श्रीनगर में बच्चों को स्क्रीन से दूर करेगा Funkara Adventure Park
मुस्लिम नाउ ब्यूरो, श्रीनगर
कश्मीर के बच्चों की दिनचर्या भी अब देश के दूसरे हिस्सों के बच्चों से बहुत अलग नहीं रही। मोबाइल फोन, ऑनलाइन गेम और दूसरे डिजिटल गैजेट उनके रोजमर्रा के जीवन का हिस्सा बन गए हैं। पढ़ाई के लिए भी स्क्रीन का इस्तेमाल बढ़ा है। मनोरंजन का बड़ा साधन भी मोबाइल और इंटरनेट बन गया है। इसका असर बच्चों के बाहर खेलने और शारीरिक गतिविधियों में हिस्सा लेने पर दिखाई देता है।
इसी बदलती आदत के बीच श्रीनगर के नौगाम में बच्चों के लिए फनकार एडवेंचर पार्क शुरू किया गया है। इसका उद्घाटन मीरवाइज ए कश्मीर डॉ. मौलवी मोहम्मद उमर फारूक ने किया। पार्क का मकसद बच्चों को मोबाइल और स्क्रीन की दुनिया से कुछ समय के लिए बाहर निकालना है। यहां खेल, रोमांच, कला और प्रकृति को एक साथ जोड़ा गया है।

उद्घाटन के मौके पर मीरवाइज ने इस पहल को बच्चों के शारीरिक विकास, रचनात्मकता और प्रकृति से जुड़ाव की दिशा में महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि आज के डिजिटल दौर में बच्चों का स्क्रीन टाइम तेजी से बढ़ रहा है। मोबाइल और ऑनलाइन गेम ने बच्चों के खेलने के तरीके को बदल दिया है। ऐसे में ऐसी जगहों की जरूरत बढ़ गई है, जहां बच्चे घर से बाहर निकलें और खेलते हुए कुछ नया सीखें।
नौगाम का फनकार एडवेंचर पार्क इसी सोच के साथ तैयार किया गया है। यहां बच्चों के लिए कई तरह की गतिविधियां रखी गई हैं। इनमें पॉटरी, तीरंदाजी और एडवेंचर स्पोर्ट्स शामिल हैं। पार्क में खरगोश और बत्तख जैसे छोटे जानवर भी हैं। इससे बच्चों को प्रकृति के करीब रहने का मौका मिलता है। वे केवल खेलते नहीं हैं, बल्कि अपने आसपास की दुनिया को भी समझते हैं।
बच्चों के लिए ऐसी जगह की जरूरत इसलिए भी महसूस की जा रही है क्योंकि लगातार स्क्रीन देखने से उनकी रोजमर्रा की गतिविधियां सीमित हो सकती हैं। मोबाइल पर गेम खेलना आसान है। वीडियो देखना भी आसान है। लेकिन मैदान में दौड़ना, किसी खेल में हिस्सा लेना, मिट्टी से कुछ बनाना या तीरंदाजी सीखना अलग अनुभव है। इन गतिविधियों में शरीर और दिमाग दोनों सक्रिय रहते हैं।
मीरवाइज ने उद्घाटन के दौरान इसी बात पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि स्वस्थ दिमाग के लिए स्वस्थ शरीर जरूरी है। माता पिता बच्चों की पढ़ाई को लेकर गंभीर रहते हैं। स्कूल और परीक्षा को लेकर भी उनकी चिंता रहती है। लेकिन शारीरिक स्वास्थ्य, व्यायाम और आउटडोर गतिविधियों पर भी उतना ही ध्यान दिया जाना चाहिए।

उनका कहना था कि बच्चों के विकास को केवल किताबों और कक्षा तक सीमित नहीं किया जा सकता। खेल और रचनात्मक गतिविधियां भी सीखने का हिस्सा हैं। बच्चे जब अपने हाथ से मिट्टी का खिलौना बनाते हैं, तीर चलाना सीखते हैं या किसी एडवेंचर गतिविधि में भाग लेते हैं, तो उनमें आत्मविश्वास भी बढ़ता है।
