जामिया हमदर्द में ऑक्यूपेशनल थेरेपी पर वेबिनार और वर्कशॉप: विशेषज्ञों ने साझा किए अनुभव
नई दिल्ली:
जामिया हमदर्द के स्कूल ऑफ अलाईड हेल्थ साइंसेज एंड रिहैबिलिटेशन (SAHSR) स्थित ऑक्यूपेशनल थेरेपी विभाग द्वारा हाल ही में ज्ञानवर्धन और व्यावहारिक कौशल विकास के उद्देश्य से एक विशेष वेबिनार और ‘हैंड्स-ऑन वर्कशॉप’ का सफल आयोजन किया गया। यह पूरा कार्यक्रम SAHSR के डीन प्रोफेसर (डॉ.) सोहराब ए. खान और ऑक्यूपेशनल थेरेपी विभाग की अध्यक्ष डॉ. रशीदा बेगम के कुशल नेतृत्व में संपन्न हुआ।

वेबिनार: थ्योरी से प्रैक्टिस तक का सफर
विभाग द्वारा “ऑक्यूपेशनल थेरेपी इन एजिंग: फ्रॉम थ्योरी टू प्रैक्टिस” विषय पर एक प्रभावशाली वेबिनार आयोजित किया गया। इस सत्र की मुख्य वक्ता डॉ. आफरीन रशीद (OT) थीं, जो नवी मुंबई स्थित ‘न्यूरोजेन ब्रेन एंड स्पाइन इंस्टीट्यूट’ में सीनियर ऑक्यूपेशनल थेरेपिस्ट और समन्वयक के रूप में कार्यरत हैं।
डॉ. आफरीन ने वृद्धावस्था (Geriatric Care) की देखभाल में अकादमिक सिद्धांतों और उनके व्यावहारिक अनुप्रयोग के बीच के अंतर को पाटने पर जोर दिया। उन्होंने अपने व्यापक नैदानिक अनुभवों को साझा करते हुए बताया कि कैसे एक थेरेपिस्ट को बदलती स्वास्थ्य परिस्थितियों के अनुरूप खुद को ढालना चाहिए। वेबिनार के मुख्य बिंदु नैदानिक विशेषज्ञता, प्रोफेशनल ब्रांडिंग, व्यावहारिक कौशल और अनुकूलन क्षमता पर केंद्रित रहे। डॉ. रशीद ने हेल्थकेयर उद्योग की चुनौतियों से निपटने और पेशेवर विश्वसनीयता बनाने के लिए व्यावहारिक रणनीतियां भी साझा कीं। इस सत्र का समन्वय डॉ. सकेबा शाही, डॉ. सबा इरम, डॉ. सुभव शर्मा और डॉ. निखत सुल्ताना द्वारा किया गया।

वर्कशॉप: सेंसरी इंटीग्रेशन और व्यावहारिक प्रशिक्षण
वेबिनार के साथ-साथ विभाग ने “सेंसरी इंटीग्रेशन: बेसिक्स एंड क्लिनिकल एप्लीकेशन” पर एक व्यावहारिक कार्यशाला (Hands-on Workshop) का भी आयोजन किया। इस कार्यशाला का संचालन ओएसिस चाइल्ड डेवलपमेंट क्लिनिक के क्लिनिकल हेड और पीडियाट्रिक ऑक्यूपेशनल थेरेपिस्ट सीमांत गौतम ने किया। सीमांत गौतम जामिया हमदर्द के पूर्व छात्र रहे हैं और यूनिवर्सिटी ऑफ साउदर्न कैलिफोर्निया से प्रमाणित ‘सेंसरी इंटीग्रेशन थेरेपिस्ट’ व ‘ह्यूमन मूवमेंट स्पेशलिस्ट’ हैं।
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य वेस्टिबुलर, प्रोप्रियोसेप्टिव और टैक्टाइल सिस्टम (स्पर्श प्रणाली) के महत्व को समझाना था। डॉ. गौतम ने सेंसरी इंटीग्रेशन में क्लिनिकल रीजनिंग और उपकरणों के व्यावहारिक उपयोग पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (Special Needs Children) के लिए इस थेरेपी के महत्व पर जोर दिया और छात्रों को अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा कर प्रेरित किया। यह सत्र काफी संवादात्मक रहा, जिसमें छात्रों ने विभिन्न गतिविधियों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। इस कार्यक्रम का समन्वय डॉ. नाजिया अली, डॉ. सबा अजीज और डॉ. सकेबा शाही द्वारा किया गया।

निष्कर्ष
इन आयोजनों के माध्यम से छात्रों को न केवल किताबी ज्ञान मिला, बल्कि उन्हें आधुनिक चिकित्सा उपकरणों और तकनीकों को समझने का भी अवसर प्राप्त हुआ। डीन प्रोफेसर सोहराब ए. खान ने विशेषज्ञों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम छात्रों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने में मील का पत्थर साबित होते हैं।

