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गाजा फ्लोटिला पर पत्रकारों की गिरफ्तारी

लंदन।

गाजा के लिए राहत सामग्री लेकर जा रहे ग्लोबल सुमूद फ्लोटिला पर सवार पत्रकारों की गिरफ्तारी को लेकर अंतरराष्ट्रीय चिंता बढ़ गई है। पत्रकारों की सुरक्षा और प्रेस की स्वतंत्रता पर काम करने वाली संस्था कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स (CPJ) ने इजरायल से हिरासत में लिए गए पत्रकारों को तुरंत रिहा करने की मांग की है।

यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब गाजा युद्ध और मानवीय संकट को लेकर दुनिया पहले ही गंभीर चिंता जता रही है। राहत मिशन पर निकले जहाजों को इजरायली बलों ने सोमवार को साइप्रस के पास अंतरराष्ट्रीय समुद्री क्षेत्र में रोक लिया। दावा किया गया कि यह काफिला गाजा पहुंचने की कोशिश कर रहा था।

फ्लोटिला में शामिल लोगों का कहना है कि उनका उद्देश्य युद्ध प्रभावित गाजा के लोगों तक राहत सामग्री पहुंचाना था। लेकिन इजरायल ने इसे सुरक्षा से जुड़ा मामला बताते हुए कार्रवाई की।

शुरुआत में हिरासत में लिए गए लोगों को एक अज्ञात स्थान पर ले जाया गया। उनकी कानूनी स्थिति को लेकर भी स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई। इससे मानवाधिकार संगठनों और मीडिया संस्थानों की चिंता बढ़ गई।

इजरायली मानवाधिकार संगठन अदालाह के मुताबिक, हिरासत में लिए गए कार्यकर्ताओं और पत्रकारों को बाद में अशदोद बंदरगाह ले जाया गया। इस बीच दुनिया के कई हिस्सों से आलोचना तेज हो गई है।

सीपीजे की क्षेत्रीय निदेशक सारा कुदाह ने इस कार्रवाई पर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि पत्रकारों के साथ इजरायल का व्यवहार कोई नई बात नहीं है। गाजा की रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों की गिरफ्तारी, हमले और मौत के मामले पहले भी सामने आते रहे हैं।

उन्होंने साफ कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत पत्रकार नागरिक माने जाते हैं। यदि वे वैध पत्रकारिता कर रहे हैं, तो उन्हें मनमाने तरीके से हिरासत में नहीं लिया जा सकता। उन्होंने इजरायल से सभी पत्रकारों को तत्काल रिहा करने और प्रेस पर हमलों के मामले में जवाबदेही सुनिश्चित करने की अपील की।

सीपीजे के अनुसार फ्लोटिला में कम से कम सात पत्रकार और मीडिया कर्मी मौजूद थे। इनमें इंडोनेशिया के पत्रकार आंद्रे प्रसत्यो नुग्रोहो भी शामिल हैं। उनके संस्थान टेम्पो मीडिया ग्रुप ने भी चिंता जताई है। संस्था ने कहा कि इजरायली अधिकारियों की ओर से अब तक पर्याप्त जानकारी नहीं दी गई है, जिससे पत्रकार की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी है।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच एक वीडियो ने और विवाद खड़ा कर दिया। इजरायल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन ग्वीर का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। वीडियो में वह हिरासत में लिए गए कार्यकर्ताओं के सामने कथित तौर पर व्यंग्यात्मक अंदाज में बोलते नजर आए।

बताया गया कि कुछ कार्यकर्ताओं के हाथ बंधे हुए थे। उनकी आंखों पर पट्टी थी और उन्हें घुटनों के बल बैठाया गया था। इसी दौरान मंत्री ने कथित तौर पर कहा, “इजरायल में आपका स्वागत है। यहां घर के मालिक हम हैं।”

इस वीडियो पर कई देशों में नाराजगी देखी गई। इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने इसे “मानवीय गरिमा के खिलाफ” बताया। उन्होंने मंत्री के व्यवहार को अस्वीकार्य कहा और औपचारिक माफी की मांग की।

ग्लोबल सुमूद फ्लोटिला का दावा है कि अप्रैल के अंत से अब तक राहत लेकर गाजा की ओर बढ़ रहे 50 जहाजों को रोका जा चुका है। समूह का कहना है कि 40 से अधिक देशों के 428 लोगों को रोका गया। कानूनी विशेषज्ञों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने इसे अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून का उल्लंघन बताया है।

फ्लोटिला समूह ने कुछ वीडियो भी जारी किए हैं। इनमें कथित तौर पर कमांडो बलों को एक जहाज पर गोलीबारी करते हुए दिखाया गया है। हालांकि इजरायल के विदेश मंत्रालय ने इन आरोपों को खारिज किया है। मंत्रालय का कहना है कि किसी तरह की जीवित गोलियों का इस्तेमाल नहीं किया गया।

इजरायल ने फ्लोटिला को “उकसावे वाली कार्रवाई” बताया है। उसका आरोप है कि इस तरह के अभियान हमास को अप्रत्यक्ष मदद पहुंचाने की कोशिश हैं। गाजा पर नियंत्रण रखने वाले हमास को लेकर इजरायल पहले से कड़ा रुख अपनाता रहा है।

इससे पहले पिछले महीने भी इसी फ्लोटिला के 21 जहाजों को क्रीट तट के पास रोका गया था। ताजा काफिला 14 मई को तुर्किये के मारमारिस बंदरगाह से रवाना हुआ था। इसमें खाद्य सामग्री और राहत सामान ले जाए जाने की बात कही गई थी।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि हिरासत में लिए गए पत्रकारों और कार्यकर्ताओं का आगे क्या होगा। साथ ही यह बहस भी तेज हो गई है कि क्या युद्ध क्षेत्र में मानवीय सहायता और पत्रकारिता को सुरक्षा चिंताओं के नाम पर रोका जा सकता है।

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