बारामुला की गलियों से टीम इंडिया तक पहुंचे आकिब नबी
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नौशद अख्तर | श्रीनगर
जम्मू कश्मीर के बारामुला की जिन गलियों में कभी ठीक से क्रिकेट खेलने की जगह नहीं थी, वहीं से निकला एक लड़का अब भारतीय टेस्ट टीम के दरवाजे तक पहुंच गया है। नाम है आकिब नबी। 29 साल के इस तेज गेंदबाज को श्रीलंका दौरे के लिए भारतीय टेस्ट टीम में जगह मिली है। उन्हें जसप्रीत बुमराह की जगह टीम में शामिल किया गया है।

आकिब नबी के लिए यह सिर्फ टीम इंडिया का बुलावा नहीं है। यह जम्मू कश्मीर क्रिकेट के लिए भी एक ऐतिहासिक क्षण है। अगर उन्हें श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट खेलने का मौका मिलता है, तो वह जम्मू कश्मीर के पहले टेस्ट क्रिकेटर बन जाएंगे।
भारत और श्रीलंका के बीच दो टेस्ट मैचों की सीरीज 15 अगस्त से गॉल में शुरू होगी। दूसरा टेस्ट 23 अगस्त से कोलंबो में खेला जाएगा। इससे पहले 7 अगस्त को कोलंबो में तीन दिवसीय अभ्यास मैच होना है।
बारामुला से श्रीनगर की दूरी भले बहुत ज्यादा न हो, लेकिन क्रिकेट के अवसरों के मामले में यह इलाका लंबे समय तक पीछे रहा। यहां बड़े क्रिकेट मैदान और बेहतर सुविधाएं सीमित थीं। सर्दियों और बारिश में खेलना भी मुश्किल होता था। ऐसे माहौल से निकलकर भारत की टेस्ट टीम तक पहुंचना आकिब नबी के लिए आसान नहीं था।
फुटबॉल से शुरू हुआ था खेल का सफर
आकिब की पहली पसंद क्रिकेट नहीं थी। बचपन में वह बारामुला की गलियों में फुटबॉल खेलते थे। फुटबॉल उनके लिए पहला खेल था। फिर मोहल्ले के लड़कों को क्रिकेट खेलते देखा। टीवी पर क्रिकेट मैच देखने का असर भी हुआ।
धीरे धीरे क्रिकेट के प्रति दिलचस्पी बढ़ने लगी। शुरुआत टेनिस बॉल से हुई। वह दोस्तों के साथ खेलते थे। गेंदबाजी में उनकी खास दिलचस्पी पैदा हो गई। खासकर तेज गेंद फेंकने का जुनून बढ़ता गया।
यहीं से फुटबॉल पीछे छूट गया और क्रिकेट जिंदगी का हिस्सा बन गया।
लेकिन उस समय आकिब के पास किसी बड़े क्रिकेट अकादमी की सुविधा नहीं थी। बारामुला में क्रिकेट का ढांचा भी आज जैसा नहीं था। ऐसे में मोहल्ले के मैदान और टेनिस बॉल क्रिकेट ही उनकी शुरुआती पाठशाला बने।
एक मैच ने बदल दी दिशा
साल 2016 और 2017 के आसपास बारामुला के एक छोटे मैदान पर टेनिस बॉल क्रिकेट का मुकाबला चल रहा था। आकिब ने वहां ऐसा प्रदर्शन किया कि विपक्षी टीम के कप्तान की नजर उन पर पड़ी।
उन्हीं की मदद से आकिब को बीसीसी रेड्स क्लब में खेलने का मौका मिला। यहां उनके क्रिकेट को एक व्यवस्थित दिशा मिली।
शुरुआत में आकिब मुख्य रूप से बल्लेबाजी करने वाले ऑलराउंडर थे। लेकिन अभ्यास के साथ उनकी गेंदबाजी मजबूत होती गई। तेज गेंदबाजी में उनकी दिलचस्पी बढ़ी। धीरे धीरे एक बल्लेबाज से उनका सफर पेस गेंदबाज की तरफ मुड़ गया।
