गाजियाबाद: नफरत के शोर में डूबी दुनिया को भाईचारे का करारा जवाब
देश में जब भी मोबाइल की स्क्रीन खोलो, तो नफरत और विवाद की खबरें पहले सामने आती हैं। कभी टीसीएस के नाम पर हंगामा होता है, तो कभी नमिता थापर और लेंसकार्ट के बहाने समाज को दो हिस्सों में बांटने की कोशिश की जाती है। ऐसा लगता है जैसे देश का सौहार्द कहीं खो गया है। लेकिन इसी शोर के बीच दिल्ली से सटे गाजियाबाद से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो सुकून देती है। यह तस्वीर बताती है कि हिंदुस्तान की जड़ें आज भी मोहब्बत और भाईचारे से सिंचित हैं।
फूलों की बारिश और दुआओं का संगम
अभी हज का मुकद्दस सफर शुरू हो चुका है। गाजियाबाद की एक सोसाइटी में एक मुस्लिम दंपत्ति हज पर जाने की तैयारी कर रहे थे। अमूमन ऐसे मौकों पर रिश्तेदार और घरवाले विदा करने आते हैं। लेकिन यहां नजारा कुछ और ही था। इस परिवार को विदा करने के लिए पूरी सोसाइटी के हिंदू परिवार उमड़ पड़े।
जैसे ही यह दंपत्ति घर से बाहर निकला, उनके पड़ोसियों ने उन पर फूलों की बारिश शुरू कर दी। किसी ने गले लगकर मुबारकबाद दी, तो किसी ने हाथ जोड़कर उनके सफर की सलामती की दुआ की। वीडियो में दिख रहा है कि कैसे हिंदू महिलाएं और पुरुष पूरे उत्साह के साथ अपने मुस्लिम पड़ोसियों को विदा कर रहे हैं। उनके चेहरों पर जो मुस्कान है, वह किसी बनावट का हिस्सा नहीं लगती। यह वह सहज प्रेम है, जो सदियों से भारत की पहचान रहा है।
सोशल मीडिया पर वायरल हुई मोहब्बत
इस भावुक पल का वीडियो सलमान निजामी ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर साझा किया। देखते ही देखते यह वीडियो वायरल हो गया। अब तक इसे हजारों लोग देख चुके हैं और अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। लोग कह रहे हैं कि “यही हमारा असल हिंदुस्तान है।” सोशल मीडिया पर अक्सर नफरत फैलाने वाले सक्रिय रहते हैं, लेकिन इस वीडियो ने उन सबको चुप करा दिया है।
लोग इस वीडियो को गंगा-जमुनी तहजीब की एक बड़ी मिसाल मान रहे हैं। गाजियाबाद की इस सोसाइटी ने साबित कर दिया है कि धर्म दीवारों में हो सकता है, लेकिन दिल में सिर्फ इंसानियत होनी चाहिए। जब पड़ोसी एक-दूसरे के सुख-दुख और इबादत का सम्मान करने लगें, तो समाज की आधी समस्याएं अपने आप खत्म हो जाती हैं।
Hindu neighbours in Ghaziabad seeing off their Muslim neighbour as he leaves for Hajj; this is the real India. Not hate, not division, but love, respect, and shared humanity. Let this spirit defeat every form of hatred. 🇮🇳❤️ pic.twitter.com/DdDVA30juE
— Salman Nizami (@SalmanNizami_) April 22, 2026
विवादों के बीच एक ठंडी फुहार
पिछले कुछ दिनों से कॉर्पोरेट और डिजिटल दुनिया में अजीब सा तनाव देखा जा रहा है। नमिता थापर और लेंसकार्ट जैसे मुद्दों को लेकर सोशल मीडिया पर दो गुट बन गए हैं। हर छोटी बात को सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश की जा रही है। ऐसे माहौल में गाजियाबाद की यह खबर किसी ठंडी फुहार जैसी है।
यह खबर उन लोगों के लिए एक कड़ा सबक है जो धर्म के नाम पर नफरत का छौंका लगाते हैं। गाजियाबाद के इन परिवारों को शायद इस बात का अंदाजा भी नहीं होगा कि उनके एक छोटे से कदम ने देश को कितना बड़ा संदेश दे दिया है। उन्होंने बताया कि हज सिर्फ एक व्यक्ति की यात्रा नहीं है, बल्कि उसके साथ पूरे मोहल्ले की दुआएं जुड़ी होती हैं।
क्यों जरूरी है यह भाईचारा?
भारत एक ऐसा देश है जहां मंदिर की घंटी और मस्जिद की अजान एक साथ सुनाई देती है। यहां दिवाली की मिठाई और ईद की सेवइयां साथ बांटी जाती हैं। लेकिन पिछले कुछ सालों में इंटरनेट की दुनिया ने इस हकीकत को धुंधला कर दिया है। गाजियाबाद का यह वीडियो उसी धुंध को साफ करने का काम करता है।
हज पर जाने वाला यह परिवार जब वापस आएगा, तो उनके पास सिर्फ काबा की यादें नहीं होंगी। उनके पास अपने उन हिंदू भाइयों और बहनों का प्यार भी होगा, जिन्होंने उन्हें दुआओं के साथ विदा किया। यही वह धागा है जो हिंदुस्तान को एक माला में पिरोकर रखता है।

निष्कर्ष
नफरत फैलाना आसान है, लेकिन मोहब्बत को निभाना साहस का काम है। गाजियाबाद के इन परिवारों ने वह साहस दिखाया है। उन्होंने बता दिया कि इंसानियत हर धर्म से ऊपर है। आज जब दुनिया तकनीक और विवादों में उलझी है, तब ऐसी खबरें हमें याद दिलाती हैं कि हम इंसान हैं और हमारा सबसे बड़ा धर्म एक-दूसरे का सम्मान करना है।
यह वीडियो सिर्फ एक विदाई का वीडियो नहीं है। यह उन ताकतों को जवाब है जो देश का माहौल बिगाड़ना चाहती हैं। यह हिंदुस्तान की उस आत्मा की आवाज है, जो आज भी जिंदा है, जागृत है और बेहद खूबसूरत है।
हमें ऐसे और उदाहरणों की जरूरत है। हमें गाजियाबाद जैसी कहानियों को और जोर से सुनाने की जरूरत है। ताकि नफरत का शोर कम हो सके और मोहब्बत की गूंज हर घर तक पहुंचे।

