Education

जामिया और MANUU में शिक्षकों और शोधार्थियों के लिए खास कार्यक्रम

मुस्लिम नाउ ब्यूरो, नई दिल्ली/हैदराबाद

शिक्षा की गुणवत्ता केवल बेहतर पाठ्यक्रम और संसाधनों से तय नहीं होती। इसमें शिक्षक की भूमिका सबसे अहम होती है। इसी सोच के साथ नई दिल्ली की जामिया मिल्लिया इस्लामिया और हैदराबाद की मौलाना आजाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी में अलग अलग कार्यक्रम आयोजित किए गए। दोनों कार्यक्रमों का स्वरूप अलग था, लेकिन उद्देश्य एक था। शिक्षण और अकादमिक क्षेत्र से जुड़े लोगों को नई जरूरतों के लिए तैयार करना।

जामिया मिल्लिया इस्लामिया में नए पीएचडी शोधार्थियों के लिए ओरिएंटेशन कार्यक्रम हुआ। इसमें उन्हें विश्वविद्यालय, शोध प्रक्रिया, पाठ्यक्रम, नियमों और अकादमिक संसाधनों की जानकारी दी गई। दूसरी ओर, मौलाना आजाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी यानी मैनू में उर्दू माध्यम के शिक्षकों के लिए एक दिवसीय क्षमता निर्माण कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें शिक्षकों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI टूल्स के इस्तेमाल और खुशगवार कक्षा के बारे में प्रशिक्षण दिया गया।

MANUU में उर्दू माध्यम शिक्षकों की क्षमता निर्माण कार्यशाला

मौलाना आजाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी, हैदराबाद के सेंटर फॉर प्रोफेशनल डेवलपमेंट ऑफ उर्दू मीडियम टीचर्स यानी CPDUMT की ओर से यह कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें चिश्तिया कॉलेज, खुल्दाबाद ने सहयोग किया। कार्यक्रम में उर्दू माध्यम से पढ़ाने वाले शिक्षकों ने भाग लिया।

कार्यशाला का एक प्रमुख आकर्षण AI Tools for Teachers विषय पर आयोजित सत्र रहा। इसका संचालन प्रोफेसर अब्दुस्समीअ सिद्दीकी ने किया। वह मैनू के CPDUMT के निदेशक हैं।

उन्होंने शिक्षकों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बदलते स्वरूप और शिक्षा में उसके उपयोग की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि AI का इस्तेमाल केवल जानकारी हासिल करने तक सीमित नहीं है। इसका उपयोग पाठ योजना तैयार करने, अध्ययन सामग्री विकसित करने, शिक्षण गतिविधियों को बेहतर बनाने और कक्षा में विद्यार्थियों की भागीदारी बढ़ाने के लिए भी किया जा सकता है।

शिक्षकों के लिए यह विषय इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि डिजिटल तकनीक तेजी से शिक्षा व्यवस्था का हिस्सा बन रही है। ऐसे में AI टूल्स की बुनियादी समझ शिक्षकों को पढ़ाने के नए तरीके अपनाने में मदद कर सकती है। कार्यशाला में AI के व्यावहारिक इस्तेमाल पर जोर दिया गया।

Happy Classroom पर भी हुआ प्रशिक्षण

कार्यशाला के दूसरे सत्र में Happy Classroom विषय पर चर्चा हुई। इस सत्र का संचालन जिला परिषद प्राथमिक विद्यालय, जकठान के हेड मास्टर ख्वाजा मोइनुद्दीन ने किया।

उन्होंने कहा कि कक्षा का माहौल विद्यार्थियों के सीखने की क्षमता पर सीधा असर डालता है। यदि विद्यार्थी खुद को सहज और सुरक्षित महसूस करते हैं तो उनकी सक्रिय भागीदारी बढ़ती है। उन्होंने शिक्षक और विद्यार्थी के बीच बेहतर संवाद को भी महत्वपूर्ण बताया।