यह बदलाव आगे चलकर उनकी सबसे बड़ी ताकत बना।

रणजी ट्रॉफी ने दिया बड़ा मंच
आकिब नबी ने 2019 और 2020 के रणजी सत्र में जम्मू कश्मीर के लिए प्रथम श्रेणी क्रिकेट में पदार्पण किया। झारखंड के खिलाफ अपने शुरुआती मैच में पहली पारी में उन्हें कोई विकेट नहीं मिला। लेकिन दूसरी पारी में उन्होंने पांच विकेट लेकर अपनी टीम की जीत में बड़ी भूमिका निभाई।
इसके बाद उनका सफर लगातार आगे बढ़ता रहा।
2024 और 2025 के रणजी सत्र में आकिब ने सिर्फ 13.93 की औसत से 44 विकेट लिए। यह प्रदर्शन उनके लिए एक बड़ा मोड़ साबित हुआ।
लेकिन असली धमाका अगले सत्र में हुआ।

60 विकेट और रणजी ट्रॉफी का ऐतिहासिक खिताब
2025 और 2026 का रणजी सत्र आकिब नबी के करियर का सबसे यादगार दौर बन गया। उन्होंने 17 पारियों में 60 विकेट लिए। उनका गेंदबाजी औसत 12.65 रहा।
वह पूरे रणजी सत्र के सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज बने। उनके प्रदर्शन के लिए उन्हें टूर्नामेंट का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी भी चुना गया।
जम्मू कश्मीर के लिए सबसे बड़ा मौका रणजी ट्रॉफी के सेमीफाइनल में आया। बंगाल के खिलाफ आकिब ने नौ विकेट लिए। इस शानदार प्रदर्शन ने जम्मू कश्मीर को रणजी ट्रॉफी के फाइनल में पहुंचा दिया।
यह अपने आप में इतिहास था। जम्मू कश्मीर की टीम अपने 67 साल के रणजी इतिहास में पहली बार फाइनल तक पहुंची थी।
फाइनल में भी आकिब नहीं रुके। उन्होंने 54 रन देकर पांच विकेट लिए। जम्मू कश्मीर ने पहली बार रणजी ट्रॉफी का खिताब जीत लिया।
इस जीत में आकिब नबी की भूमिका सबसे अहम रही। उनकी गेंदों ने टीम को वह मुकाम दिया, जिसका इंतजार जम्मू कश्मीर क्रिकेट को दशकों से था।
आंकड़े बताते हैं कितनी बड़ी है उपलब्धि
आकिब की पिछले दो रणजी सत्रों की गेंदबाजी पर नजर डालें तो उन्होंने कुल 104 विकेट लिए हैं।
प्रथम श्रेणी क्रिकेट में उनके नाम 43 मैचों में 162 विकेट हैं। उनका गेंदबाजी औसत 18.63 है।
2025 की दलीप ट्रॉफी में भी उन्होंने एक खास रिकॉर्ड बनाया। ईस्ट जोन के खिलाफ उन्होंने लगातार चार गेंदों पर चार विकेट लिए। इसके साथ वह प्रथम श्रेणी क्रिकेट में यह उपलब्धि हासिल करने वाले चुनिंदा भारतीय गेंदबाजों में शामिल हो गए।
इन आंकड़ों के बावजूद आईपीएल में उनके लिए दरवाजा लंबे समय तक नहीं खुला। आखिरकार 2026 में दिल्ली कैपिटल्स ने उन्हें अपनी टीम में शामिल किया।
भारत ए के लिए प्रदर्शन ने दिलाया मौका
आकिब के लिए भारतीय टीम का रास्ता सिर्फ रणजी ट्रॉफी से नहीं बना। हाल में भारत ए के श्रीलंका दौरे पर भी उन्होंने प्रभाव छोड़ा।
दो मैचों में छह विकेट लेकर उन्होंने चयनकर्ताओं का ध्यान अपनी ओर खींचा। तेज गेंदबाजी में उनकी निरंतरता और लाल गेंद के क्रिकेट में प्रदर्शन ने उन्हें राष्ट्रीय टीम के लिए मजबूत दावेदार बनाया।
