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यूएई में मोदी दौरे पर सोशल मीडिया संग्राम

प्रधानमंत्री Narendra Modi की यूएई यात्रा से पहले दिया गया एक बयान सोशल मीडिया पर बहस का कारण बन गया है। यूएई की अंतर्राष्ट्रीय सहयोग राज्य मंत्री Reem Al Hashimy ने 15 मई 2026 को पीएम मोदी के दौरे को लेकर उत्साह जताया। इसके बाद सोशल मीडिया पर भारत, यूएई और इजरायल को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं शुरू हो गईं।

रीम अल हाशिमी ने अबू धाबी में कहा कि यूएई प्रधानमंत्री मोदी के दौरे का बेसब्री से इंतजार कर रहा है। उन्होंने मोदी को भारत और यूएई की दोस्ती का अहम चेहरा बताया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के रिश्ते लगातार मजबूत हुए हैं और दोनों देशों के शीर्ष नेता साल में कई बार मिलते रहे हैं।

उन्होंने कहा कि यूएई के राष्ट्रपति Mohammed bin Zayed Al Nahyan इस साल जनवरी में भारत आए थे। वहीं यूएई के क्राउन प्रिंस फरवरी में एआई समिट में शामिल हुए थे। रीम अल हाशिमी ने कहा कि मोदी का यह दौरा दोनों देशों की पुरानी साझेदारी को और मजबूत करेगा।

बयान सामने आते ही सोशल मीडिया पर अलग अलग तरह की प्रतिक्रियाएं आने लगीं। कुछ लोगों ने भारत और यूएई की बढ़ती साझेदारी की तारीफ की। वहीं कुछ यूजर्स ने दोनों देशों को इजरायल का करीबी बताते हुए आलोचना शुरू कर दी।

कई पोस्ट में गाजा युद्ध का जिक्र किया गया। कुछ यूजर्स ने आरोप लगाया कि भारत और यूएई दोनों ने इजरायल के खिलाफ खुलकर सख्त रुख नहीं अपनाया। सोशल मीडिया पर शेयर किए गए पोस्ट में गुजरात दंगों, गाजा युद्ध और सूडान संकट को जोड़कर भी टिप्पणियां की गईं।

एक यूजर ने लिखा कि “तीन हार चुके लोग एक साथ आ रहे हैं।” पोस्ट में भारत, इजरायल और सूडान की राजनीति का जिक्र किया गया। दूसरी तरफ कुछ लोगों ने यूएई के नेतृत्व की तारीफ करते हुए कहा कि दुबई और अबू धाबी अभी भी दुनिया की सबसे तेजी से आगे बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हैं।

कुछ प्रतिक्रियाएं बेहद विवादित भी रहीं। कुछ सोशल मीडिया अकाउंट्स ने रीम अल हाशिमी और उनके परिवार को लेकर निजी आरोप लगाए। यहां तक कि उनका नाम अमेरिकी कारोबारी और यौन अपराधों के आरोपी रहे Jeffrey Epstein से जोड़ा गया। इन दावों के समर्थन में सोशल मीडिया पर कुछ तस्वीरें और स्क्रीनशॉट भी शेयर किए गए।

हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। अब तक किसी आधिकारिक एजेंसी या विश्वसनीय अंतरराष्ट्रीय जांच में रीम अल हाशिमी या उनके परिवार के खिलाफ ऐसे आरोप साबित नहीं हुए हैं। सोशल मीडिया पर चल रहे दावों को लेकर यूएई सरकार की तरफ से भी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

भारत और यूएई के रिश्ते पिछले कुछ वर्षों में तेजी से मजबूत हुए हैं। व्यापार, ऊर्जा, रक्षा और तकनीक जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों का सहयोग लगातार बढ़ा है। भारत यूएई का बड़ा व्यापारिक साझेदार है। वहीं खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीयों की सबसे बड़ी आबादी भी यूएई में रहती है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि पश्चिम एशिया की राजनीति तेजी से बदल रही है। इजरायल, ईरान, अमेरिका और खाड़ी देशों के बीच नए समीकरण बन रहे हैं। ऐसे माहौल में भारत संतुलित विदेश नीति अपनाने की कोशिश कर रहा है। भारत ने एक तरफ इजरायल के साथ रिश्ते मजबूत किए हैं तो दूसरी तरफ खाड़ी देशों और ईरान से भी अपने संबंध बनाए रखे हैं।

गाजा युद्ध के बाद सोशल मीडिया पर भावनात्मक और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं लगातार तेज हुई हैं। यही वजह है कि किसी भी कूटनीतिक बयान को लोग अपने अपने नजरिए से देखने लगे हैं। पीएम मोदी की यूएई यात्रा को लेकर भी यही माहौल देखने को मिल रहा है।

कुछ यूजर्स ने इसे भारत और यूएई की रणनीतिक साझेदारी बताया। वहीं कुछ लोगों ने इसे पश्चिम एशिया की मौजूदा राजनीति से जोड़कर आलोचना की। सोशल मीडिया पर यह बहस अभी भी जारी है।

फिलहाल सबकी नजर पीएम मोदी की यूएई यात्रा पर है। माना जा रहा है कि इस दौरे में व्यापार, निवेश, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर अहम बातचीत हो सकती है।

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