फनकार एडवेंचर पार्क का संचालन कोहकन्स ग्लोबल प्राइवेट लिमिटेड करता है। कंपनी मनोरंजन, शिक्षा और एडवेंचर गतिविधियों के क्षेत्र में काम कर रही है। उसका दावा है कि यह कश्मीर घाटी में बच्चों के लिए विशेष रूप से तैयार की गई शुरुआती फन और एडवेंचर कंपनियों में से एक है।
#VIDEO || Mirwaiz-e-Kashmir Dr Moulvi Mohammad Umar Farooq inaugurated the Funkara Adventure Park for children, in Nowgam, describing it as a welcome initiative to promote physical activity, creativity and a connection with nature among the younger generation.@MirwaizKashmir… pic.twitter.com/PVaEhHl5av
— KNS (@KNSKashmir) August 9, 2026
कंपनी पिछले दो साल से अधिक समय से स्कूलों में फन कार्निवल आयोजित कर रही है। इसके अलावा बडगाम में गेमिंग जोन भी चलाया जा रहा है। इन गतिविधियों के जरिए कंपनी ने बड़ी संख्या में बच्चों तक पहुंच बनाने की कोशिश की है। कंपनी के अनुसार उसके फन कार्निवल और गेमिंग जोन से अब तक करीब डेढ़ लाख से अधिक बच्चे जुड़ चुके हैं।
इस काम के पीछे विचार केवल बच्चों का मनोरंजन करना नहीं है। कंपनी बच्चों के लिए सीखने और खेलने के तरीके को बदलने की बात करती है। उसका मानना है कि अगर सीखने की प्रक्रिया में खेल और रोमांच को शामिल किया जाए तो बच्चे ज्यादा उत्सुकता के साथ उसमें हिस्सा लेते हैं।
पॉटरी इसका एक उदाहरण है। मिट्टी के साथ काम करने में बच्चों को धैर्य रखना पड़ता है। उन्हें अपनी कल्पना का इस्तेमाल करना होता है। हाथ और आंख के बीच तालमेल भी बनता है। इसी तरह तीरंदाजी में एकाग्रता की जरूरत होती है। निशाना साधने के लिए शरीर को स्थिर रखना पड़ता है। एडवेंचर स्पोर्ट्स बच्चों में साहस और आत्मविश्वास बढ़ाने का अवसर दे सकते हैं।

पार्क में प्रकृति का माहौल भी तैयार किया गया है। बच्चों को खरगोश और बत्तख जैसे जीवों को देखने का मौका मिलता है। यह अनुभव उनके लिए मोबाइल स्क्रीन से बिल्कुल अलग है। स्क्रीन पर दिखाई देने वाली चीजों के बजाय यहां बच्चे चीजों को अपने सामने महसूस कर सकते हैं। यही अनुभव उन्हें प्रकृति के साथ जोड़ने में मदद कर सकता है।
कश्मीर में बच्चों के लिए इस तरह के सुरक्षित मनोरंजन स्थल की जरूरत लंबे समय से महसूस की जाती रही है। घाटी के बच्चों का बचपन भी पिछले कुछ वर्षों में कई तरह की सामाजिक और परिस्थितिजन्य चुनौतियों से प्रभावित रहा है। लंबे समय तक घरों के भीतर रहना और सामान्य जनजीवन में रुकावटों ने बच्चों की दिनचर्या पर असर डाला है। ऐसे में आउटडोर गतिविधियों के लिए सुरक्षित स्थान मिलना अपने आप में महत्वपूर्ण है।
फनकार एडवेंचर पार्क इस जरूरत को एक नए तरीके से पूरा करने की कोशिश कर रहा है। यहां बच्चों को खेल और मनोरंजन के साथ कुछ नया सीखने का अवसर मिलता है। परिवारों के लिए भी यह एक ऐसी जगह हो सकती है जहां बच्चे मोबाइल फोन से दूरी बनाकर कुछ घंटे सक्रिय रह सकें।
