तकनीकी शिक्षा से संवरेगा मुस्लिम बेटियों का भविष्य: पीएम मोदी का विजन
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विशेष रिपोर्ट: नई दिल्ली/भुवनेश्वर
भारत की विकास यात्रा में अब एक नई इबारत लिखी जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साल 2030 तक 20 लाख युवाओं को रोजगार के योग्य बनाने का जो लक्ष्य रखा है, उसकी गूंज अब ओडिशा के गलियारों में सुनाई दे रही है। यह केवल एक सरकारी योजना नहीं है, बल्कि उन हजारों परिवारों के लिए उम्मीद की एक किरण है जो अपनी बेटियों को घर की चारदीवारी के भीतर सुरक्षित रखते हुए आत्मनिर्भर बनाना चाहते हैं। इस पहल का सबसे खूबसूरत पहलू यह है कि यह मुस्लिम समुदाय की उन छात्राओं के लिए वरदान साबित हो रहा है, जो रूढ़िवादी परंपराओं के कारण बाहर जाकर काम नहीं कर पाती थीं।
नई तकनीक और बदलता नजरिया
कलिंगा यूनिवर्सिटी (रायपुर), जी इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिएटिव आर्ट (ZICA) और जी लर्न ने ओडिशा में एनिमेशन, विजुअल इफेक्ट्स (VFX) और ग्राफिक डिजाइन के तीन साल के विशेष कोर्स शुरू किए हैं। ये कोर्स पूरी तरह से बाजार की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किए गए हैं। आज का युग डिजिटल मीडिया और ई-कॉमर्स का है। चाहे वह अमेज़न पर दिखने वाले उत्पाद हों या फिल्मों में इस्तेमाल होने वाले हैरतअंगेज दृश्य, इन सबके पीछे कुशल तकनीकी कलाकारों का हाथ होता है।
प्रधानमंत्री का विजन बहुत स्पष्ट है। वे चाहते हैं कि भारत का युवा केवल डिग्री लेकर न घूमे, बल्कि उसके पास ऐसा हुनर हो जिसे दुनिया सलाम करे। ओडिशा में शुरू किए गए ये प्रोग्राम इसी दिशा में एक बड़ा कदम हैं।
मुस्लिम छात्राओं के लिए क्यों है यह खास?
इस पूरी पहल का सबसे महत्वपूर्ण मोड़ सामाजिक बदलाव है। कटक की एक छात्रा शाहिस्ता शिफा की कहानी इस बदलाव की गवाही देती है। शाहिस्ता ने अपनी 12वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद ZICA में दाखिला लिया है। उनका कहना है कि उनके परिवार के कुछ लोग काफी रूढ़िवादी हैं। उनके लिए घर से बाहर निकलकर किसी दफ्तर में नौकरी करना लगभग असंभव था। लेकिन ग्राफिक डिजाइनिंग और एनिमेशन ने उनके लिए घर बैठे ही पूरी दुनिया के दरवाजे खोल दिए हैं।
शाहिस्ता जैसे कई मुस्लिम छात्राएं अब ग्राफिक डिजाइन, पोस्टर मेकिंग और 3D मॉडलिंग के जरिए फ्रीलांसिंग कर रही हैं। सोशल मीडिया के जरिए उन्हें प्रोजेक्ट्स मिल रहे हैं। वे अपने घर की मर्यादा में रहकर न केवल अपनी स्किल्स सुधार रही हैं, बल्कि परिवार की आर्थिक मदद भी कर रही हैं। यह तकनीकी शिक्षा के माध्यम से महिला सशक्तिकरण का एक अनूठा उदाहरण है।
सिद्धांत से ज्यादा अभ्यास पर जोर
जी लर्न के नेशनल एकेडमिक हेड काशीनाथ पात्रो ने इस मिशन के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य प्रधानमंत्री के सपने को धरातल पर उतारना है। इन कोर्सेज को इस तरह बनाया गया है कि इसमें 70 फीसदी पढ़ाई प्रैक्टिकल यानी अभ्यास पर आधारित है। केवल 30 फीसदी ही थ्योरी है। जब बच्चा अपने हाथों से डिजाइन बनाता है और कंप्यूटर पर सॉफ्टवेयर के साथ खेलता है, तो उसका आत्मविश्वास कई गुना बढ़ जाता है।
पात्रो बताते हैं कि उनके संस्थानों के 50 फीसदी छात्रों को कोर्स पूरा होने से पहले ही अच्छी कंपनियों में प्लेसमेंट मिल रहा है। जो छात्र दफ्तर नहीं जाना चाहते, उनके लिए ‘वर्क फ्रॉम होम’ का विकल्प हमेशा खुला है। आज ई-कॉमर्स साइट्स पर हम जो भी देखते हैं, वह सब 3D मॉडल्स होते हैं। छात्र घर बैठकर ये मॉडल्स बना सकते हैं और फ्लिपकार्ट या अमेज़न जैसी बड़ी कंपनियों को सप्लाई कर सकते हैं।
ग्लोबल मार्केट में भारत की धमक
भारत भले ही आज हार्डवेयर के मामले में कुछ देशों से पीछे हो, लेकिन एनिमेशन और विजुअल इफेक्ट्स में हम दुनिया के सिरमौर बनते जा रहे हैं। हॉलीवुड, बॉलीवुड और टॉलीवुड की बड़ी फिल्मों के काम अब भारतीय युवाओं के हाथों में आ रहे हैं। ओडिशा में सिखाया जा रहा यह हुनर छात्रों को अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रोजेक्ट्स पर काम करने के लिए तैयार कर रहा है।
यह केवल एक कौशल विकास कार्यक्रम नहीं है। यह उन बाधाओं को तोड़ने का जरिया है जो अक्सर धर्म या परंपरा के नाम पर लड़कियों के रास्ते में आती थीं। तकनीकी शिक्षा ने यह साबित कर दिया है कि हुनर का कोई धर्म नहीं होता, लेकिन यह धर्म के पालन के साथ भी बखूबी निभाया जा सकता है।
निष्कर्ष: आत्मनिर्भर भारत की ओर बढ़ते कदम
प्रधानमंत्री मोदी का 2030 का लक्ष्य अब दूर नहीं लगता। जब मुस्लिम बेटियां घर की शांति और सुरक्षा के साथ वैश्विक डिजिटल अर्थव्यवस्था का हिस्सा बनेंगी, तभी असली समावेशी विकास होगा। ओडिशा की यह शुरुआत एक बड़े बदलाव का संकेत है। यह उन सभी के लिए जवाब है जो सोचते थे कि तकनीक और परंपरा एक साथ नहीं चल सकते। शिक्षा का यह डिजिटल मॉडल भारत की मुस्लिम बेटियों को आत्मनिर्भर बनाने का सबसे सशक्त हथियार साबित हो रहा है।
आज शाहिस्ता शिफा जैसी लड़कियां अपनी आंखों में बड़े सपने लेकर कंप्यूटर स्क्रीन पर नई दुनिया रच रही हैं। उनके लिए 2030 महज एक साल नहीं है, बल्कि वह वक्त है जब उनकी बनाई कला पूरी दुनिया देखेगी। यह है असली भारत की बदलती तस्वीर, जहां तकनीक अब हर दहलीज को पार कर रही है।

