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बेरूत में इजरायली बारूद का तांडव: 250 की मौत, ईरान ने दी महायुद्ध की चेतावनी

मध्य पूर्व की धरती एक बार फिर बेगुनाहों के खून से लाल हो गई है। जब पूरी दुनिया अमेरिका और ईरान के बीच हुए दो हफ्तों के युद्धविराम (Ceasefire) की उम्मीद में सांस ले रही थी, ठीक उसी वक्त इजरायल ने लेबनान पर अब तक का सबसे भीषण हमला बोल दिया। बुधवार का दिन लेबनान के इतिहास में एक ‘काले दिन’ के रूप में दर्ज हो गया है। इजरायली लड़ाकू विमानों ने बेरूत से लेकर दक्षिणी लेबनान तक ऐसी तबाही मचाई कि महज 24 घंटे के भीतर 254 लोगों की जान चली गई और 1165 से ज्यादा लोग घायल हो गए।

बेरूत में मौत का मंजर: अस्पताल पड़े कम लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, यह हमला इतना समन्वित और भारी था कि पूरे देश में अफरा-तफरी मच गई। बेरूत की गलियों में आसमान से गिरते बमों ने रिहायशी इलाकों को मलबे के ढेर में बदल दिया। एएफपी और अल-जजीरा के पत्रकारों ने बताया कि हमले के वक्त सड़कों पर ट्रैफिक जाम था, लोग अपनी कारें छोड़कर जान बचाने के लिए अस्पतालों और सुरक्षित ठिकानों की ओर भाग रहे थे। एम्बुलेंसों के सायरन और चीख-पुकार से पूरा शहर गूंज उठा। रेड क्रॉस ने 100 से ज्यादा एम्बुलेंस तैनात की हैं, लेकिन घायलों की संख्या इतनी ज्यादा है कि लेबनान का हेल्थ सिस्टम जवाब दे गया है।

युद्धविराम या धोखा? ट्रंप और नेतन्याहू का रुख साफ सबसे चौंकाने वाली बात अमेरिका और इजरायल का वह बयान है जिसने शांति की कोशिशों पर पानी फेर दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कह दिया है कि ईरान के साथ जो युद्धविराम हुआ है, उसमें लेबनान शामिल नहीं है। ट्रंप ने इसे ‘अलग झड़प’ बताया और कहा कि हिजबुल्लाह का “ख्याल रखा जाएगा।” उधर, इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी स्पष्ट कर दिया कि लेबनान पर हमले नहीं रुकेंगे।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह एक खतरनाक खेल है। एक तरफ ईरान से दोस्ती का हाथ बढ़ाया जा रहा है, तो दूसरी तरफ उसके सबसे करीबी सहयोगी हिजबुल्लाह और लेबनान को निशाना बनाया जा रहा है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने कड़े शब्दों में चेतावनी दी है कि अमेरिका को चुनना होगा—”या तो पूर्ण युद्धविराम या इजरायल के जरिए जारी जंग। दोनों एक साथ नहीं चल सकते।”

ईरान का पलटवार: हॉर्मुज जलडमरूमध्य फिर बंद इजरायल के इन हमलों के जवाब में ईरान ने पूरी दुनिया की नब्ज दबा दी है। तेहरान ने फिर से ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ (Strait of Hormuz) को बंद करने का एलान कर दिया है। यह वही समुद्री रास्ता है जहां से दुनिया का एक-तिहाई कच्चा तेल गुजरता है। ईरान की नेवी ने संदेश जारी किया है कि बिना इजाजत कोई भी जहाज यहां से गुजरा तो उसे निशाना बनाया जा सकता है। इसके साथ ही तेहरान में एयर डिफेंस सिस्टम को एक्टिव कर दिया गया है। ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने कहा है कि उन्होंने एक आधुनिक इजरायली ड्रोन को मार गिराया है और अब वे इजरायल के भीतर जवाबी हमलों के लिए लक्ष्यों (Targets) की पहचान कर रहे हैं।

किंग मेकर या विलेन? इजरायल पर उठते सवाल लेबनान के प्रधानमंत्री नवाफ सलाम ने दुनिया के देशों से इजरायली “किलिंग मशीन” को रोकने की अपील की है। उन्होंने कहा कि जब लेबनान कूटनीतिक रास्तों से शांति की तलाश कर रहा था, तब इजरायल ने बर्बरता की सारी हदें पार कर दीं। राष्ट्रपति जोसेफ औन ने इन हमलों को ‘पाशविक’ करार दिया है।

अजीब विरोधाभास है कि संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस जहां युद्धविराम का स्वागत कर रहे हैं, वहीं इजरायल इसे खुलेआम ठेंगा दिखा रहा है। अरब लीग के प्रमुख अहमद अबुल घीत ने सीधे तौर पर इजरायल पर शांति प्रक्रिया को ‘सबोटॉज’ करने का आरोप लगाया है।

ट्रंप की रहस्यमयी कूटनीति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर उन दावों को खारिज किया है जो ईरान के साथ किसी ‘गुप्त समझौते’ की बात कर रहे थे। उन्होंने कहा कि बातचीत बंद कमरों में होगी और वह केवल उन्हीं पॉइंट्स पर बात करेंगे जो अमेरिका के हित में हैं। लेकिन ट्रंप के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ का बयान आग में घी डालने जैसा है। उन्होंने कहा कि “ईरान ने युद्धविराम की भीख मांगी है” और यह ट्रंप की ऐतिहासिक जीत है। ऐसे अहंकारी बयानों ने ईरान के भीतर गुस्से को और भड़का दिया है।

जमीनी हकीकत: मलबे में दबी उम्मीदें दक्षिणी लेबनान से भाग रहे लोगों को सेना ने चेतावनी दी है कि वे अभी अपने घरों को न लौटें, क्योंकि इजरायली सेना वहां जमीनी ऑपरेशन जारी रखे हुए है। टायर (Tyre) जैसे शहरों में रिहायशी इमारतों को खाली करने के आदेश दिए जा रहे हैं। इजरायल का दावा है कि वह हिजबुल्लाह के बुनियादी ढांचे को नष्ट कर रहा है, लेकिन हकीकत यह है कि मरने वालों में बड़ी संख्या महिलाओं और बच्चों की है। कतर जैसे देश, जो मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे थे, अब खुद मिसाइलों और ड्रोनों को इंटरसेप्ट करने में लगे हैं।

क्या महायुद्ध शुरू हो चुका है? आज लेबनान की सड़कों पर जो खून बह रहा है, उसकी गूंज वॉशिंगटन और तेहरान तक पहुंच रही है। अगर अगले 48 घंटों में इजरायल पर लगाम नहीं लगाई गई, तो ईरान युद्धविराम से पूरी तरह हाथ खींच सकता है। इसका मतलब होगा—एक ऐसा क्षेत्रीय युद्ध जिसमें खाड़ी के तमाम देश और महाशक्तियां झोंक दी जाएंगी। तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन ने सही कहा है कि यह दो हफ्तों का युद्धविराम एक ‘खिड़की’ थी जिसे शांति में बदला जाना चाहिए था, लेकिन इजरायल ने इस खिड़की पर बारूद की कालिख पोत दी है।

दुनिया को समझना होगा कि शांति किश्तों में नहीं आ सकती। आप तेहरान में शांति और बेरूत में जंग नहीं कर सकते। यदि इजरायल की जिद इसी तरह जारी रही, तो वह दिन दूर नहीं जब तेल की कीमतें आसमान छूने लगेंगी और वैश्विक अर्थव्यवस्था मलबे में तब्दील हो जाएगी।

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