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अमेरिकी हवाई हमले में अल-कायदा नेता ढेर, ISIS के पामायरा हमले से सीधे जुड़ा था

अमेरिकी सेना ने सीरिया के उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र में एक सीनियर अल-कायदा-संबद्ध आतंकी नेता को ढेर कर दिया है, जो दिसंबर में अमेरिकी सैनिकों पर हुए घातक ISIS हमले में सीधे तौर पर शामिल था। यह हमला अमेरिका और उसके सहयोगी बलों के खिलाफ सीरिया में चल रहे आतंकवाद विरोधी अभियान का हिस्सा है।

संयुक्त राज्य अमेरिका के सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने बयान जारी करते हुए कहा कि 16 जनवरी को किए गए इस हवाई हमले में बिलाल हसन अल-जसिम मारा गया। अल-जसिम एक अनुभवी आतंकवादी नेता था और उस ISIS ऑपरेटर से सीधे जुड़ा था जिसने 13 दिसंबर 2025 को पामायरा, सीरिया में अमेरिकी सैनिकों पर हमला किया था। उस हमले में दो अमेरिकी सैनिकों और एक अमेरिकी अनुवादक की मृत्यु हो गई थी, जबकि अन्य अमेरिकी और सीरियाई कर्मियों को भी चोटें आई थीं।

सेंट्रल कमांड के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर ने कहा,
“तीन अमेरिकी नागरिकों की मौत से जुड़े आतंकवादी का सफाया हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है कि हम उन आतंकवादियों का पीछा करेंगे जो हमारी सेनाओं पर हमला करते हैं।”
उन्होंने आगे कहा,
“जो लोग अमेरिकी नागरिकों और हमारे जवानों पर हमला करने, उसकी साजिश बनाने या प्रेरित करने का प्रयास करते हैं, उनके लिए कोई सुरक्षित जगह नहीं है। हम आपको ढूंढ निकालेंगे।”

अमेरिकी सेना ने बताया कि दिसंबर में पामायरा हमले के तुरंत बाद ऑपरेशन हॉकी आई स्ट्राइक की शुरुआत की गई थी। इस अभियान में अमेरिकी और सहयोगी बलों ने सीरिया में ISIS के 100 से अधिक ढांचे और हथियार स्थलों को निशाना बनाया और 200 से अधिक सटीक निर्देशित हथियारों का प्रयोग किया। इस अभियान का उद्देश्य ISIS को कमजोर करना, आतंकवाद को जड़ से खत्म करना और अमेरिकी सैनिकों तथा क्षेत्रीय सुरक्षा को सुनिश्चित करना था।

CENTCOM ने यह भी बताया कि पिछले एक वर्ष में अमेरिकी और सहयोगी बलों ने सीरिया में 300 से अधिक ISIS आतंकवादियों को गिरफ्तार किया और 20 से अधिक को मार गिराया, जिनका सीधा खतरा अमेरिकी सेनाओं और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए था।

यह ऑपरेशन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देशानुसार 19 दिसंबर 2025 को शुरू किया गया था, और इसका सीधा कारण 13 दिसंबर 2025 को पामायरा में हुए ISIS हमले का प्रतिकार था। उस हमले में दो अमेरिकी सैनिक और एक अनुवादक मारे गए थे। अमेरिकी सैनिकों की पहचान इस प्रकार की गई:

  • 25 वर्षीय सार्जेंट एडगर ब्रायन टोरेस टोवार, डेस मोइनेस, आयोवा
  • 29 वर्षीय सार्जेंट विलियम नथानियल हॉवर्ड, मार्शलटाउन, आयोवा

दोनों सैनिक आयोवा नेशनल गार्ड के सदस्य थे और वे इस साल की शुरुआत में मध्य पूर्व में ऑपरेशन इनहेरेंट रिज़ॉल्व के तहत तैनात किए गए लगभग 1,800 सैनिकों का हिस्सा थे। यह मिशन ISIS को परास्त करने और क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने के उद्देश्य से चलाया जा रहा है।

CENTCOM ने अपने बयान में कहा कि ऑपरेशन हॉकी आई स्ट्राइक का उद्देश्य केवल तत्काल हमले का प्रतिकार करना नहीं है, बल्कि सीरिया में ISIS के पूरे नेटवर्क को कमजोर करना और भविष्य में होने वाले आतंकवादी हमलों को रोकना भी है। CENTCOM ने स्पष्ट किया कि अमेरिकी और सहयोगी बल आतंकवादियों का पीछा जारी रखेंगे और वे किसी भी ऐसे व्यक्ति को सुरक्षित नहीं रहने देंगे जो अमेरिकी सैनिकों या नागरिकों के लिए खतरा बनता है।

अमेरिकी सैन्य अधिकारियों ने कहा कि अल-जसिम ISIS के भीतर रणनीतिक भूमिका निभा रहा था और पामायरा हमले के साथ ही कई अन्य आतंकवादी अभियानों की योजना में शामिल था। उसकी मौत से न केवल पामायरा हमले की साजिश में बाधा आई, बल्कि ISIS नेटवर्क में भी गहरा झटका लगा।

इस अभियान के दौरान अमेरिकी बलों ने उच्च तकनीक हथियार और इंटेलिजेंस का इस्तेमाल किया। CENTCOM के अनुसार, “इस तरह के सटीक हमले आतंकवादियों की योजना और नेटवर्क को तोड़ने में सबसे प्रभावी तरीके हैं।”

सैन्य विशेषज्ञों के अनुसार, पामायरा हमले ने अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए चेतावनी का संकेत दिया था कि ISIS अभी भी सक्रिय है और उनके पास अमेरिकी बलों को निशाना बनाने की क्षमता है। अल-जसिम की मौत और ऑपरेशन हॉकी आई स्ट्राइक ने इस खतरे को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया।

अमेरिकी रक्षा और विदेश नीति विशेषज्ञों ने कहा कि यह कार्रवाई अमेरिका की यह प्रतिबद्धता दिखाती है कि किसी भी तरह के आतंकवादी हमले का जवाब दिया जाएगा और कोई भी व्यक्ति या संगठन अमेरिकी सैनिकों और नागरिकों को नुकसान पहुंचाने में सक्षम नहीं रहेगा। यह कार्रवाई क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने और आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में अमेरिका की गंभीरता को भी दर्शाती है।

इस पूरी घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिकी बल न केवल तुरंत हमले का प्रतिकार करने में सक्षम हैं, बल्कि लंबी अवधि में ISIS और अन्य आतंकवादी नेटवर्क को कमजोर करने के लिए रणनीतिक कार्रवाई भी कर सकते हैं। CENTCOM का कहना है कि अमेरिकी और सहयोगी बल लगातार आतंकवादियों पर निगरानी रखेंगे और किसी भी खतरे का निष्पक्ष और निर्णायक जवाब देंगे।