कंपनी का जोर बच्चों के सर्वांगीण विकास पर है। उसके अनुसार अलग अलग गतिविधियों के जरिए बच्चों की अलग रुचियों और क्षमताओं को समझने की कोशिश की जाती है। हर बच्चा एक जैसा नहीं होता। किसी को खेल पसंद है। किसी को कला में दिलचस्पी होती है। कोई रोमांचक गतिविधियों की तरफ आकर्षित होता है। ऐसे में गतिविधियों की विविधता बच्चों को अपनी पसंद तलाशने का अवसर देती है।
स्कूलों के साथ मिलकर फन कार्निवल आयोजित करना भी इसी योजना का हिस्सा है। स्कूल परिसर में बच्चों को खेल और मनोरंजन से जुड़ी गतिविधियां उपलब्ध कराई जाती हैं। इससे उन बच्चों तक भी पहुंच बनती है, जो हर सप्ताह ऐसे पार्क में नहीं आ सकते।
बडगाम का गेमिंग जोन भी कंपनी की गतिविधियों का हिस्सा है। हालांकि गेमिंग को लेकर बच्चों और अभिभावकों के बीच बहस चलती रहती है। फर्क इस बात से पड़ता है कि बच्चे किस तरह की गतिविधि में कितना समय बिताते हैं। फनकार का जोर मनोरंजन के साथ शारीरिक और रचनात्मक गतिविधियों को जोड़ने पर है।
यही वजह है कि नौगाम में शुरू हुआ पार्क केवल एक और मनोरंजन स्थल के रूप में नहीं देखा जा रहा है। इसे बच्चों के लिए एक ऐसे स्थान के तौर पर विकसित करने की कोशिश है, जहां खेल, सीखना, प्रकृति और रोमांच एक साथ मौजूद हों।
मीरवाइज ने उम्मीद जताई कि यह पहल कश्मीर में बच्चों के अनुकूल और अधिक सुरक्षित स्थान बनाने की दिशा में प्रेरणा देगी। अगर ऐसे पार्क घाटी के दूसरे हिस्सों में भी विकसित होते हैं तो बच्चों को अपने घर और स्कूल के अलावा स्वस्थ मनोरंजन के लिए नए विकल्प मिल सकते हैं।
बच्चों का स्क्रीन टाइम कम करना केवल मोबाइल छीन लेने से संभव नहीं है। उन्हें विकल्प भी देने होंगे। जब बच्चे के पास खेलने के लिए मैदान हो, मिट्टी से कुछ बनाने की जगह हो, तीरंदाजी सीखने का अवसर हो या प्रकृति के बीच कुछ घंटे बिताने की सुविधा हो तो वह स्क्रीन के बाहर की दुनिया को भी पसंद कर सकता है।
नौगाम का फनकार एडवेंचर पार्क इसी विकल्प की शुरुआत करता दिखाई देता है। कश्मीर के बच्चों के लिए यह सिर्फ खेल और मनोरंजन की जगह नहीं, बल्कि कुछ समय मोबाइल से दूर रहने का मौका भी है। यहां बच्चे दौड़ सकते हैं, खेल सकते हैं, मिट्टी से खेल सकते हैं, तीरंदाजी आजमा सकते हैं और प्रकृति को करीब से देख सकते हैं।
आखिरकार बच्चों का बचपन केवल स्क्रीन पर नहीं बीतना चाहिए। उन्हें खुली हवा चाहिए। खेल चाहिए। दोस्त चाहिए। मिट्टी और प्रकृति से रिश्ता चाहिए। सबसे बढ़कर उन्हें ऐसी जगह चाहिए जहां वे बिना किसी दबाव के खेलते हुए सीख सकें। श्रीनगर का यह नया एडवेंचर पार्क फिलहाल इसी जरूरत को पूरा करने की कोशिश कर रहा है। अगर यह प्रयोग सफल रहा तो कश्मीर में बच्चों के लिए ऐसे और स्थान बनाने की राह भी खुल सकती है।

