भारत–EU रिश्तों में नया अध्याय: वैश्विक विकास सहयोग पर बनी सहमति
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मुस्लिम नाउ ब्यूरो | नई दिल्ली
भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच रणनीतिक साझेदारी को एक नया आयाम देते हुए दोनों पक्षों ने वैश्विक विकास सहयोग के लिए एक त्रिपक्षीय (Trilateral) ढांचे पर सहमति जताई है। यह सहमति भारत–यूरोपीय संघ त्रिपक्षीय सहयोग के तहत गठित संयुक्त संचालन समिति (Joint Steering Committee–JSC) की पहली बैठक में बनी, जो बुधवार को नई दिल्ली में आयोजित हुई। इस बैठक को भारत और यूरोपीय संघ के रिश्तों में एक अहम मील का पत्थर माना जा रहा है।
विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस बैठक को भारत–EU रणनीतिक साझेदारी को मज़बूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि JSC की यह पहली बैठक न केवल दोनों पक्षों के आपसी सहयोग को नई दिशा देगी, बल्कि तीसरे देशों में विकास परियोजनाओं को मिलकर आगे बढ़ाने के लिए एक ठोस और संस्थागत ढांचा भी तैयार करेगी।
उच्चस्तरीय बैठक, साझा अध्यक्षता
संयुक्त संचालन समिति की इस पहली बैठक की सह-अध्यक्षता भारत में यूरोपीय संघ के राजदूत हर्वे डेल्फिन और विदेश मंत्रालय की संयुक्त सचिव प्रियंका चौहान ने की। बैठक में दोनों पक्षों के वरिष्ठ अधिकारियों और नीति-निर्माताओं ने हिस्सा लिया। चर्चा का मुख्य केंद्र त्रिपक्षीय सहयोग को मज़बूत करना और साझेदार देशों में विकास से जुड़ी चुनौतियों का समाधान निकालने के लिए संयुक्त तंत्र विकसित करना रहा।
रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जानकारी साझा करते हुए कहा,
“रणनीतिक साझेदारी को और मज़बूती! भारत–EU त्रिपक्षीय सहयोग के लिए संयुक्त संचालन समिति की पहली बैठक आज नई दिल्ली में आयोजित हुई। बैठक में त्रिपक्षीय सहयोग के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दोहराया गया और वैश्विक विकास से जुड़ी चुनौतियों के समाधान के लिए मिलकर काम करने के तौर-तरीकों पर सहमति बनी।”
साझा मूल्यों पर आधारित त्रिपक्षीय सहयोग
विदेश मंत्रालय के अनुसार, बैठक में इस बात पर स्पष्ट सहमति बनी कि भारत और यूरोपीय संघ साझा मूल्यों, आपसी हितों और समान विकास प्राथमिकताओं के आधार पर साझेदार देशों के साथ काम करेंगे। यह सहयोग एक सहयोगात्मक त्रिपक्षीय ढांचे के तहत किया जाएगा, जिसके माध्यम से प्राथमिक क्षेत्रों और क्षेत्रों में विकास सहयोग परियोजनाओं को लागू किया जाएगा।
रणधीर जायसवाल ने कहा कि JSC ने इस बात पर सहमति जताई है कि भारत और EU मिलकर ऐसे समाधान विकसित करेंगे जो स्थानीय ज़रूरतों के अनुरूप हों और टिकाऊ विकास को बढ़ावा दें। इसमें बुनियादी ढांचा, क्षमता निर्माण, जलवायु परिवर्तन, डिजिटल कनेक्टिविटी, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे क्षेत्र शामिल हो सकते हैं।
वैश्विक भूमिका की ओर बढ़ता भारत–EU सहयोग
विशेषज्ञों का मानना है कि यह त्रिपक्षीय ढांचा भारत और यूरोपीय संघ को वैश्विक विकास एजेंडे में एक ज़्यादा सक्रिय और प्रभावशाली भूमिका निभाने का अवसर देगा। भारत का विकासात्मक अनुभव और दक्षिण-दक्षिण सहयोग की समझ, तथा यूरोपीय संघ की तकनीकी क्षमता और वित्तीय संसाधन—दोनों मिलकर तीसरे देशों में प्रभावी विकास मॉडल पेश कर सकते हैं।
यह पहल ऐसे समय में सामने आई है जब दुनिया भू-राजनीतिक अस्थिरता, जलवायु संकट और आर्थिक अनिश्चितताओं से जूझ रही है। ऐसे में भारत–EU का यह साझा प्रयास वैश्विक स्तर पर स्थिरता और समावेशी विकास को बढ़ावा देने वाला साबित हो सकता है।
