ईरान संकट का असर: यूएई में हवाई यात्रियों के लिए अब ‘कैश’ से ज्यादा कीमती हुए ‘एयर माइल्स’
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दुबई/अबू धाबी:
खाड़ी क्षेत्र में ईरान से जुड़े युद्ध और अस्थिरता ने न केवल वैश्विक राजनीति को प्रभावित किया है, बल्कि यूएई (UAE) में रहने वाले प्रवासियों और स्थानीय यात्रियों के सफर करने के तरीके को भी पूरी तरह बदल दिया है। आसमान में बंद होते हवाई मार्ग (Airspace closures) और ईंधन की बढ़ती कीमतों ने एयरलाइंस को अपने रूट बदलने और किराए बढ़ाने पर मजबूर कर दिया है।
इस अनिश्चितता के बीच, संयुक्त अरब अमीरात के यात्री अब अपने ‘एयर माइल्स’ (Loyalty Points) को केवल रिवॉर्ड के तौर पर नहीं, बल्कि एक ‘फाइनेंशियल शील्ड’ (वित्तीय सुरक्षा कवच) के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं।
परेशानी: कम फ्लाइट्स, लंबा रास्ता और महंगा किराया
ईरान संकट के कारण मध्य पूर्व के कई महत्वपूर्ण हवाई गलियारे बंद कर दिए गए हैं। इससे एयरलाइंस को लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है, जिससे ईंधन की खपत बढ़ गई है। इसका सीधा असर यात्रियों की जेब पर पड़ा है:
- सीधे रास्तों की कमी: कई शहरों के लिए सीधी उड़ानें बंद हो गई हैं।
- लंबा सफर: रूट बदलने की वजह से यात्रा का समय 2 से 4 घंटे तक बढ़ गया है।
- महंगे टिकट: सीट की सप्लाई कम और मांग ज्यादा होने के कारण कैश टिकटों की कीमतें आसमान छू रही हैं।
नया ट्रेंड: ‘पर्क’ से ‘प्रोटेक्शन’ तक का सफर
पहले लोग एयर माइल्स को बिजनेस क्लास में अपग्रेड करने या छुट्टियों में फ्री टिकट पाने के लिए बचाकर रखते थे। लेकिन अब, इसे ‘एसेट क्लास’ माना जा रहा है। यात्री अब अपनी यात्रा को सुरक्षित करने के लिए माइल्स का इस्तेमाल ‘इंश्योरेंस’ की तरह कर रहे हैं।
मल्टीपल बुकिंग स्ट्रेटजी: अनिश्चितता के इस दौर में यात्री एक ही यात्रा के लिए अलग-अलग रूटों पर माइल्स के जरिए दो-तीन टिकट बुक कर रहे हैं। चूंकि माइल्स से बुक किए गए टिकटों को रद्द करना कैश टिकटों की तुलना में सस्ता पड़ता है, इसलिए यात्री आखिरी समय तक इंतजार करते हैं और जो रूट सुरक्षित लगता है, उसे चुनकर बाकी टिकट कैंसिल कर देते हैं।
बदल गई है प्राथमिकता: लग्जरी नहीं, लचीलापन (Flexibility) है जरूरी
लॉयल्टी प्रोग्राम विशेषज्ञ रोब बर्गेस के अनुसार, “इस समय माइल्स का इस्तेमाल करना कम जोखिम वाले बीमा जैसा है। वे आपको लचीलापन देते हैं, और मौजूदा स्थिति में यह लचीलापन ही सबसे मूल्यवान है।”
यही कारण है कि लोग अब माइल्स का उपयोग बिजनेस क्लास के बजाय इकोनॉमी क्लास की सीट पक्की करने के लिए कर रहे हैं ताकि कम से कम उनकी यात्रा सुनिश्चित हो सके। ‘Roame’ और ‘PointsYeah’ जैसे सर्च प्लेटफॉर्म्स पर रिवॉर्ड फ्लाइट्स की खोज में 44% से 50% तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
एयरलाइंस ने कड़े किए नियम: ‘डुप्लीकेट बुकिंग’ पर नजर
यात्रियों के बदलते व्यवहार को देखते हुए एयरलाइंस भी सतर्क हो गई हैं। कई यात्री एक साथ कई सीटें ब्लॉक कर देते हैं, जिससे इन्वेंट्री पर दबाव बढ़ता है। इसे रोकने के लिए:
- एतिहाद एयरवेज (Etihad Airways): अब कुछ अवार्ड टिकट्स पर कैंसिलेशन फीस बढ़ा दी गई है और 72 घंटे का कट-ऑफ समय तय किया गया है।
- क्वांटस (Qantas) और यूनाइटेड एयरलाइंस: ये कंपनियां अब ऐसे ऑटोमेटेड सिस्टम का उपयोग कर रही हैं जो एक ही यात्री द्वारा की गई डुप्लीकेट बुकिंग का पता लगाकर उन्हें रद्द कर देते हैं।
यूएई यात्रियों के लिए एक्सपर्ट टिप्स: कैसे बचाएं अपना पैसा?
वरिष्ठ पत्रकारों और यात्रा विशेषज्ञों ने मौजूदा संकट को देखते हुए यात्रियों को निम्नलिखित सलाह दी है:
- जल्द करें इस्तेमाल: माइल्स को ज्यादा समय तक जमा न रखें, क्योंकि एयरलाइंस समय-समय पर माइल्स की वैल्यू घटाती (Devaluation) रहती हैं।
- लचीले प्रोग्राम चुनें: उन एयरलाइंस के साथ बुकिंग करें जो कम शुल्क पर टिकट कैंसिल करने और माइल्स वापस करने की सुविधा देती हैं।
- क्रेडिट कार्ड पॉइंट्स का विविधीकरण: ऐसे क्रेडिट कार्ड चुनें जिनके पॉइंट्स को कई अलग-अलग एयरलाइंस में ट्रांसफर किया जा सके।
- कैश बनाम माइल्स: हर बार बुकिंग से पहले तुलना करें। अगर कैश किराया बहुत ज्यादा है, तभी माइल्स का इस्तेमाल करें।
निष्कर्ष: अनिश्चितता ही अब ‘न्यू नॉर्मल’ है
ईरान युद्ध ने वैश्विक विमानन क्षेत्र को एक कठिन परीक्षा में डाल दिया है। यूएई के यात्रियों के लिए अब यात्रा का मतलब केवल एक जगह से दूसरी जगह जाना नहीं, बल्कि जोखिम प्रबंधन (Risk Management) बन गया है। इस चुनौतीपूर्ण समय में ‘एयर माइल्स’ ही वह औजार है जो यात्रियों को किराए की बढ़ती मार और रूटों की अनिश्चितता से बचा सकता है।