सत्र में सकारात्मक कक्षा वातावरण, विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी और शिक्षक छात्र संबंधों से जुड़े पहलुओं पर चर्चा हुई। इसका उद्देश्य शिक्षकों को केवल विषय पढ़ाने के बजाय विद्यार्थियों के साथ बेहतर शैक्षिक संबंध बनाने के लिए प्रेरित करना था।

कार्यक्रम में उर्दू एजुकेशन सोसाइटी, औरंगाबाद के चेयरमैन शेख मोहम्मद अय्यूब, कोषाध्यक्ष डॉ. अब्दुल मकीत, प्रोफेसर सैयद आसिफ जकरिया, चिश्तिया कॉलेज के प्रिंसिपल और IQAC कोऑर्डिनेटर सैयदा अरशिया कादरी ने भी विचार रखे।

कार्यशाला के अंत में प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र दिए गए। आयोजकों के अनुसार इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम उर्दू माध्यम के शिक्षकों को बदलती शैक्षिक जरूरतों से जोड़ने में मदद कर सकते हैं।

जामिया में नए पीएचडी शोधार्थियों का स्वागत

इसी बीच, नई दिल्ली स्थित जामिया मिल्लिया इस्लामिया के सेंटर फॉर कम्पेरेटिव रिलिजन्स एंड सिविलाइजेशंस ने 2026 से 2027 बैच के नए पीएचडी शोधार्थियों के लिए ओरिएंटेशन कार्यक्रम आयोजित किया।

कार्यक्रम 20 अगस्त 2026 को सेंटर परिसर में हुआ। इसमें नए पीएचडी शोधार्थियों के साथ पिछले बैच के शोधार्थी और सेंटर के नए एमए विद्यार्थी भी शामिल हुए।

सेंटर की निदेशक प्रोफेसर मेहर फातिमा हुसैन ने नए शोधार्थियों और अतिथियों का स्वागत किया। उन्होंने शोधार्थियों को जामिया मिल्लिया इस्लामिया की परंपरा, विश्वविद्यालय के मूल्यों और उसके अकादमिक वातावरण से परिचित कराया।

उन्होंने जामिया की विरासत को समझने और विश्वविद्यालय की शैक्षिक तथा संस्थागत गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी की अपील की। उन्होंने Clean Jamia, Green Jamia and Plastic Free Jamia अभियान का भी उल्लेख किया। शोधार्थियों से परिसर को स्वच्छ और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार बनाए रखने में योगदान देने को कहा गया।

शोध नियमों और अकादमिक ईमानदारी पर जोर

ओरिएंटेशन कार्यक्रम में शोध से जुड़े नियमों को भी प्रमुखता दी गई। शोधार्थियों से कहा गया कि वे पीएचडी ऑर्डिनेंस को ध्यान से पढ़ें और उसमें दिए गए प्रावधानों से अपडेट रहें।

डॉ. ईटी बहादुर ने Research and Publication Ethics पर चर्चा की। उन्होंने अकादमिक ईमानदारी और गुणवत्तापूर्ण शोध के महत्व को समझाया। उन्होंने शोधार्थियों को प्रतिष्ठित और Scopus indexed जर्नल में शोध प्रकाशित करने के लिए प्रोत्साहित किया। साथ ही predatory publishing यानी संदिग्ध प्रकाशन गतिविधियों से सावधान रहने की सलाह दी।

यह सत्र नए शोधार्थियों के लिए महत्वपूर्ण रहा। पीएचडी के दौरान शोध की गुणवत्ता के साथ प्रकाशन के सही माध्यम की जानकारी भी जरूरी होती है। गलत या संदिग्ध जर्नल में प्रकाशन से शोध की विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती है।

विश्वविद्यालय की सुविधाओं की जानकारी

प्रॉक्टर टीम से जुड़ी डॉ. अमरीन जमाली ने शोधार्थियों को विश्वविद्यालय के नियमों और छात्र सहायता सुविधाओं की जानकारी दी। उन्होंने प्रॉक्टर कार्यालय की भूमिका के साथ विभिन्न छात्र सहायता केंद्रों के बारे में बताया।