भारत–EU FTA पर भी तेज़ हुई चर्चा
इसी बीच, भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौते (Free Trade Agreement–FTA) को लेकर भी हलचल तेज़ हो गई है। मंगलवार को जारी एक बयान के अनुसार, भारतीय उद्योग जगत के नेताओं, नीति-निर्माताओं और राजनयिकों ने एकजुट होकर इस बात पर ज़ोर दिया कि भारत–EU FTA को जल्द से जल्द अंतिम रूप दिया जाना चाहिए।
उनका तर्क है कि मौजूदा वैश्विक अनिश्चितताओं के दौर में यह समझौता निर्यात वृद्धि, आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती और दीर्घकालिक निवेश के लिए बेहद अहम है। उद्योग जगत का मानना है कि FTA से भारत और यूरोप—दोनों को आर्थिक रूप से बड़ा लाभ होगा और दोनों की अर्थव्यवस्थाएं एक-दूसरे के और करीब आएंगी।
उच्चस्तरीय संवाद में उभरी साझा राय
यह राय “इंडिया–EU समिट: FTA एंड द रोड अहेड” शीर्षक से आयोजित एक उच्चस्तरीय संवाद के दौरान सामने आई। इस कार्यक्रम का आयोजन चिंतन रिसर्च फाउंडेशन (CRF) और सेंटर फॉर ग्लोबल इंडिया इनसाइट्स (CGII) ने संयुक्त रूप से किया था। यह संवाद नई दिल्ली स्थित इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित हुआ।
इस चर्चा में उद्योग जगत के दिग्गजों, वरिष्ठ नीति-निर्माताओं और राजनयिकों ने हिस्सा लिया और भारत–EU FTA को लेकर अपने विचार साझा किए। वक्ताओं ने कहा कि यह समझौता न केवल व्यापार बढ़ाने का जरिया होगा, बल्कि यह भारत और यूरोपीय संघ के बीच रणनीतिक भरोसे को भी मज़बूत करेगा।
दावोस के बाद बढ़ा राजनीतिक उत्साह
इस उच्चस्तरीय संवाद की पृष्ठभूमि में विश्व आर्थिक मंच (WEF) की दावोस बैठक के दौरान भारत–EU FTA को लेकर बनी नई राजनीतिक गति भी अहम रही। दावोस में हुई चर्चाओं के बाद यह संकेत मिले हैं कि दोनों पक्ष अब इस लंबे समय से लंबित समझौते को आगे बढ़ाने के लिए गंभीर हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि FTA पर सहमति बनती है, तो यह भारत के लिए यूरोपीय बाज़ारों तक पहुंच को आसान बनाएगा, वहीं यूरोपीय कंपनियों को भारत जैसे बड़े और उभरते बाज़ार में निवेश के नए अवसर मिलेंगे।
रणनीतिक साझेदारी का विस्तार
भारत और यूरोपीय संघ के बीच हाल के वर्षों में सहयोग केवल व्यापार तक सीमित नहीं रहा है। रक्षा, जलवायु परिवर्तन, स्वच्छ ऊर्जा, डिजिटल तकनीक और अब वैश्विक विकास सहयोग—हर क्षेत्र में रिश्ते मज़बूत हुए हैं। JSC की पहली बैठक और त्रिपक्षीय ढांचे पर बनी सहमति इसी विस्तृत और गहराते रिश्ते का संकेत है।
राजनयिक हलकों में यह माना जा रहा है कि आने वाले समय में भारत और EU न केवल द्विपक्षीय स्तर पर, बल्कि वैश्विक मंचों पर भी मिलकर बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। विकास सहयोग के इस नए मॉडल के जरिए दोनों पक्ष दुनिया को यह संदेश देना चाहते हैं कि साझेदारी और साझा मूल्यों के आधार पर वैश्विक चुनौतियों का समाधान संभव है।
निष्कर्ष
नई दिल्ली में आयोजित संयुक्त संचालन समिति की पहली बैठक ने यह साफ कर दिया है कि भारत और यूरोपीय संघ अपने रिश्तों को अगले स्तर पर ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। त्रिपक्षीय विकास सहयोग का यह ढांचा, साथ ही भारत–EU FTA को लेकर बढ़ती सक्रियता, दोनों पक्षों के बीच गहराते रणनीतिक और आर्थिक संबंधों का मजबूत संकेत है। आने वाले महीनों में इन पहलों का ठोस रूप लेना न केवल भारत और यूरोप, बल्कि वैश्विक विकास परिदृश्य के लिए भी अहम साबित हो सकता है।
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