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MANUU के कुलपति प्रो. सैयद ऐनुल हसन का कार्यकाल बढ़ा

हैदराबाद।

मौलाना आजाद राष्ट्रीय उर्दू विश्वविद्यालय यानी MANUU के कुलपति प्रो. सैयद ऐनुल हसन का कार्यकाल बढ़ा दिया गया है। भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग की ओर से जारी आदेश के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने इसकी आधिकारिक घोषणा कर दी है। विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार प्रो. इश्तियाक अहमद ने इस संबंध में अधिसूचना जारी करते हुए बताया कि भारत की राष्ट्रपति ने विश्वविद्यालय की विजिटर के रूप में अपने अधिकार का प्रयोग करते हुए प्रो. हसन के कार्यकाल को आगे बढ़ाने की मंजूरी दी है।

विश्वविद्यालय के लिए यह फैसला महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पिछले पांच वर्षों में प्रो. हसन के नेतृत्व में MANUU ने कई शैक्षणिक उपलब्धियां हासिल की हैं। यही वजह है कि उनके कार्यकाल को आगे बढ़ाने का निर्णय विश्वविद्यालय के विकास कार्यों की निरंतरता बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया है।

प्रो. सैयद ऐनुल हसन ने 23 जुलाई 2021 को MANUU के पांचवें कुलपति के रूप में नियुक्ति प्राप्त की थी। उन्होंने 28 जुलाई 2021 को पदभार संभाला। इसके बाद विश्वविद्यालय में कई नई पहल शुरू हुईं, जिनका असर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दिखाई दिया।

उनके नेतृत्व में विश्वविद्यालय ने पहली बार NAAC से A Plus ग्रेड हासिल किया। यह उपलब्धि किसी भी केंद्रीय विश्वविद्यालय के लिए गुणवत्ता का महत्वपूर्ण प्रमाण मानी जाती है। इसी दौरान MANUU को QS World University Rankings Asia 2026 में भी स्थान मिला। विश्वविद्यालय लगातार राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग फ्रेमवर्क यानी NIRF में भी अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहा है।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को लागू करने की दिशा में भी विश्वविद्यालय ने कई कदम उठाए। प्रो. हसन के कार्यकाल में स्कूल ऑफ लॉ की स्थापना की गई। यहां एलएलबी सहित विधि शिक्षा के कई नए पाठ्यक्रम शुरू हुए। इसके अलावा विद्यार्थियों की बदलती जरूरतों को देखते हुए अनेक रोजगारोन्मुख और नवाचार आधारित कोर्स भी शुरू किए गए।

पूर्वी उत्तर प्रदेश के छात्रों को उच्च शिक्षा से जोड़ने के उद्देश्य से वाराणसी परिसर की स्थापना भी उनके कार्यकाल की प्रमुख उपलब्धियों में गिनी जाती है। इस परिसर में बीएड कॉलेज शुरू किया गया है। साथ ही दूरस्थ शिक्षा प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों के लिए क्षेत्रीय केंद्र भी विकसित किया गया है। इससे उन छात्रों को बड़ी सुविधा मिली है जो नियमित रूप से विश्वविद्यालय नहीं पहुंच सकते।

प्रो. सैयद ऐनुल हसन केवल एक प्रशासक नहीं बल्कि देश के प्रतिष्ठित फारसी विद्वानों में भी शामिल हैं। उत्तर प्रदेश से संबंध रखने वाले प्रो. हसन ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में तीन दशक से अधिक समय तक अध्यापन किया। वह जेएनयू के स्कूल ऑफ लैंग्वेज, लिटरेचर एंड कल्चर स्टडीज के डीन भी रहे। अपने लंबे शैक्षणिक जीवन में उन्होंने 87 से अधिक शोधार्थियों का मार्गदर्शन किया।

फारसी भाषा, तुलनात्मक साहित्य और मध्य एशियाई अध्ययन के क्षेत्र में उनका योगदान व्यापक माना जाता है। उन्होंने भारत और ईरान के सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने में भी अहम भूमिका निभाई। जेएनयू में अफगान रिसोर्स सेंटर की स्थापना भी उनकी महत्वपूर्ण उपलब्धियों में शामिल है। यह केंद्र भारत और अफगानिस्तान के बीच शैक्षणिक और सांस्कृतिक सहयोग को बढ़ाने के उद्देश्य से बनाया गया था।