शोधार्थियों को यूनिवर्सिटी प्लेसमेंट सेल, मेंटल हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर और काउंसलिंग एंड गाइडेंस सेंटर जैसी सुविधाओं की जानकारी दी गई। इसका उद्देश्य नए विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय में उपलब्ध सहायता व्यवस्था से परिचित कराना था।

सेंटर के शिक्षक डॉ. अहमद सोहैब और डॉ. एमडी चिंगिज खान ने भी नए शोधार्थियों से बातचीत की। उन्होंने पीएचडी पाठ्यक्रम में पढ़ाए जाने वाले पेपर और सेंटर के अकादमिक वातावरण के बारे में जानकारी दी।

डॉ. सृष्टि पांडे ने पीएचडी कोर्सवर्क की संरचना, अकादमिक कैलेंडर और जरूरी शैक्षिक आवश्यकताओं पर प्रस्तुति दी। उन्होंने सेंटर के इतिहास और उसकी बौद्धिक परंपरा पर भी प्रकाश डाला।

शोधार्थियों को कोर्सवर्क में अनिवार्य 75 प्रतिशत उपस्थिति के नियम के बारे में बताया गया। साथ ही सुरक्षित, समावेशी और सम्मानजनक अकादमिक वातावरण बनाए रखने की प्रतिबद्धता दोहराई गई। यौन उत्पीड़न और रैगिंग के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति की जानकारी भी दी गई।

कार्यक्रम में नशा मुक्त भारत की शपथ भी दिलाई गई।

शिक्षा में तकनीक और शोध दोनों की जरूरत

जामिया और मैनू में हुए इन दोनों कार्यक्रमों को अलग नजरिए से देखा जा सकता है। मैनू की कार्यशाला का केंद्र शिक्षक और उनकी बदलती प्रशिक्षण जरूरतें थीं। जामिया का कार्यक्रम शोधार्थियों को विश्वविद्यालय और शोध की अकादमिक प्रक्रिया से जोड़ने पर केंद्रित था।

दोनों कार्यक्रमों में एक बात समान रही। वह थी शिक्षा की गुणवत्ता और उससे जुड़े लोगों की क्षमता को मजबूत करना।

मैनू में AI in education, AI tools for teachers, teacher training और happy classroom जैसे विषय सामने आए। वहीं जामिया में PhD orientation, research ethics, publication ethics, academic integrity, PhD coursework और student support जैसी जरूरतों पर जोर रहा।

शिक्षा के क्षेत्र में तकनीक तेजी से जगह बना रही है। दूसरी ओर गुणवत्तापूर्ण शोध के लिए अकादमिक अनुशासन और ईमानदारी भी उतनी ही जरूरी है। ऐसे में शिक्षक प्रशिक्षण और शोधार्थी मार्गदर्शन दोनों की अपनी अलग भूमिका है।

कार्यक्रम के समापन पर प्रोफेसर मेहर फातिमा हुसैन ने जामिया के कुलपति प्रोफेसर मजहर आसिफ और रजिस्ट्रार प्रोफेसर एमडी महताब आलम रिजवी के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के नेतृत्व से मिल रहे सहयोग और प्रोत्साहन ने सेंटर को आगे बढ़ाने में मदद की है।

इस तरह नई दिल्ली से हैदराबाद तक आयोजित इन दोनों कार्यक्रमों ने शिक्षा और अकादमिक क्षेत्र की दो महत्वपूर्ण जरूरतों को सामने रखा। एक ओर शिक्षकों को AI और आधुनिक शिक्षण तकनीकों से परिचित कराना जरूरी है। दूसरी ओर नई पीढ़ी के शोधार्थियों को शोध की गुणवत्ता, अकादमिक अनुशासन और संस्थागत जिम्मेदारियों की समझ देना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

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