क्फ संशोधन अधिनियम 2025: जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने सरकार से की यह अपील
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नई दिल्ली।
जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने केंद्र सरकार से वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 के कार्यान्वयन में संवैधानिक सिद्धांतों और न्याय के मानकों का पूरी तरह पालन करने का आग्रह किया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कानून की साख तभी बनी रहती है जब वह देश के सभी नागरिकों पर समान रूप से लागू हो।
नई दिल्ली स्थित ऐवान-ए-गालिब सभागार में आयोजित अखिल भारतीय मुतवल्ली सम्मेलन को संबोधित करते हुए मौलाना मदनी ने कहा कि न्याय किसी समुदाय पर किया गया अहसान नहीं है। यह राज्य की सबसे बड़ी ताकत होती है। जब कानून का दायरा सबके लिए बराबर होता है, तभी समाज में कानून के शासन के प्रति विश्वास मजबूत होता है।
इस राष्ट्रीय सम्मेलन में देशभर से आए 500 से अधिक मुतवल्ली, इस्लामिक विद्वान, कानून विशेषज्ञ और सांसद शामिल हुए। कार्यक्रम में वक्फ संपत्तियों के सामने आ रही कानूनी, प्रशासनिक और संस्थागत चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की गई।

सम्मेलन के मुख्य बिंदु
- संवैधानिक मर्यादा: सरकार से वक्फ कानून के अमल में संविधान के दायरे और समानता के सिद्धांत को बनाए रखने की मांग।
- आंतरिक सुधार: मुतवल्लियों को वक्फ दस्तावेजों के डिजिटलाइजेशन, पारदर्शी रखरखाव और नियमित वित्तीय ऑडिट का निर्देश।
- सामूहिक जिम्मेदारी: वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा को केवल मुतवल्लियों का काम न मानकर पूरे समाज का धार्मिक और सामाजिक दायित्व बताया गया।
- कानूनी निगरानी: अवैध कब्जों से निपटने के लिए राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर विशेष कानूनी सेल और वक्फ सुरक्षा समितियां बनाने का प्रस्ताव।
internal कमजोरियों को दूर करने पर जोर
मौलाना महमूद मदनी ने अपने संबोधन में स्वीकार किया कि वक्फ संपत्तियों के सामने केवल बाहरी चुनौतियां ही नहीं हैं। कई समस्याएं हमारी अपनी आंतरिक लापरवाहियों के कारण भी पैदा हुई हैं। इनमें प्रशासनिक ढिलाई, खराब प्रबंधन और कानूनी कागजातों का उचित रखरखाव न होना मुख्य कारण हैं।
उन्होंने देश भर के मुतवल्लियों का आह्वान किया कि वे वक्फ के प्रबंधन को आधुनिक और पारदर्शी बनाएं। इसके लिए सभी जमीनी रिकॉर्ड का डिजिटलाइजेशन किया जाए। खातों का नियमित ऑडिट कराया जाए और जहां भी अवैध कब्जे हों, वहां बिना देरी किए कानूनी कदम उठाए जाएं।
मौलाना मदनी ने वक्फ की धार्मिक अहमियत समझाते हुए कहा कि वक्फ अल्लाह के नाम समर्पित एक अमानत है। यह इस्लामी आस्था का एक मजबूत स्तंभ है। इसकी सुरक्षा करना, इसके दस्तावेजों को सहेजना और कानूनी लड़ाई लड़ना हर मुसलमान का धार्मिक कर्तव्य है। उन्होंने चेतावनी दी कि जो कौम अपनी अमानतों और इतिहास की अनदेखी करती है, वह अंततः अपना वजूद खो देती है।
कानूनी विशेषज्ञों और धर्मगुरुओं के विचार
सज्जादानशीन दरगाह हजरत ख्वाजा बंदा नवाज गेसू दराज (गुलबर्गा) सैयद शाह हाफिज मोहम्मद अली अल-हुसैनी की अध्यक्षता में यह सम्मेलन आयोजित हुआ।
पटना उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस इकबाल अंसारी ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि मुतवल्लियों को अपनी जिम्मेदारियों का पालन अधिक सतर्कता के साथ करना चाहिए। उन्होंने कहा कि कई बार मुतवल्ली की मौजूदगी के बावजूद संपत्तियां विवादों में घिर जाती हैं। अदालतों का काम संविधान के तहत न्याय देना है, लेकिन आम जनता में न्याय प्रणाली को लेकर जो धारणा बन रही है, वह चिंताजनक है।