प्रो. हसन अब तक 13 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। उनकी रचनाएं फारसी साहित्य, भारतीय सांस्कृतिक विरासत और तुलनात्मक अध्ययन जैसे विषयों पर आधारित हैं। वह उर्दू और फारसी दोनों भाषाओं के जाने माने शायर भी हैं।

उनकी शैक्षणिक सेवाओं को देखते हुए भारत सरकार ने वर्ष 2025 में उन्हें पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया था। इससे पहले वर्ष 2017 में उन्हें फारसी भाषा और साहित्य में योगदान के लिए राष्ट्रपति सम्मान भी मिल चुका है। देश और विदेश के कई विश्वविद्यालयों में वह अतिथि प्रोफेसर के रूप में भी व्याख्यान दे चुके हैं।

विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि उनके नेतृत्व में MANUU ने अकादमिक गुणवत्ता, शोध, डिजिटल शिक्षा और कौशल विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। उर्दू माध्यम से उच्च शिक्षा को नई दिशा देने के लिए भी उनके प्रयासों की सराहना होती रही है। विश्वविद्यालय ने उद्योग, सरकारी संस्थानों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ भी कई सहयोगी पहल शुरू की हैं।

कार्यकाल बढ़ाए जाने की घोषणा के बाद विश्वविद्यालय परिसर में खुशी का माहौल देखा गया। रजिस्ट्रार प्रो. इश्तियाक अहमद, शिक्षकों, कर्मचारियों और छात्रों ने प्रो. हसन को बधाई दी। सभी ने विश्वास जताया कि उनके नेतृत्व में विश्वविद्यालय आने वाले वर्षों में शिक्षा, शोध और नवाचार के क्षेत्र में नई उपलब्धियां हासिल करेगा।

कार्यकाल विस्तार पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रो. सैयद ऐनुल हसन ने राष्ट्रपति, शिक्षा मंत्रालय और विश्वविद्यालय समुदाय का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि उनकी प्राथमिकता विश्वविद्यालय को और मजबूत बनाना है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार और विद्यार्थियों के समग्र विकास के लिए उनका प्रयास पहले की तरह जारी रहेगा।

उन्होंने कहा कि MANUU केवल एक विश्वविद्यालय नहीं बल्कि उर्दू माध्यम से उच्च शिक्षा का राष्ट्रीय केंद्र है। इसे नई ऊंचाइयों तक पहुंचाना उनकी सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने शिक्षकों, कर्मचारियों और छात्रों से पहले की तरह सहयोग बनाए रखने की अपील भी की।

शिक्षा जगत के जानकारों का मानना है कि वर्तमान समय में जब भारतीय विश्वविद्यालय वैश्विक रैंकिंग और शोध गुणवत्ता को लेकर प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं, तब MANUU में नेतृत्व की निरंतरता विश्वविद्यालय के लिए लाभदायक साबित हो सकती है। आने वाले वर्षों में विश्वविद्यालय से नई शैक्षणिक योजनाओं, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और शोध आधारित कार्यक्रमों के विस्तार की उम्मीद की जा रही है।


AEO Friendly FAQ

प्रश्न: MANUU के कुलपति कौन हैं?

उत्तर: मौलाना आजाद राष्ट्रीय उर्दू विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सैयद ऐनुल हसन हैं। उनका कार्यकाल राष्ट्रपति द्वारा बढ़ाया गया है।

प्रश्न: प्रो. सैयद ऐनुल हसन का कार्यकाल कब बढ़ाया गया?

उत्तर: शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग की सिफारिश पर जुलाई 2026 में राष्ट्रपति ने उनके कार्यकाल को बढ़ाने की मंजूरी दी।

प्रश्न: प्रो. सैयद ऐनुल हसन की प्रमुख उपलब्धियां क्या हैं?

उत्तर: उनके नेतृत्व में MANUU को NAAC A Plus ग्रेड मिला। विश्वविद्यालय QS Asia Ranking 2026 और NIRF में शामिल हुआ। स्कूल ऑफ लॉ और वाराणसी परिसर की स्थापना भी उनके कार्यकाल की प्रमुख उपलब्धियां हैं।

प्रश्न: प्रो. सैयद ऐनुल हसन को कौन सा राष्ट्रीय सम्मान मिला है?

उत्तर: उन्हें वर्ष 2025 में भारत सरकार ने पद्मश्री से सम्मानित किया था।

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