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ईरान–अमेरिका तनाव: पूर्व परमाणु वार्ताकार बोले, कूटनीति आगे बढ़ने का एकमात्र रास्ता

ईरान के पूर्व राजनयिक और परमाणु वार्ताकार सैयद हुसैन मुसावियन ने चेतावनी दी है कि किसी भी प्रकार की सैन्य कार्रवाई पूरे मध्य पूर्व को अस्थिर कर सकती है। उन्होंने बढ़ते तनाव को सुलझाने के लिए वॉशिंगटन और तेहरान से प्रत्यक्ष संवाद अपनाने की अपील की है।

एएनआई से बातचीत में मुसावियन, जिन्होंने ईरान के परमाणु वार्ताओं में अहम भूमिका निभाई थी, ने कहा कि हालिया अशांति के बाद ईरान की आंतरिक स्थिति काफी हद तक स्थिर हो चुकी है, लेकिन देश को अब भी कई बुनियादी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, जिन पर नेतृत्व को तुरंत ध्यान देना होगा।

उन्होंने मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए अमेरिका द्वारा सैन्य हमले की संभावना को खारिज किया और कहा कि ईरान में अशांति फैलाकर देश को “ढहाने” की वॉशिंगटन की योजना निराशाजनक साबित हुई है।

उन्होंने कहा, “अमेरिकी सैन्य हमले की संभावना अब काफी कमजोर हो गई है। हिरासत में लिए गए लोगों की फांसी को लेकर ईरानी सरकार के संयम ने अमेरिकी राष्ट्रपति को कम से कम इस स्तर पर दूसरे हमले से इनकार करने का अवसर दिया है।”

अनुभवी वार्ताकार ने दावा किया कि ईरान को आंतरिक अशांति के जरिए अस्थिर करने की वॉशिंगटन की रणनीति विफल रही है और इस पर “अरबों डॉलर” खर्च किए गए, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। उन्होंने कहा कि निर्वासन में बैठकर वैकल्पिक नेतृत्व खड़ा करने की कोशिश भी नाकाम रही।

उन्होंने कहा, “वॉशिंगटन अब इस रणनीति से निराश हो चुका है—या कम से कम इसे लेकर गंभीर संदेह में है—जिसका उद्देश्य ईरान के भीतर अशांति, अस्थिरता और गृहयुद्ध पैदा कर देश को ढहाना था। इस रणनीति को सफल बनाने के लिए खर्च किए गए अरबों डॉलर व्यर्थ गए और निर्वासन में वैकल्पिक नेतृत्व तैयार करने का भ्रम भी टूट गया।”

मुसावियन ने कहा कि अमेरिका के साथ तनाव ईरान के लिए सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है। उन्होंने चेतावनी दी कि वॉशिंगटन की सैन्य कार्रवाइयाँ शत्रुता को और बढ़ा सकती हैं और पूरे क्षेत्र की स्थिरता को खतरे में डाल सकती हैं। उन्होंने दोनों देशों से संवाद और कूटनीति अपनाने का आग्रह किया।

अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेप की संभावना पर उन्होंने स्पष्ट कहा कि सीमित हमले भी शत्रुता को बढ़ाएंगे, जबकि बड़े पैमाने पर की गई कार्रवाई पूरे मध्य पूर्व की स्थिरता को खतरे में डाल देगी और क्षेत्र में अमेरिका के सहयोगियों को भी जोखिम में डाल सकती है।

उन्होंने कहा, “सीमित और लक्षित अमेरिकी सैन्य हमला शत्रुता बढ़ाने के अलावा कोई परिणाम नहीं देगा, जबकि ईरान के खिलाफ बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई पूरे क्षेत्र की स्थिरता को गंभीर रूप से खतरे में डाल देगी और मध्य पूर्व में अमेरिका के साझेदारों को भी प्रभावित करेगी। इसलिए अमेरिका को सैन्य विकल्पों को पूरी तरह से हटाना चाहिए, क्योंकि इनमें अमेरिका, ईरान और पूरे क्षेत्र के लिए भारी लागत और जोखिम शामिल हैं।”

पूर्व राजनयिक ने अमेरिका–ईरान तनाव को ईरान की विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सबसे बड़ी चुनौती बताया और कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप के लिए भी तेहरान के साथ संबंधों का प्रबंधन करना उतना ही जटिल है।

उन्होंने कहा, “कूटनीति ही शांति का एकमात्र रास्ता है। वॉशिंगटन और तेहरान को प्रत्यक्ष, सार्थक और व्यापक संवाद करना चाहिए, बशर्ते कि उसका परिणाम दोनों राजधानियों के लिए सम्मानजनक और ‘फेस-सेविंग’ हो।”

हालिया विरोध प्रदर्शनों में कमी पर बात करते हुए मुसावियन ने कहा कि ईरान के नेतृत्व को देश को स्थिर रखने के लिए जरूरी कदम उठाने चाहिए।

उन्होंने कहा, “ईरान की घरेलू स्थिति शांत है, सुरक्षा बलों ने नियंत्रण संभाल लिया है और लोगों का जीवन काफी हद तक सामान्य हो गया है।”

उन्होंने आगे कहा, “वर्तमान में आई यह सापेक्ष शांति ईरानी नेतृत्व के लिए एक अवसर है कि वह संरचनात्मक समस्याओं को हल करने और शासन व्यवस्था में सुधार के लिए बुनियादी कदम उठाए—जिसमें आर्थिक हालात सुधारना, गरीबी, भ्रष्टाचार और बेरोज़गारी खत्म करना तथा अयोग्य या भीतर से नुकसान पहुँचाने वाले अधिकारियों को हटाना शामिल है।”

गौरतलब है कि 28 दिसंबर को तेहरान के ग्रैंड बाज़ार में ईरानी रियाल के रिकॉर्ड स्तर तक गिरने के विरोध में प्रदर्शन शुरू हुए थे, जो बाद में देशव्यापी आंदोलन में बदल गए। मुद्रा में गिरावट के पीछे कई संकट रहे, जिनमें अभूतपूर्व जल संकट, बिजली कटौती, बढ़ती बेरोज़गारी और तेज़ महंगाई शामिल हैं।