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UPSC Result 2025: सिविल सेवा परीक्षा में मुस्लिम युवाओं का शानदार प्रदर्शन, 53 उम्मीदवारों ने गाड़े सफलता के झंडे; जामिया और जकात फाउंडेशन का दबदबा

नई दिल्ली/मुंबई | मुस्लिम नाउ ब्यूरो

संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने सिविल सेवा परीक्षा 2025 के अंतिम परिणाम घोषित कर दिए हैं, जिसमें एक बार फिर देश के अल्पसंख्यक समुदाय के युवाओं ने अपनी प्रतिभा और कड़ी मेहनत का लोहा मनवाया है। इस वर्ष कुल 958 उम्मीदवारों की नियुक्ति की सिफारिश की गई है, जिनमें से 53 मुस्लिम उम्मीदवारों ने अपनी जगह पक्की की है।

इस सफलता के पीछे न केवल युवाओं का व्यक्तिगत संघर्ष है, बल्कि जकात फाउंडेशन, जामिया मिल्लिया इस्लामिया (RCA) और अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) जैसे संस्थानों की भी बड़ी भूमिका रही है। विशेष रूप से, जामिया की रेजिडेंशियल कोचिंग एकेडमी (RCA) से इस बार रिकॉर्ड तोड़ परिणाम सामने आए हैं।


मुख्य आकर्षण: शीर्ष रैंक पर कब्जा

इस वर्ष के परिणाम में मुस्लिम उम्मीदवारों ने न केवल संख्या बल दिखाया है, बल्कि शीर्ष रैंकिंग (Top Ranks) में भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है।

  • रैंक 7: ए. आर. राजा मोहैदीन (A R Rajah Mohaideen) ने देश भर में सातवां स्थान प्राप्त कर समुदाय का गौरव बढ़ाया है।
  • बेटियों का दबदबा: इफ़रा शम्स अंसारी (रैंक 24) और नबिया परवेज़ (रैंक 29) ने शीर्ष 30 में जगह बनाकर यह साबित कर दिया है कि मुस्लिम लड़कियां अब किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं।
  • अग्रणी संस्थान: जामिया के RCA से 38 छात्र सफल हुए हैं, जबकि जकात फाउंडेशन के मार्गदर्शन में 14 युवाओं को यह कामयाबी नसीब हुई है।

संस्थानों की भूमिका: सफलता की फैक्ट्री बने जामिया और AMU

1. जामिया मिल्लिया इस्लामिया (JMI) का ऐतिहासिक प्रदर्शन

जामिया की रेजिडेंशियल कोचिंग एकेडमी (RCA) ने एक बार फिर खुद को सिविल सेवाओं के लिए ‘नर्सरी’ साबित किया है। विश्वविद्यालय के अनुसार, कुल 38 उम्मीदवारों ने सफलता प्राप्त की है, जिनमें से 15 महिलाएं हैं।

कुलपति प्रोफेसर मजहर आसिफ ने इस उपलब्धि पर खुशी जताते हुए कहा:

“यह जामिया बिरादरी के लिए गर्व का क्षण है। हमारे छात्रों की यह सफलता कड़ी मेहनत और दृढ़ संकल्प का परिणाम है। हम देश के प्रशासनिक ढांचे में योगदान देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”

प्रमुख आंकड़े (जामिया RCA):

  • कुल सफल छात्र: 38
  • महिला उम्मीदवार: 15
  • टॉप 50 में रैंक: 4 छात्र (रैंक 7, 14, 24 और 29)

2. जकात फाउंडेशन ऑफ इंडिया (ZFI)

मुस्लिम युवाओं को सिविल सेवा की मुख्यधारा में लाने के मिशन में जुटे जकात फाउंडेशन के लिए यह साल शानदार रहा। फाउंडेशन द्वारा प्रशिक्षित 14 उम्मीदवारों ने यूपीएससी 2025 की बाधा पार की है।

3. अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU)

