मस्जिद-मदरसा डेमोलिशन पर AIMPLB का बड़ा फैसला, देशव्यापी आंदोलन की तैयारी
मुस्ल्मि नाउ ब्यूरो, नई दिल्ली
नई दिल्ली में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) की एक अहम बैठक हुई। इस बैठक की अध्यक्षता बोर्ड के अध्यक्ष मौलाना खालिद सैफुल्लाह रहमानी ने की। बैठक में देश के मौजूदा हालात और मुसलमानों से जुड़े मुद्दों पर गंभीर चर्चा हुई। हाल के दिनों में कई राज्यों में मस्जिदों, मजारों और मदरसों को अवैध बताकर ढहाए जाने की घटनाओं पर बोर्ड ने गहरी चिंता जताई है। मुस्लिम समुदाय के भीतर बढ़ते गुस्से और असुरक्षा की भावना को देखते हुए बोर्ड ने अब एक बड़ा कदम उठाने का फैसला किया है।
so the Mosque is demolished just because of the poster saying I love Muhammad, what else would Muslims Say….
— Hanzla (@hanzla_ammad) June 22, 2026
hindutwa at it's peak in Endia
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नफरत और बुलडोजर एक्शन के खिलाफ बनेगा मोर्चा
मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने देश भर में मुसलमानों के सामाजिक और राजनीतिक हाशिए पर जाने के खिलाफ एक बड़ा देशव्यापी आंदोलन शुरू करने का ऐलान किया है। बोर्ड के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. एसक्यूआर इलियास ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि इसके लिए एक विशेष कार्य समिति (एक्शन कमेटी) का गठन किया गया है। यह समिति देश के धर्मनिरपेक्ष हिंदुओं, नागरिक समाज संगठनों (सिविल सोसाइटी) और अन्य शांतिप्रिय लोकतांत्रिक तबकों के साथ मिलकर काम करेगी। इस आंदोलन का मकसद समाज में बढ़ रही सांप्रदायिक नफरत, आपसी सद्भाव को पहुंच रहे नुकसान और अल्पसंख्यकों के अधिकारों के हनन के खिलाफ आवाज उठाना है।
इस मुद्दे पर दिल्ली में एक बड़ी प्रेस कॉन्फ्रेंस भी आयोजित की गई, जिसमें कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद भी शामिल हुए। बुद्धिजीवियों और मुस्लिम संगठनों का कहना है कि सिर्फ एकतरफा कार्रवाई के तहत मस्जिदों और मदरसों को निशाना बनाया जा रहा है, जबकि इस तरह के प्रशासनिक अभियानों में निष्पक्षता की भारी कमी दिखाई दे रही है।
देश के सेक्युलर हिन्दुओं को जगाने का काम करेगा Muslim Personal Law Board | नफ़रत के ख़िलाफ़ चलेगी बड़ी मुहिम | @Dr_SQRIlyas @AIMPLB_Official#AIMPLB #muslim #secular #hindu #masjid #UCC #badmer pic.twitter.com/zxwpDs8Gym
— The Pillar India (@ThePillarIndia) June 23, 2026
यूसीसी (UCC) पर कानूनी लड़ाई तेज करने का संकल्प
बैठक में विभिन्न राज्यों द्वारा समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की कोशिशों का भी कड़ा विरोध किया गया। बोर्ड का तर्क है कि जबरन यूसीसी लागू करना संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत मिली धार्मिक स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार के खिलाफ है। उत्तराखंड और गुजरात के बाद अब असम, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में भी इसे लागू करने की तैयारियां चल रही हैं।
बोर्ड ने साफ किया है कि वह इस मामले में पूरी ताकत से कानूनी लड़ाई लड़ेगा। उत्तराखंड यूसीसी कानून के खिलाफ पहले ही नैनीताल उच्च न्यायालय में याचिका दायर की जा चुकी है। बोर्ड आने वाले समय में अन्य राज्यों द्वारा बनाए जाने वाले ऐसे ही कानूनों को भी अदालत में चुनौती देगा। मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के मुताबिक, यूसीसी कोई अनिवार्य संवैधानिक आदेश नहीं है, बल्कि यह राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांतों का हिस्सा है, जिसे जबरन थोपा नहीं जा सकता।
दिल्ली में देश भर में मस्जिद तोड़े जाने के खिलाफ बड़ी प्रेस कॉन्फ्रेंस । सलमान खुर्शीद भी शामिल। pic.twitter.com/Mo5GSZJoVx
— National Dastak (@NationalDastak) June 23, 2026
वंदे मातरम की अनिवार्यता को कोर्ट में दी जाएगी चुनौती
बोर्ड की कार्यकारी समिति ने सरकारी कार्यक्रमों और स्कूलों में वंदे मातरम को अनिवार्य बनाने की कोशिशों पर भी आपत्ति जताई है। बोर्ड ने स्पष्ट किया कि यदि केंद्र सरकार या कोई राज्य सरकार संसद या प्रशासनिक आदेश के जरिए वंदे मातरम को सभी नागरिकों या स्कूली छात्रों के लिए अनिवार्य करती है, तो उसे तुरंत अदालत में चुनौती दी जाएगी।
कोलकाता उच्च न्यायालय के उस अंतरिम आदेश का बोर्ड ने स्वागत किया, जिसमें स्कूलों और मदरसों में वंदे मातरम गाने के निर्देश पर रोक लगाई गई थी। बोर्ड का कहना है कि वंदे मातरम के कुछ हिस्से ‘तौहीद’ यानी ईश्वर की एकता के इस्लामी सिद्धांत के अनुकूल नहीं हैं। इसलिए इसे धार्मिक नजरिए से स्वीकार नहीं किया जा सकता। बोर्ड ने मुस्लिम समाज से अपील की है कि वे देशभक्ति या सहिष्णुता के नाम पर अपनी धार्मिक आस्थाओं से समझौता न करें।
देश के सामने रखी जाएगी जमीनी हकीकत
आंदोलन के पहले चरण के रूप में मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने देश भर में एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने का निर्णय लिया है। इस व्यापक दस्तावेज में मुस्लिम समुदाय की मौजूदा सामाजिक स्थिति, सांप्रदायिक तनाव की घटनाएं और मौलिक अधिकारों के उल्लंघन के मामलों को दर्ज किया जाएगा। इस रिपोर्ट को प्रकाशित करने का मुख्य उद्देश्य देश के उन नागरिकों, बुद्धिजीवियों और लोकतांत्रिक ताकतों का ध्यान आकर्षित करना है जो देश के संवैधानिक मूल्यों और सामाजिक न्याय में विश्वास रखते हैं। बोर्ड का मानना है कि देश की दूसरी सबसे बड़ी आबादी के अधिकारों का हनन केवल एक समुदाय का नुकसान नहीं है, बल्कि यह पूरे देश के लोकतांत्रिक ताने-बाने और विकास की रफ्तार को कमजोर करता है।