इसके बाद उन्हें वह फोन आया, जिसका इंतजार हर क्रिकेटर करता है।
इंग्लैंड के खिलाफ वनडे सीरीज में कार्डिफ में जसप्रीत बुमराह को घुटने में चोट लगी थी। वह चोट पूरी तरह ठीक नहीं हो सकी। बुमराह के श्रीलंका दौरे से बाहर होने के बाद भारतीय चयनकर्ताओं ने उनकी जगह आकिब नबी को चुना।
बारामुला की गलियों में टेनिस बॉल से शुरू हुआ सफर अब टीम इंडिया तक पहुंच चुका था।
जम्मू कश्मीर के पहले टेस्ट क्रिकेटर बनने का मौका
आकिब नबी से पहले जम्मू कश्मीर के दो क्रिकेटर भारतीय सीनियर टीम तक पहुंचे हैं। परवेज रसूल और उमरान मलिक को भारत के लिए खेलने का मौका मिला।
आकिब इस सूची में तीसरे खिलाड़ी हैं। लेकिन एक बड़ा अंतर है। वह जम्मू कश्मीर से भारतीय टेस्ट टीम में चुने जाने वाले पहले क्रिकेटर हैं।
अगर श्रीलंका के खिलाफ उन्हें अंतिम एकादश में मौका मिलता है, तो वह जम्मू कश्मीर के पहले टेस्ट क्रिकेटर बन जाएंगे।
यही वजह है कि बारामुला से लेकर पूरे कश्मीर में उनकी चर्चा हो रही है।
बारामुला में खुशी, युवाओं में नई उम्मीद
आकिब नबी के भारतीय टेस्ट टीम में चुने जाने की खबर सामने आने के बाद बारामुला में क्रिकेट प्रेमियों के बीच खुशी देखी गई। कई जगह लोगों ने मिठाइयां बांटीं। स्थानीय युवाओं के लिए यह खबर इसलिए भी खास है क्योंकि आकिब किसी बड़े क्रिकेट केंद्र से नहीं आए हैं।
वह एक साधारण परिवार से निकलकर इस मुकाम तक पहुंचे हैं। उनके पिता स्कूल शिक्षक हैं।
कश्मीर में क्रिकेट की लोकप्रियता पहले से ही बहुत ज्यादा है। लेकिन मैदान और प्रशिक्षण की सुविधाओं की कमी लंबे समय से चुनौती रही है। आकिब की सफलता ऐसे युवाओं के लिए उम्मीद पैदा करती है, जो सीमित साधनों के बावजूद क्रिकेट में आगे बढ़ना चाहते हैं।
उनकी कहानी यह बताती है कि प्रतिभा सिर्फ बड़े शहरों और बड़ी अकादमियों में पैदा नहीं होती। कभी कभी वह किसी छोटे मैदान में टेनिस बॉल से खेलते हुए भी सामने आती है।
बुमराह की जगह मिली, अब इतिहास बनाने की बारी
आकिब नबी को टीम में जसप्रीत बुमराह की जगह मिली है। इसलिए उन पर दबाव भी होगा। लेकिन उनके पास अपने प्रदर्शन का मजबूत आधार है।
रणजी ट्रॉफी में 60 विकेट। जम्मू कश्मीर को पहली रणजी ट्रॉफी। बंगाल के खिलाफ नौ विकेट। दलीप ट्रॉफी में लगातार चार गेंदों पर चार विकेट। प्रथम श्रेणी क्रिकेट में 162 विकेट। भारत ए के लिए श्रीलंका में छह विकेट।
ये आंकड़े बताते हैं कि उनका चयन अचानक नहीं हुआ है।
अब निगाहें श्रीलंका पर हैं।
15 अगस्त को गॉल में जब भारत और श्रीलंका के बीच टेस्ट मुकाबला शुरू होगा, तब जम्मू कश्मीर के हजारों क्रिकेट प्रेमियों की नजर टीवी स्क्रीन पर होगी। बारामुला की गलियों में टेनिस बॉल से गेंद फेंकने वाला लड़का अगर भारत की टेस्ट कैप पहनता है, तो यह सिर्फ आकिब नबी की व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं होगी।
