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गाजा मानवीय संकट: फिलिस्तीनी राजदूत ने भारत से लगाई तत्काल मेडिकल सहायता की गुहार

नई दिल्ली:

गाजा पट्टी और वेस्ट बैंक में जारी भीषण सैन्य संघर्ष अब अपने 1,000वें दिन के बेहद करीब पहुंच चुका है। इस लंबे समय से जारी संकट के बीच फिलिस्तीन में स्वास्थ्य और जीवन की स्थिति पूरी तरह चरमरा गई है। इस गंभीर मानवीय त्रासदी को देखते हुए भारत में फिलिस्तीन के राजदूत अब्दुल्ला एम. अबू शाविश (Ambassador Abdullah M. Abu Shawesh) ने भारत सरकार, भारतीय नागरिक समाज और देश के प्रमुख मानवीय संगठनों से तत्काल चिकित्सा सहायता और जीवन रक्षक दवाइयां उपलब्ध कराने की एक बेहद भावुक अपील की है।

नई दिल्ली में एक विस्तृत इंटरव्यू और फिलिस्तीनी दूतावास द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस नोट में इस बात को रेखांकित किया गया है कि गाजा की स्वास्थ्य व्यवस्था (Gaza Healthcare System Crisis) अब पूरी तरह से वेंटिलेटर पर आ चुकी है और अगर तुरंत अंतरराष्ट्रीय मदद नहीं मिली, तो हजारों बेकसूर मरीज असमय मौत के गाल में समा जाएंगे।

986 दिन का संघर्ष: गाजा के अस्पतालों की जमीनी हकीकत

फिलिस्तीनी दूतावास द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, इजरायल के निरंतर सैन्य अभियानों और बमबारी के कारण चिकित्सा बुनियादी ढांचे को अभूतपूर्व नुकसान पहुंचा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की हालिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए राजदूत ने बताया कि गाजा पट्टी में मौजूद कुल 36 अस्पतालों में से केवल 19 अस्पताल ही आंशिक रूप से काम कर रहे हैं

ये 19 अस्पताल भी केवल नाममात्र की आपातकालीन सेवाएं दे पा रहे हैं, क्योंकि इनके पास न तो पर्याप्त बिजली है और न ही बुनियादी संसाधन। अंतरराष्ट्रीय सहायता एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि गाजा की चिकित्सा प्रणाली अपनी अंतिम सीमा को भी पार कर चुकी है।

इन जरूरी चिकित्सा सामग्रियों की है भारी किल्लत:

  • अस्पताल के जनरेटर चलाने के लिए आवश्यक ईंधन (Fuel for Hospital Generators)
  • एनेस्थीसिया और जीवन रक्षक एंटीबायोटिक्स
  • डायलिसिस उपकरण और ब्लड बैंक की सुविधाएं
  • इंसुलिन और गंभीर ऑपरेशनों में इस्तेमाल होने वाले सर्जिकल टांके

मलबे में तब्दील शहर और बीमारियों का नया खतरा

संयुक्त राष्ट्र (UN), विश्व स्वास्थ्य संगठन और फिलिस्तीनी शरणार्थियों के लिए काम करने वाली एजेंसी (UNRWA) ने संयुक्त रूप से आगाह किया है कि गाजा सिर्फ बमबारी से ही नहीं, बल्कि अब महामारियों से भी तबाह होने की कगार पर है। युद्ध क्षेत्र में लाखों इमारतों के जमींदोज होने के बाद, मलबे के नीचे 12,000 से अधिक मानव शव दबे होने की आशंका है। इसके साथ ही कब्रिस्तानों के व्यापक विनाश के कारण स्थिति और भयावह हो गई है।

विस्थापित लोगों के लिए बनाए गए भीड़भाड़ वाले राहत शिविरों में सीवेज व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। पीने के साफ पानी की भारी किल्लत और चारों तरफ कचरे के ढेरों के कारण चूहों, सांपों और मच्छरों की तादाद खतरनाक रूप से बढ़ गई है। इसके परिणामस्वरूप शरणार्थी शिविरों में त्वचा रोग, जूँ, पिस्सू और चूहों से फैलने वाले घातक संक्रमणों के मामले तेजी से दर्ज किए जा रहे हैं।

बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर बड़ा आघात:

इस मानवीय संकट में सबसे ज्यादा प्रभावित बच्चे और बुजुर्ग हो रहे हैं। हजारों बच्चे गंभीर कुपोषण (Severe Malnutrition in Children) का शिकार हैं। अंतरराष्ट्रीय बाल कल्याण संगठनों के अनुसार, गाजा में रहने वाले लगभग हर बच्चे को इस समय गंभीर मानसिक आघात (Psychological Trauma) से उबरने के लिए मनोवैज्ञानिक सहायता की सख्त जरूरत है।