एएमयू की रेजिडेंशियल कोचिंग एकेडमी से भी 4 होनहारों ने यूपीएससी में झंडे गाड़े हैं। इनमें नाज़िया परवीन (रैंक 478), गुलफिज़ा (रैंक 535), यासिर अहमद भट्टी (रैंक 811) और शाहिद रज़ा खान (रैंक 955) शामिल हैं। कुलपति प्रोफेसर नईमा खातून ने इन छात्रों को देश की सेवा पूरी ईमानदारी से करने का संदेश दिया है।


सफल मुस्लिम उम्मीदवारों की पूरी सूची (Rank-Wise List)

नीचे उन 53 उम्मीदवारों के नाम और रैंक दी गई है, जिन्होंने यूपीएससी 2025 में अपनी जगह बनाई है:

रैंकउम्मीदवार का नामरैंकउम्मीदवार का नाम
7ए आर राजा मोहैदीन455शोएब
24इफ़रा शम्स अंसारी478नाज़िया परवीन
29नबिया परवेज़485शेख मोहम्मद हबीसुद्दीन एस
95हसन खान497शेख मोहम्मद निशाथ एम
124अरफा उस्मानी513मिन्हाज शकील
135खान साइमा सिराज अहमद535गुलफ़िज़ा
157वसीम उर रहमान549हाशमी मोहम्मद उमर
253सोफिया सिद्दीकी575शाहरुख खान
254तौसीफ अहमद गनई576असना अनवर
307मंतशा581मुनीब अफजल पर्रा
321असद अकील588अजीम अहमद
354मो. इश्तियाक रहमान614साइस्ता परवीन
382मोहम्मद अश्मिल शाह625नूर आलम
411शाहिदा बेगम एस646मो. इरफान कायमखानी
415शादाब अली खान648मोहसिना बानो
429मोहम्मद स्वाला टी ए663गुलाम माया दीन

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(सूची जारी… दानिश रब्बानी खान (665), मोहम्मद नायब अंजुम (668), मो. अबुजर अंसारी (671), इंसा खान (678), अब्दुल सूफियां के (695), फ़ैरुज़ फातिमा एम (708), मोहम्मद हाशिम के (713), मोहम्मद सुहैल (718), तौसीफ उल्ला खान (741), कोह-ए-सफा (763), सना आज़मी (764), रेशमा एम (773), यासर अहमद भट्टी (811), गुलाम हैदर (832), मोहम्मद शेज़िन सी पी (860), मोहम्मद एजाज उल रहमान (869), अजहर आसिफ खान (886), मो. सरफराज चौधरी (936), अब्दुल्ला अफरीद ए (942), मो. शाहिद रज़ा खान (955), इरफान अहमद लोन (957))


सामाजिक बदलाव की नई इबारत

विशेषज्ञों का मानना है कि मुस्लिम युवाओं का सिविल सेवा की ओर बढ़ता रुझान समुदाय के लिए एक सकारात्मक संकेत है। यह न केवल प्रशासनिक स्तर पर विविधता लाएगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए रोल मॉडल भी तैयार करेगा। विशेष रूप से दक्षिण भारतीय राज्यों और जम्मू-कश्मीर के उम्मीदवारों ने इस बार काफी बेहतर प्रदर्शन किया है।

अधिकारियों का यह भी कहना है कि दक्षिण भारतीय नामों और समान अक्षरों के सत्यापन के बाद सफल मुस्लिम उम्मीदवारों की संख्या में मामूली वृद्धि भी हो सकती है।


निष्कर्ष: आने वाले उम्मीदवारों के लिए प्रेरणा

यूपीएससी 2025 का परिणाम केवल एक सरकारी नौकरी का चयन नहीं है, बल्कि यह उन बाधाओं को तोड़ने की कहानी है जो अक्सर अल्पसंख्यक समुदाय के युवाओं के सामने आती हैं। जामिया, एएमयू और जकात फाउंडेशन जैसे संस्थान इस “स्टील फ्रेम ऑफ इंडिया” को मजबूत करने में सेतु का काम कर रहे हैं।

यदि आप भी यूपीएससी 2026 या आगामी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं, तो इन सफल चेहरों की कहानियाँ आपको यह विश्वास दिलाती हैं कि सही मार्गदर्शन और अटूट मेहनत से सफलता की ऊंचाइयों को छूना संभव है।


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