मरकजी जमीयत अहले हदीस हिंद के अमीर मौलाना असगर अली इमाम मेंहदी सलफी ने कहा कि वक्फ की हिफाजत का काम सिर्फ सरकार या कुछ चुनिंदा लोगों का नहीं है। इसमें पूरे समाज को आगे आना होगा।
जमात-ए-इस्लामी हिंद के नाइब अमीर मलिक मोअतसिम खान ने कहा कि वक्फ जायदाद पर अवैध कब्जे और लंबे विवाद अक्सर प्रशासनिक कमियों की वजह से बढ़ते हैं। कुछ मामलों में इन संपत्तियों को निजी संपत्ति की तरह देखा जाने लगता है, जो पूरी तरह गलत है। इसे रोकने के लिए संस्थागत जवाबदेही तय करनी होगी।
सुरक्षा समितियों और कानूनी सेल के गठन का प्रस्ताव
सम्मेलन के अध्यक्ष सैयद शाह मोहम्मद अली अल-हुसैनी ने अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि वक्फ के प्रति लोगों में जो जागरूकता आई है, उसे अब कानूनी तैयारी और बेहतर प्रबंधन में बदलना होगा। उन्होंने समृद्ध लोगों से अपील की कि वे शिक्षा, स्वास्थ्य और जन कल्याण के लिए नए वक्फ कायम करें।
गुलबर्गा शरीफ के शाह सैयद यदुल्लाह हुसैनी ने वक्फ संपत्तियों की निगरानी, सुरक्षा और कानूनी पैरवी के लिए समर्पित कमेटियां बनाने की सलाह दी।
साउथ एशियन माइनॉरिटीज़ लॉयर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष एडवोकेट नासिर अजीज ने पूरे देश में वक्फ सुरक्षा समितियां और विशेषज्ञ कानूनी सेल गठित करने की मांग की। उन्होंने कहा कि अवैध कब्जों को छुड़ाने के लिए एक मजबूत कानूनी ढांचा तैयार करना वक्त की जरूरत है।
सांसदों ने रखी अपनी बात
सम्मेलन में मौजूद कई जनप्रतिनिधियों ने भी वक्फ प्रबंधन और सरकारी नीतियों पर विचार रखे।
- सांसद हरिंदर मलिक: उन्होंने कुछ वक्फ संस्थाओं में अव्यवस्था पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि वक्फ की आय का मुख्य उपयोग गरीबों और जरूरतमंदों के कल्याण के लिए होना चाहिए।
- सांसद मौलाना मोहिबुल्लाह नदवी: उन्होंने जमीयत उलेमा-ए-हिंद की पहल की सराहना की। उन्होंने वक्फ संस्थाओं के बचाव के लिए एक एकजुट राष्ट्रीय आंदोलन चलाने का आह्वान किया।
- सांसद इमरान मसूद: उन्होंने सरकार के रुख की आलोचना की। उन्होंने कहा कि धार्मिक संपत्तियों से जुड़े विवाद केवल एक समुदाय तक सीमित नहीं हैं। सभी धार्मिक संस्थाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए सरकार को व्यापक प्रतिबद्धता दिखानी चाहिए।
कार्यक्रम में जमीयत उलेमा-ए-हिंद के महासचिव मौलाना मोहम्मद हकीमुद्दीन कासमी ने स्वागत भाषण दिया। मौलाना मुफ्ती हसन कासमी ने मंच का संचालन किया। इसके अलावा सिद्दीकुल्लाह चौधरी, अकरम-उल-जब्बार खान, एडवोकेट हाजी मोहम्मद हारून, सांसद अब्दुल वहाब और पूर्व सांसद हारिस बीरान समेत कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 पर क्या रुख अपनाया है?
जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने सरकार से मांग की है कि वक्फ अधिनियम को लागू करते समय संवैधानिक मूल्यों और समानता के सिद्धांत का पूरी तरह पालन किया जाए।
मुतवल्ली सम्मेलन में प्रबंधन सुधार के लिए क्या सुझाव दिए गए?
सम्मेलन में वक्फ दस्तावेजों के डिजिटलाइजेशन, पारदर्शी आय-व्यय, नियमित वित्तीय ऑडिट और अवैध कब्जों के खिलाफ तुरंत कानूनी कार्रवाई करने का सुझाव दिया गया।
वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा के लिए क्या नए तंत्र प्रस्तावित किए गए हैं?
सम्मेलन में राष्ट्रीय और स्थानीय स्तर पर वक्फ सुरक्षा समितियां और विशेष कानूनी सेल (Specialized Legal Cells) बनाने का प्रस्ताव रखा गया है ताकि कानूनी मामलों की प्रभावी पैरवी हो सके।

