व्यापार तक ठप हो जाता है। लेकिन हाल के दिनों में पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच जो तनाव देखने को मिला है, वह बेहद गंभीर और अभूतपूर्व माना जा रहा है। हालात इस कदर बिगड़ गए हैं कि पाकिस्तान ने न सिर्फ काबुल पर हवाई हमला किया, बल्कि अफगान सीमा की 19 पुलिस चौकियों पर भी कब्जा कर लिया।
तनाव की वजहें: आरोप-प्रत्यारोप और आपसी अविश्वास
पाकिस्तान का आरोप है कि अफगानिस्तान की ओर से आतंकवादी उसकी सीमा में घुसकर बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वाह जैसे संवेदनशील इलाकों में हिंसा फैला रहे हैं, जिससे देश की आंतरिक सुरक्षा खतरे में पड़ रही है। वहीं, तालिबान सरकार यह दावा करती रही है कि वह अपनी जमीन का इस्तेमाल किसी भी आतंकी गतिविधि के लिए नहीं होने देगी। इसके साथ ही तालिबान पाकिस्तान द्वारा अफगान शरणार्थियों को जबरन निकालने से भी नाराज़ है। पाकिस्तान का आरोप है कि इन शरणार्थियों में कई लोग आतंकवाद को बढ़ावा दे रहे हैं।
सैन्य संघर्ष और सीमा पर नियंत्रण
शनिवार रात पाकिस्तान और अफगान सेना के बीच भीषण झड़प हुई, जिसके बाद पाकिस्तान ने 19 अफगान चौकियों पर कब्जा कर लिया। पाकिस्तानी मीडिया हाउस जियो न्यूज़ के मुताबिक, इन चौकियों — दुर्रान मेला, तुर्कमानज़ई, शाहिदान, कुनार और चगाई — को अफगान सैनिक झड़प के दौरान छोड़कर भाग गए। पाक सेना का दावा है कि दर्जनों अफगान सैनिक मारे गए या घायल हुए हैं।
पाकिस्तान का काबुल पर हवाई हमला और टीटीपी पर निशाना
इससे पहले गुरुवार रात पाकिस्तान ने काबुल पर हवाई हमला किया। उसका आरोप था कि प्रतिबंधित संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के नेता अफगानिस्तान में छिपे हुए हैं और उन्हें वहां से समर्थन मिल रहा है। इन हमलों में टीटीपी प्रमुख नूर वली महसूद के मारे जाने की अफवाहें हैं। इसके अलावा कारी सैफुल्लाह महसूद और उसके कुछ सहयोगियों के मारे जाने की भी खबर है। सैफुल्लाह को अगला संभावित टीटीपी प्रमुख माना जा रहा था।
तालिबान सरकार की प्रतिक्रिया और पलटवार
हालांकि अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने हताहतों की कोई पुष्टि नहीं की है, लेकिन उसने पाकिस्तान पर अफगानिस्तान की संप्रभुता का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है। इस बयान के बाद शनिवार रात अफगान सेना ने पाकिस्तान के अंगूर अड्डा, बाजौर, कुर्रम, दीर, चित्राल, बारामचा समेत कई इलाकों पर हमला किया।
पाकिस्तान ने भी तुरंत जवाबी कार्रवाई करते हुए भारी हथियारों, टैंकों, ड्रोन और गोला-बारूद का इस्तेमाल किया। दोनों देशों की सेनाओं के बीच सीमावर्ती इलाकों में ज़बरदस्त मुठभेड़ हुई, जिससे हालात और बिगड़ गए।
कूटनीतिक हलचल और अंतरराष्ट्रीय समीकरण
इस बीच, तालिबान के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्तकी भारत के छह दिवसीय दौरे पर हैं, जिसने पाकिस्तान की चिंता और बढ़ा दी है। अमेरिका भी अफगानिस्तान में फिर से सक्रिय हो रहा है और पाकिस्तान के साथ अपने संबंध मजबूत कर रहा है। पाकिस्तान का आरोप है कि भारत और अमेरिका मिलकर अफगानिस्तान के जरिए पाकिस्तान और चीन की साझी परियोजनाओं को विफल करने की साजिश रच रहे हैं।
एक दिलचस्प पहलू यह भी है कि पाकिस्तान फिलहाल अमेरिका और चीन — दोनों के साथ दोस्ती निभा रहा है, जबकि भारत अमेरिका से दूर होता नजर आ रहा है और चीन के साथ अपने रिश्ते सुधारने की कोशिश में है। इसी दौरान, ऑपरेशन सिंदूर में तुर्की और चीन की भारत-विरोधी भूमिका भी चर्चा में रही, जिससे दक्षिण एशिया की राजनीति और भी जटिल हो गई है।
निष्कर्ष:
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच हालिया सैन्य झड़पें सिर्फ दो देशों की सीमा तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इसके पीछे बड़े अंतरराष्ट्रीय समीकरण और रणनीतिक दांव-पेच भी हैं। आतंकवाद, शरणार्थी संकट, चीन-अमेरिका की भूमिका और भारत के साथ बदलते रिश्ते — ये सभी कारक इस तनाव को एक बड़े भू-राजनीतिक संकट में बदल सकते हैं। फिलहाल, दोनों देशों के बीच संवाद की संभावना बेहद कम दिखाई दे रही है।