यह जम्मू कश्मीर क्रिकेट के इतिहास का नया पन्ना होगा।
और शायद उस दिन बारामुला की कोई छोटी गली भी खुद से यही कहेगी कि बड़े सपनों के लिए हमेशा बड़ा मैदान जरूरी नहीं होता।
Got a chance to have a conversation with Auqib Nabi for @ddsportschannel . His rise is the domestic cricket has been phenomenal. If he makes his Test debut, he will be the first Test cricketer from Jammu and Kashmir to do so 🏏#auqibnabi #IndianCricket pic.twitter.com/O5I2dTVNof
— Karamdeep (@oyeekd) August 3, 2026
आकिब नबी की कहानी एक नजर में
नाम: आकिब नबी
उम्र: 29 वर्ष
स्थान: बारामुला, जम्मू कश्मीर
भूमिका: तेज गेंदबाज
प्रथम श्रेणी पदार्पण: 2019 और 2020 रणजी सत्र
प्रथम श्रेणी विकेट: 43 मैचों में 162
2024 और 2025 रणजी विकेट: 44
2025 और 2026 रणजी विकेट: 60
रणजी ट्रॉफी 2025 और 2026: टूर्नामेंट के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी
जम्मू कश्मीर की उपलब्धि: पहली रणजी ट्रॉफी
आईपीएल टीम: दिल्ली कैपिटल्स
भारत ए: श्रीलंका दौरे पर दो मैचों में छह विकेट
भारतीय टेस्ट टीम: श्रीलंका दौरे के लिए पहली बार चयन
ऐतिहासिक मौका: जम्मू कश्मीर के पहले टेस्ट क्रिकेटर बनने का अवसर
सवाल जवाब
आकिब नबी कौन हैं?
आकिब नबी जम्मू कश्मीर के बारामुला के तेज गेंदबाज हैं। उन्होंने रणजी ट्रॉफी में शानदार प्रदर्शन के बाद भारतीय टेस्ट टीम में जगह बनाई है।
आकिब नबी को भारतीय टीम में क्यों चुना गया?
जसप्रीत बुमराह के चोट के कारण श्रीलंका टेस्ट दौरे से बाहर होने के बाद आकिब नबी को उनके स्थान पर टीम में शामिल किया गया है।
आकिब नबी ने रणजी ट्रॉफी में कितने विकेट लिए?
2025 और 2026 के रणजी सत्र में उन्होंने 17 पारियों में 60 विकेट लिए और टूर्नामेंट के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी बने।
क्या आकिब नबी भारत के लिए टेस्ट खेल चुके हैं?
उनका भारतीय टेस्ट टीम में पहली बार चयन हुआ है। अगर उन्हें अंतिम एकादश में जगह मिलती है, तो वह अपना टेस्ट डेब्यू करेंगे।
आकिब नबी जम्मू कश्मीर के लिए क्यों ऐतिहासिक हैं?
वह जम्मू कश्मीर से भारतीय टेस्ट टीम में चुने जाने वाले पहले क्रिकेटर हैं। टेस्ट डेब्यू करने पर वह राज्य के पहले टेस्ट क्रिकेटर भी बन जाएंगे।
आकिब नबी ने क्रिकेट कहां से शुरू किया?
उन्होंने बारामुला की गलियों में टेनिस बॉल क्रिकेट से शुरुआत की थी। बचपन में उनकी पहली पसंद फुटबॉल थी।
आकिब नबी के पिता क्या करते हैं?
उनके पिता स्कूल शिक्षक हैं। एक साधारण पारिवारिक पृष्ठभूमि से निकलकर आकिब ने राष्ट्रीय स्तर तक अपनी पहचान बनाई है।

