Culture

खाड़ी देशों की ‘बुरी सोहबत’ और ईरान-इजरायल युद्ध के बीच फीकी पड़ती ईद 2026 की रौनक

मुस्लिम नाउ विशेष

मेरी गांव वाली दादी अम्मा अक्सर एक कहावत दोहराया करती थीं—‘‘अच्छे के साथ रहोगे तो खाओगे बीड़ा पान, बुरे के साथ रहोगे तो कटाओगे दोनों कान.’’ आज के भू-राजनीतिक (Geopolitical) हालात को देखें तो यह कहावत मुस्लिम जगत, विशेषकर खाड़ी देशों पर पूरी तरह सटीक बैठती है। दुनिया की मुस्लिम बिरादरी की मुख्यधारा से हटकर इजरायल के साथ ‘खुली और गुप्त’ दोस्ती का खामियाजा आज ये मुल्क इस कदर भुगत रहे हैं कि ईद का जश्न तो दूर, आसमान से बरसते बारूद ने अमन-चैन छीन लिया है।

जश्न की जगह सन्नाटा: खाड़ी देशों का बदलता मंजर

एक समय था जब खाड़ी देशों (Gulf Countries) में ईद से हफ़्ता भर पहले ही उत्सव का माहौल शुरू हो जाता था। पर्यटन विभाग लुभावने पैकेज लाता था, होटलों और रिसॉर्ट्स में पैर रखने की जगह नहीं होती थी और एयरलाइंस अपनी विशेष सेवाओं से आसमान को गुलजार रखती थीं। लेकिन आज तस्वीर इसके उलट है।

रमजान के पवित्र महीने में अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर की गई बमबारी और उसके जवाब में ईरान के ‘पलटवार’ ने पूरे समीकरण बदल दिए हैं। ईरान ने खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी ठिकानों और इजरायली कंपनियों के मुख्यालयों को जिस तरह मिसाइलों से निशाना बनाया है, उसने यूएई और सऊदी अरब जैसे देशों की हवाई सेवाओं को ठप कर दिया है। आज ‘गल्फ न्यूज’ जैसे प्रतिष्ठित अखबार ईद के जश्न की खबरों के बजाय ‘डिजिटल ईद’ मनाने के तरीके बता रहे हैं।

पड़ोसी मुल्कों में कोहराम और भारत पर असर

संकट सिर्फ खाड़ी तक सीमित नहीं है। पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच भी तनाव चरम पर है। ईद से ठीक पहले पाकिस्तान द्वारा अफगानिस्तान पर किए गए हमले में सैकड़ों लोगों की जान जाना इस बात का प्रमाण है कि मुस्लिम जगत आपसी कलह और बाहरी हस्तक्षेप की दोहरी मार झेल रहा है।

इस युद्ध का वैश्विक असर कुछ इस प्रकार है:

  • महंगाई की मार: इजरायल-ईरान जंग के कारण कच्चे तेल (Crude Oil) और गैस की कीमतों में आग लग गई है।
  • आपूर्ति श्रृंखला बाधित: ईरान द्वारा जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की नाकेबंदी से चीन और रूस को छोड़कर बाकी दुनिया के लिए तेल की सप्लाई मुश्किल हो गई है।
  • भारत में स्थिति: भारत में भी गैस की किल्लत ने रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। साथ ही, ईद के ऐन पहले नवरात्र शुरू होने से उत्तराखंड और हरियाणा जैसे राज्यों में मांस की बिक्री पर प्रतिबंध ने उत्सव के पारंपरिक खान-पान को प्रभावित किया है।

तुर्की में विद्रोह और महिलाओं का गुस्सा

इस तनावपूर्ण माहौल के बीच तुर्की से आ रही खबरें चौंकाने वाली हैं। तुर्की के लोग इस बात से खफा हैं कि उनकी सरकार ईरान का साथ देने के बजाय परोक्ष रूप से इजरायल की मदद कर रही है। सोशल मीडिया पर दावों के अनुसार, तरावीह की नमाज के बाद महिलाओं ने विरोध स्वरूप अपने हिजाब उतारकर मर्दों पर फेंक दिए। उनका संदेश साफ था—जब ईरान पर जुल्म हो रहा है, तब मुस्लिम नेतृत्व खामोश क्यों है?

‘बदनियती’ और निर्भरता का नतीजा

सवाल यह उठता है कि आखिर संपन्न खाड़ी देश आज इस मोड़ पर क्यों खड़े हैं? इसका सीधा उत्तर है—अत्यधिक निर्भरता। इन देशों ने खुद को सैन्य और औद्योगिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के बजाय अमेरिका और इजरायल पर भरोसा किया।

“यदि खाड़ी देशों की धरती पर अमेरिकी सैन्य बेस और इजरायली कंपनियों के दफ्तर न होते, तो ईरान उन्हें निशाना नहीं बनाता। आज ये देश इजरायल को आंखें दिखाने के बजाय अपनी चुप्पी की भारी कीमत चुका रहे हैं।”

निष्कर्ष: फीकी पड़ी दुनिया की ईद

आज दुबई का हवाई अड्डा बंद है, बाजारों में सन्नाटा है और लोग घरों में दुबक कर ईद मनाने को मजबूर हैं। खाड़ी देशों की ‘बदनियती’ और अमेरिका-इजरायल की ‘दादागिरी’ ने इस बार पूरी दुनिया की ईद का स्वाद फीका कर दिया है। यह समय मुस्लिम मुल्कों के लिए आत्मचिंतन का है कि वे ‘बीड़ा पान’ खाना चाहते हैं या अपनी संप्रभुता और संस्कृति को दांव पर लगाकर अपमान का कड़वा घूंट पीना चाहते हैं।