Culture

एआर रहमान: संगीत का वह ‘ऑस्कर’ विजेता जिसे ट्रोल करना भारत के गौरव का अपमान है

दुनियाभर में भारतीय संगीत का डंका बजाने वाले और ‘मद्रास के मोजार्ट’ कहे जाने वाले ए.आर. रहमान इन दिनों चर्चा के केंद्र में हैं। चर्चा उनके संगीत की भी है और उनके एक बेबाक बयान की भी, जिसे लेकर सोशल मीडिया के एक धड़े ने उन्हें निशाना बनाने की कोशिश की। हालांकि, रहमान ने अब अपनी सफाई पेश कर दी है, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है: क्या हम अपने उन रत्नों की कद्र करना भूल गए हैं जिन्होंने वैश्विक स्तर पर तिरंगे का मान बढ़ाया है?

उपलब्धियों का वह शिखर, जहाँ पहुँचना नामुमकिन सा है

सोशल मीडिया पर ‘कीचड़’ उछालने वालों को शायद रहमान की उस तपस्या और संघर्ष का अंदाजा नहीं है, जिसने उन्हें शून्य से शिखर तक पहुँचाया। रहमान केवल एक संगीतकार नहीं, बल्कि भारत के सांस्कृतिक राजदूत हैं। उनकी उपलब्धियों की सूची इतनी लंबी है कि दुनिया का बड़े से बड़ा कलाकार उससे ईर्ष्या कर सकता है।

अंतरराष्ट्रीय मंचों पर रहमान का दबदबा:

  • ग्लोबल आइकन: रहमान को ट्रिनिटी कॉलेज लंदन का मानद राष्ट्रपति (Honorary President) नियुक्त किया गया है।
  • कनाडा में सम्मान: उनके सम्मान में कनाडा में दो सड़कों का नाम ‘ए.आर. रहमान’ रखा गया है।
  • व्हाइट हाउस का बुलावा: वह पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा द्वारा व्हाइट हाउस में आमंत्रित किए जा चुके हैं।
  • नोबेल शांति पुरस्कार: उन्होंने नोबेल शांति पुरस्कार समारोह में अपनी प्रस्तुति से शांति का संदेश दिया है।
  • फ्रांस का सर्वोच्च सम्मान: उन्हें फ्रांस के प्रतिष्ठित ‘शेवेलियर डी ल’ऑर्ड्रे डेस आर्ट्स एट डेस लेट्रेस’ से नवाजा गया है।

सहयोग और प्रभाव: रहमान ने दुनिया के दिग्गज कलाकारों जैसे हंस ज़िमर, एकॉन, एंड्रयू लॉयड वेबर और मिक जैगर के साथ काम किया है। इतना ही नहीं, उन्होंने 18 हॉलीवुड फिल्मों में संगीत दिया है और उनके संगीत का दुनिया भर के संस्थानों में अध्ययन किया जाता है।


ट्रोलर्स को करारा जवाब: 200 मिलियन रिकॉर्ड्स का सफर

जब ट्रोलर्स रहमान की निष्ठा या उनकी कला पर सवाल उठाते हैं, तो वे भूल जाते हैं कि रहमान ने 200 मिलियन (20 करोड़) से ज्यादा रिकॉर्ड्स बेचे हैं। उनके पास 2 ऑस्कर, 2 ग्रैमी, 1 बाफ्टा और 1 गोल्डन ग्लोब जैसे पुरस्कार हैं, जो किसी भी भारतीय संगीतकार के लिए एक सपना मात्र हैं।

भारत सरकार ने भी उन्हें पद्म भूषण और पद्म श्री से सम्मानित किया है। उनके नाम 7 राष्ट्रीय पुरस्कार और रिकॉर्ड 37 फिल्मफेयर पुरस्कार हैं। मलेशिया के एक लाइव कॉन्सर्ट में 70,000 से ज्यादा लोगों की भीड़ जुटना इस बात का प्रमाण है कि रहमान की आवाज सीमाओं के पार दिलों को जोड़ती है।

एआर रहमान को ट्रोल करना, भारत के सॉफ्ट पावर पर हमला

विवाद की जड़ और रहमान की स्पष्टता

विवाद तब शुरू हुआ जब रहमान ने बॉलीवुड की मौजूदा स्थिति और हिंदी सिनेमा में काम न मिलने के ‘सूखे’ पर अपनी बात रखी। उन्होंने ‘सांस्कृतिक भेदभाव’ और इंडस्ट्री में गैर-कलात्मक फैसलों के हावी होने पर चिंता जताई थी। उनके इस बयान को कुछ लोगों ने गलत संदर्भ में लिया, जिसके बाद सोशल मीडिया पर उन्हें ट्रोल किया जाने लगा।

मगर इस कठिन समय में रहमान के पक्ष में कई बड़ी आवाजें उठीं। वरिष्ठ अभिनेता परेश रावल ने उन्हें देश का गौरव बताते हुए उनका समर्थन किया। वहीं, एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि रहमान आज जिस मुकाम पर हैं, वह अपनी मेहनत और अल्लाह के करम से हैं। उन्होंने रहमान को एक सच्चा और नमाज का पाबंद इंसान बताया।

“भारत मेरी प्रेरणा और मेरा घर है”

अपनी सफाई में रहमान ने जो कहा, वह उनके व्यक्तित्व की गहराई को दर्शाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि संगीत उनके लिए कल्चर को सेलिब्रेट करने का जरिया है। रहमान ने भावुक होते हुए कहा:

“भारत मेरी प्रेरणा है, मेरा गुरु है और मेरा घर है। मेरा एकमात्र मकसद संगीत के ज़रिए लोगों के जीवन में खुशियाँ लाना और उनका सम्मान करना रहा है।”

उन्होंने आगे कहा कि वह कभी किसी को ठेस नहीं पहुँचाना चाहते थे। भारत को अभिव्यक्ति की आजादी वाला देश बताते हुए उन्होंने गर्व के साथ कहा कि उन्हें भारतीय होने और यहाँ के मल्टीकल्चरल क्रिएटिव माहौल का हिस्सा होने पर फक्र है।

निष्कर्ष: कला को विवादों से ऊपर रखें

ए.आर. रहमान की पहचान किसी एक धर्म या क्षेत्र तक सीमित नहीं है। वह उस भारत की आवाज हैं जो विविधता में एकता का संदेश देता है। जब कोई रहमान को ट्रोल करता है, तो वह केवल एक व्यक्ति को नहीं, बल्कि भारत की उस सांस्कृतिक विरासत को चोट पहुँचाता है जिसने पूरी दुनिया में अपना लोहा मनवाया है।

रहमान का संघर्ष, उनकी ईमानदारी और उनकी रूहानी संगीत साधना हमें सिखाती है कि कला हमेशा विवादों से बड़ी होती है। अब समय आ गया है कि हम अपनी प्रतिभाओं को संकुचित नजरिए से देखने के बजाय उन्हें वह सम्मान दें जिसके वे हकदार हैं।