वेस्ट बैंक और पूर्वी यरुशलम में भी गहराया आर्थिक संकट

त्रासदी केवल गाजा पट्टी तक सीमित नहीं है; इजरायल के कब्जे वाले वेस्ट बैंक (West Bank) और पूर्वी यरुशलम में भी चिकित्सा संकट लगातार गहराता जा रहा है। फिलिस्तीनी अधिकारियों के मुताबिक, इजरायल द्वारा फिलिस्तीनी कर राजस्व (Tax Revenue Withholding) पर लगाई गई निरंतर रोक और वित्तीय प्रतिबंधों के कारण सरकारी खजाना लगभग खाली हो चुका है।

चूंकि फिलिस्तीन की एक बहुत बड़ी आबादी पूरी तरह सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर निर्भर है, इसलिए फंड की इस भारी कमी ने पूरी सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को पंगु बना दिया है।

स्वास्थ्य सेवा के आंकड़े (वेस्ट बैंक सरकारी अस्पताल)पिछला वर्षचालू वर्ष (2026)
कुल किए गए सर्जिकल ऑपरेशन~65,000केवल 19,500
संसाधनों की कमी से स्थगित ऑपरेशन11,000 से अधिक

दवाओं, आधुनिक चिकित्सा उपकरणों और परिचालन संसाधनों की इसी कमी के कारण साल 2026 की शुरुआत से अब तक 11,000 से अधिक निर्धारित ऑपरेशनों को टालना पड़ा है, जिससे दिल और गुर्दे की बीमारियों से पीड़ित मरीजों की जान दांव पर लग गई है।

दवाओं का स्टॉक शून्य: कैंसर मरीजों पर मंडराया मौत का साया

फिलिस्तीनी स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, इस समय देश में लगभग 520 आवश्यक बुनियादी दवाओं की सख्त जरूरत है, जिनमें से 180 दवाएं पूरी तरह से खत्म हो चुकी हैं। सबसे दिल दहला देने वाली स्थिति कैंसर के मरीजों की है। कैंसर और ट्यूमर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली 97 विशिष्ट दवाओं में से 50 का स्टॉक पूरी तरह शून्य हो चुका है, जिसके कारण लगभग 4,000 कैंसर रोगियों का जीवन सीधे तौर पर खतरे में आ गया है। इसके अलावा, गुर्दे के मरीजों के लिए डायलिसिस फिल्टर और ओपन हार्ट सर्जरी में इस्तेमाल होने वाले विशेष धागे भी केंद्रीय गोदामों में समाप्त होने की कगार पर हैं।

भारत की ‘आरोग्य मैत्री’ पहल से बंधी बड़ी उम्मीदें

इस अभूतपूर्व संकट से निपटने और जीवन रक्षक दवाओं की निर्बाध आपूर्ति बहाल करने के लिए फिलिस्तीनी स्वास्थ्य क्षेत्र को तत्काल 10 करोड़ अमेरिकी डॉलर (Approx. $100 Million) की अंतरराष्ट्रीय वित्तीय या चिकित्सा सहायता की आवश्यकता है। राजदूत अब्दुल्ला एम. अबू शाविश ने इस नाजुक मोड़ पर भारत की ओर उम्मीद भरी नजरों से देखा है।

उन्होंने भारत के साथ फिलिस्तीन के ऐतिहासिक संबंधों को याद करते हुए कहा कि 1947 में महात्मा गांधी के दौर से ही भारत ने हमेशा फिलिस्तीन के प्रति एक न्यायसंगत और मानवीय रुख अपनाया है। उन्होंने भारत को एक ‘बड़े भाई’ की संज्ञा दी।

आरोग्य मैत्री का विशेष उल्लेख:

फिलिस्तीनी दूतावास ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी “आरोग्य मैत्री” (Aarogya Maitri Initiative) योजना का विशेष रूप से जिक्र किया। इस वैश्विक मानवीय पहल के तहत भारत सरकार प्राकृतिक आपदाओं, युद्ध या मानवीय संकट से प्रभावित विकासशील और मित्र देशों को तत्काल आपातकालीन मेडिकल उत्पाद और चिकित्सा सहायता प्रदान करती है। फिलिस्तीनी राजनयिक ने उम्मीद जताई है कि भारत अपनी इसी वैश्विक करुणा की परंपरा को निभाते हुए गाजा के उत्पीड़ित नागरिकों के लिए भी मदद का हाथ बढ़ाएगा।

निष्कर्ष: वैश्विक अंतरात्मा की असली परीक्षा

फिलिस्तीनी राजदूत ने अपने वक्तव्य का समापन करते हुए वैश्विक बिरादरी को झकझोरा है। उन्होंने साफ कहा कि गाजा और वेस्ट बैंक में उपजा यह भयावह स्वास्थ्य संकट अब केवल एक राजनीतिक या क्षेत्रीय मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह पूरी मानवता और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की अंतरात्मा की कड़ी परीक्षा है। दो-राज्य समाधान (Two-State Solution) का समर्थन करने वाले 161 से अधिक देशों और संयुक्त राष्ट्र को अब जमीन पर उतरकर इस मूक तबाही को रोकना होगा, ताकि बुनियादी चिकित्सा के अभाव में दम तोड़ रहे बच्चों और निर्दोष नागरिकों की जान बचाई जा सके।